शराब निर्भरता से स्थिर जीवन तक: कवि की एनएपीडीडीआर यात्रा

शराब पर निर्भरता से पुनः स्थिर जीवन की ओरः स्वस्थ जीवन, जिम्मेदारी और आशा की दिशा में कवि की यात्रा
नई दिल्ली /10 सितंबर 2026 /अटल हिन्द न्यूज रिसोर्स द्वारा PIB
शराब पर निर्भरता धीरे-धीरे व्यक्ति के शारीरिक स्वास्थ्य, भावनात्मक कल्याण, पारिवारिक संबंधों और स्थिर आजीविका बनाए रखने की क्षमता को प्रभावित कर सकती है। समय पर परामर्श, व्यवस्थित पुनर्वास और निरंतर पारिवारिक सहयोग से व्यक्ति इस निर्भरता पर काबू पा सकता है तथा आत्मविश्वास और गरिमा के साथ अपने जीवन का पुनर्निर्माण कर सकता है।
नशीली दवाओँ की मांग में कमी के लिए राष्ट्रीय कार्य योजना (एनएपीडीडीआर) के अंतर्गत प्रदान किये गये सहयोग के प्रभाव को प्रदर्शित करते हुए तमिलनाडु के इरोड जिले के 31 वर्षीय निवासी कवि (बदला हुआ नाम) ने लगभग छह वर्षों तक रही शराब की निर्भरता पर काबू पा लिया है और अब अधिक स्वस्थ और स्थिर जीवन जी रहे हैं। उनकी यात्रा दीर्घकालिक सुधार सुनिश्चित करने में परामर्श, पुनर्वास और निरंतर अनुवर्ती देखभाल की महत्वपूर्ण भूमिका को दर्शाती है।
कवि, जो सामान्य वर्ग से संबंधित है, ने हाई स्कूल तक शिक्षा प्राप्त की है और पूर्णकालिक कर्मचारी के रूप में कार्य करते हैं। कभी-कभार शराब पीने से शुरू हुई उनकी आदत धीरे-धीरे निर्भरता में बदल गई। इसका कारण भावनात्मक तनाव, पारिवारिक दबाव और व्यक्तिगत निराशाओं से निपटने का उनका प्रयास था।
शराब पर निर्भरता ने उनके शारीरिक स्वास्थ्य, भावनात्मक कल्याण, संबंधों और दैनिक जिम्मेदारियों को निभाने की क्षमता पर प्रतिकूल प्रभाव डाला। वे भावनात्मक अस्थिरता, बाधित नींद, प्रेरणा में कमी और आत्मविश्वास खोने जैसी समस्याओं का सामना करने लगे। इसके परिणामस्वरूप वे धीरे-धीरे सामाजिक रूप से अलग-थलग पड़ने लगे और अपने भविष्य को लेकर अनिश्चितता महसूस करने लगे।
उनके परिवार की चिंता तब और बढ़ गई जब उन्होंने कवि के भावनात्मक उग्र व्यवहार और सामाजिक मेलजोल से दूरी बनाने को देखा। शराब पर निर्भरता का उनके काम पर उपस्थित रहने और कार्य-प्रदर्शन पर भी प्रतिकूल प्रभाव पड़ा। इससे उनके लिए स्थिर आय बनाए रखना और अपने वित्तीय मामलों का प्रबंधन करना कठिन हो गया। इससे परिवार पर भावनात्मक और आर्थिक दबाव और बढ़ गया।
इन चुनौतियों के बावजूद कवि अपने जीवन में बदलाव लाने के लिए दृढ़ संकल्पित रहे। 7 अक्टूबर, 2025 को उन्हें तमिलनाडु के इरोड जिले में स्थित सेंटर फॉर एक्शन एंड रूरल एजुकेशन, जो नशा-आश्रित व्यक्तियों के लिए एकीकृत पुनर्वास केंद्र (आईआरसीए) है, से सहायता प्राप्त हुई।
एक व्यवस्थित पुनर्वास योजना के अंतर्गत कवि को व्यक्तिगत परामर्श, भावनात्मक एवं मनोवैज्ञानिक सहायता, पारिवारिक परामर्श, प्रेरक एवं व्यवहार संबंधी मार्गदर्शन, पुनः लत लगने से बचाव संबंधी शिक्षा तथा नियमित अनुवर्ती निगरानी प्रदान की गयी। कार्यक्रम में भावनाओं को नियंत्रित करने, तनावपूर्ण परिस्थितियों से स्वस्थ तरीके निपटने की रणनीतियों, समूह चिकित्सा, पारिवार की भागीदारी और जीवनशैली में सुधार पर भी ध्यान दिया गया।
कवि ने पुनर्वास कार्यक्रम में सक्रिय रूप से भाग लिया और सुधार तथा व्यक्तिगत विकास के प्रति मज़बूत प्रतिबद्धता दिखाई। निरंतर परामर्श से उन्हें शराब पर निर्भरता के प्रभाव को समझने, तनाव से अधिक प्रभावी ढंग से निपटने और भावनात्मक चुनौतियों का सामना करने के लिए स्वस्थ तरीके अपनाने में मदद मिली।
निरंतर मार्गदर्शन और पारिवारिक सहयोग से उन्होंने धीरे-धीरे अपना आत्मविश्वास और भावनात्मक स्थिरता पुनः प्राप्त की। उन्होंने अपने परिवार के सदस्यों के साथ स्वस्थ संबंधों को पुनः स्थापित किया और अपनी दैनिक दिनचर्या और पेशेवर जिम्मेदारियों के प्रबंधन में अधिक जिम्मेदारी दिखानी शुरू की।
पुनर्वास प्रक्रिया से उनके रोजगार और वित्तीय स्थिति में भी सकारात्मक बदलाव आया। नियमित रूप से काम पर उपस्थित रहने, बेहतर कार्य-प्रदर्शन और वित्तीय प्रबंधन में सुधार से उनकी कमाई की क्षमता मज़बूत हुई और उनके परिवार को अधिक आर्थिक स्थिरता प्राप्त हुई।
वर्तमान में कवि शराब से दूर रहते हुए एक स्वस्थ, अधिक स्थिर और उत्पादक जीवन जी रहे हैं। वे अभी भी अनुवर्ती परामर्श सत्रों में भाग लेते हैं और अपने सुधार को बनाए रखने के लिए प्रतिबद्ध हैं। उनका यह परिवर्तन समान चुनौतियों का सामना कर रहे अन्य लोगों के लिए भी प्रेरणा का स्रोत बन गया है।
कवि की यात्रा यह दर्शाती है कि शराब पर निर्भरता से दृढ़ संकल्प, उचित उपचार, परिवार की भागीदारी और निरंतर संस्थागत सहयोग के माध्यम से उबरा जा सकता है। नए आत्मविश्वास और जिम्मेदारी के साथ उन्होंने गरिमा, आर्थिक स्थिरता और आशा से भरे जीवन की ओर कदम बढ़ाया है।