स्वच्छता कर्मी से उद्यमी तक: धर्मेंद्र की नमस्ते-एसयूवाई यात्रा

स्वच्छता कर्मी से आत्मनिर्भर उद्यमी तक: नमस्ते-एसयूवाई के तहत धर्मेंद्र कुमार रे की यात्रा
नई दिल्ली /10 सितंबर 2026 /अटल हिन्द न्यूज रिसोर्स द्वारा PIB
कौशल, अनुभव और दृढ़ संकल्प उद्यमिता के लिए सार्थक अवसरों का सृजन कर सकते हैं। वित्तीय सहायता और मशीनीकृत उपकरणों तक समय पर पहुंच मिलने से स्वच्छता क्षेत्र में कार्यरत पेशेवर अपने अनुभव और विशेषज्ञता को स्थायी आजीविका में बदल सकते हैं तथा अपने परिवारों के बेहतर भविष्य को सुरक्षित कर सकते हैं।
बिहार के 39 वर्षीय स्वच्छता कर्मी श्री धर्मेंद्र कुमार रे ने व्यावहारिक सीख, निरंतर प्रयास और स्वरोजगार की स्पष्ट आकांक्षा के माध्यम से अपनी यात्रा को आगे बढ़ाया है।
छठी कक्षा तक शिक्षा प्राप्त करने के बाद उन्होंने सीवर और सेप्टिक टैंक की सफाई के कार्य में विशेष अनुभव हासिल किया। उन्होंने नमस्ते योजना के तहत उपलब्ध सहायता का उपयोग करते हुए अपनी स्वयं की मशीनीकृत स्वच्छता सेवा स्थापित की।
अपनी तकनीकी क्षमताओं को मजबूत करने के लिए श्री रे ने नोएडा में शिवा एंड शिवा कंपनी में लगभग चार वर्षों तक हेल्पर और ग्रेवर मशीन ऑपरेटर के रूप में कार्य किया। इस दौरान उन्होंने सीवर-सफाई मशीनरी के संचालन और रखरखाव का व्यावहारिक ज्ञान प्राप्त किया तथा स्वच्छता सेवाओं के क्षेत्र में मूल्यवान अनुभव हासिल किया।
इस अनुभव ने उन्हें स्वरोजगार अपनाने और अपने परिवार के लिए अधिक सुरक्षित आजीविका का सृजन करने के लिए प्रेरित किया। हालांकि, विशेष मशीनरी और उपयुक्त वाहन खरीदने की लागत उनके इस उद्देश्य को उद्यम का रूप देने में एक बड़ी बाधा बनी हुई थी।
नमस्ते योजना के स्वच्छता उद्यमी योजना घटक के तहत श्री रे को जेटिंग कम ग्रेवर मशीन तथा महिंद्रा मैक्स सिटी सीबीसी 1.3 एलएक्स वाहन खरीदने के लिए अग्रिम पूंजीगत सब्सिडी के रूप में वित्तीय सहायता प्राप्त हुई। परियोजना की कुल लागत 14,77,500 रुपये थी, जिसमें 7,38,750 रुपये का ऋण और 7,38,750 रुपये की पूंजीगत सब्सिडी शामिल थी।
इस सहायता से उन्होंने अपनी स्वयं की मशीनीकृत स्वच्छता सेवा स्थापित की। इस मशीन को ग्रेटर नोएडा प्राधिकरण के तहत सीवर और सेप्टिक टैंक की सफाई के कार्य में लगाया गया है। इससे वे अपने तकनीकी कौशल का उपयोग एक आत्मतनिर्भर उद्यमी के रूप में कर पा रहे हैं और स्थायी आजीविका के अवसर सुनिश्चित कर रहे हैं।
योजना के हस्तक्षेप के बाद स्वतंत्र रूप से स्वच्छता संबंधी कार्य करने के माध्यम से श्री रे की मासिक आय में लगभग 25,000 रुपये से 30,000 रुपये तक की वृद्धि हुई है। उनकी आर्थिक स्थिति में सुधार ने उन्हें अपनी पत्नी और दो बच्चों को बिहार से नोएडा लाने में सक्षम बनाया, ताकि पूरा परिवार एक साथ रह सके।
उन्होंने अपने बच्चों को नोएडा के एक अच्छे स्कूल में भी दाखिला कराया है, जिससे बेहतर शिक्षा और उज्जवल भविष्य के अवसरों तक पहुंच सुनिश्चित हुई है। समर्थन ने परिवार की आर्थिक सुरक्षा को मजबूत किया है और जीवन की अधिक स्थिर और सम्मानजनक गुणवत्ता में योगदान दिया है।
एक अनुभवी स्वच्छता कर्मी से आत्मनिर्भर उद्यमी बनने तक श्री धर्मेंद्र कुमार रे की यात्रा नमस्ते-एसयूवाई पहल के परिवर्तनकारी प्रभाव को दर्शाती है। उनकी सफलता यह दर्शाती है कि व्यावहारिक कौशल, दृढ़ संकल्प और संस्थागत सहायता मिलकर स्थायी आजीविका का सृजन कर सकती है, परिवारों को सशक्त बना सकती है और मशीनीकृत स्वच्छता सेवाओं को आगे बढ़ा सकती है।