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अंधेरगर्दी का हरियाणा में सबसे विलक्षण नजारा,एथलेटिक ट्रैक के बीचों-बीच मैदान में छोड़ दिया  बिजली का खंभा

अंधेरगर्दी का हरियाणा में सबसे विलक्षण नजारा,एथलेटिक ट्रैक के बीचों-बीच मैदान में छोड़ दिया  बिजली का खंभा
भ्रष्टाचारियों ने मिलीभगत करके
स्टेडियम के ऊपर के बीचो-बीच से बिजली लाइन गुजरने और एथलेटिक ट्रैक के बीचो-बीच बिजली का खंभा खड़ा होने वाला पानीपत का स्टेडियम दुनिया का पहला स्टेडियम
===अटल हिन्द ब्यूरो ==
पानीपत। गलियों और सड़कों के बीच में पेड़ और खंभे तो आपने कई बार देखे होंगे लेकिन एथलेटिक ट्रैक के बीचों-बीच खंभा दुनिया में पहली बार देखा गया है।यह अजूबा भी हरियाणा के खाते में दर्ज हो गया है। जी हां जो यह फोटो आप देख रहे हैं, यह हरियाणा में आंखें मूंदकर किए जा रहे विकास कार्यों और अंधेरगर्दी का जीता जागता उदाहरण है।

किस तरह से सरकारी कार्यों को आंखें मूंदकर अपने फायदे के लिए बगैर किसी नियम कायदों के पूरा किया जा रहा है इसका गवाह पानीपत का खेल स्टेडियम बन गया हैबरसों बाद पानीपत को स्टेडियम मिला लेकिन इसके सिंथेटिक एथलेटिक्स ट्रैक को बनाने वालों ने लापरवाही का इतिहास रचने का काम कर दिया और यह दिखा दिया कि हरियाणा में किस तरह मिलीभगत से बदइंतजामी के जरिए विकास कार्य किए जा रहे हैं।

सिंथेटिक एथलेटिक ट्रैक बनाने वाले ठेकेदार ने ट्रैक के बीचो बीच आ रहे बिजली के खंभे को हटवाने की जहमत भी नहीं उठाई।
दुनिया में यह पहला स्टेडियम है जिसके बीचो-बीच से बिजली की लाइन होकर जा रही है। खेल विभाग के आला अफसरों ने इतनी भी जहमत नहीं उठाई कि एथलेटिक ट्रैक बनाने और स्टेडियम की मंजूरी देने के बाद बिजली लाइन को वहां से शिफ्ट करा देते।
लेकिन ऐसा करने की जहमत और कष्ट कौन उठाए???
खेल विभाग के अधिकारियों ने ट्रैक बनाने वाले कंपनी की अंधेरगर्दी को आंखें मूंदकर स्वीकार कर दिया और ट्रैक को पास भी कर दिया।

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यह कृपादृष्टि करने से पहले खेल विभाग के अधिकारियों ने यह भी नहीं देखा कि एथलेटिक्स ट्रैक के बीच खंभा आने का क्या अंजाम होगा और उसके यहां पर रहने से एथलीट ट्रैक के कोई मायने नहीं होंगे।
एक तरफ प्रदेश के मुखिया मनोहर लाल खट्टर और खेल मंत्री संदीप सिंह हरियाणा में खेल को सफलता के नए आयाम पर ले जाने के बड़े-बड़े दावे करते हैं, वही उनकी नाक के नीचे अधिकारी ठेकेदारों से मिलीभगत करके एथलेटिक ट्रैक के बीचो बीच में खंभा लगाने का नया इतिहास रच देते हैं।
ऐसी खेल संबंधित लापरवाही दुनिया के किसी और देश में नहीं देखी जा सकती। लानत है ट्रैक बनाने वाले को…लानत है इसको पास करने वाले खेल अधिकारियों पर और लानत है खेल व्यवस्था को देखने वाले लोगों पर ।एथलेटिक ट्रैक के बीचो-बीच खड़ा यह बता रहा है कि भ्रष्टाचार के हमाम में सब नंगे नहीं अंधे हैं और अपने कमीशन को लेकर सब आंखें बंद करके बैठे हैं।

उन्हें कोई मतलब नहीं कि स्टेडियम के ऊपर से बिजली लाइन जा रही है…उन्हें कोई मतलब नहीं कि एथलेटिक ट्रैक के बीच में बिजली का खंभा कैसे रह गया…. क्यों रह गया???? इस अंधेरगर्दी में शामिल लोगों के खिलाफ मुख्यमंत्री मनोहर लाल खट्टर को कड़ी से कड़ी कार्रवाई करनी चाहिए ताकि भविष्य में सरकारी पैसे और व्यवस्था के साथ खिलवाड़ न किया जा सके।

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