क्या सत्ता के अहंकार के आगे फिर मौन हो जाएगा लोकतंत्र?

सत्ता का शिखर या लोकतंत्र का क्षरण: 2014 के बाद का भारत और नीतियों का सच | आलेख: राजकुमार अग्रवाल जब हुक्मरान अपनी जय-जयकार के शोर में इतने मसरूफ हो जाएं कि उन्हें सड़कों पर उठती सिसकियां और आक्रोश न सुनाई दे, तो समझ लेना चाहिए कि लोकतंत्र का दायरा सिकुड़ रहा है।” भारतीय राजनीति … Continue reading क्या सत्ता के अहंकार के आगे फिर मौन हो जाएगा लोकतंत्र?