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ओम प्रकाश चौटाला चुनाव लड़ने की तैयारी में,बीजेपी को बस्ता पकड़ने वाले ढूढ़ने पड़ेंगे ?

ओम प्रकाश चौटाला चुनाव लड़ने की तैयारी में,बीजेपी को बस्ता पकड़ने वाले ढूढ़ने पड़ेंगे ?
Kaithal (Atal hind/Rajkumar Aggarwal)पूर्व सीएम कि रिहाई के बाद से हरियाणा में राजनीतिक हलचल तेज होते दिख रही है. लोग उनकी रिहाई को इनेला के भविष्य से जोड़कर देख रहे हैं.जूनियर बेसिक भर्ती घोटाले में हरियाणा के पूर्व मुख्यमंत्री ओम प्रकाश चौटाला की सजा पूरी हो गई है. उनकी रिहाई के बाद से ही जींद में नए नए सियासी कयास लगाए जा रहे  है. माना जा रहा है कि चौटाला अब फिर से अपनी सियासी पारी को शुरू करने के लिए चुनावी मैदान में उतरेंगे.
अगर ऐसा होता है तो जेजेपी और बीजेपी के लिए ओपी  चौटाला खतरें की घंटी बनेगे और अभय चौटाला की दहाड़ से बीजेपी का बस्ता थामने वाला कोई मिलेगा भी  या नहीं ये तो वक्त बताएगा लेकिन घर को दोफाड़ करने वाली जेजेपी को जरूर बंसी लाल  कुलदीप बिश्नोई जैसा हश्र देखना पड़ेगा।

दरअसल अभी नियमों के मुताबिक भले ही ओम प्रकाश चौटाला भ्रष्टाचार के आरोप में सजा पूरी कर चुके हों लेकिन वे चुनाव लड़ने के लिए अभी भी प्रतिबंधित हैं. लोक प्रतिनिधित्व कानून की धारा 1951 के अनुसार सजा खत्म होने के बाद भी अगले छह साल तक कोई आरोपी चुनाव नहीं लड़ सकता. लेकिन चौटाला के पास नियमों के अनुसार धारा 11 के तहत चुनाव लड़ने व प्रतिबंध को खत्म करने के लिए चुनाव आयोग के पास अर्जी दायर करने का विकल्प मौजूद है.नियम के मुताबिक चुनाव आयोग तीन सदस्यीय चुनाव आयोग कानून के तहत उनके प्रतिबंध को हटा सकता है या फिर प्रतिबंध की अवधि को घटा सकता है. इससे पूर्व इसी कानून की मदद से सिक्किम के वर्तमान मुख्यमंत्री प्रेम सिंह तमांग ने 2019 में चुनाव लड़ा था.
नियम के विरुद्ध 2013 में दायर हुई थी याचिका
बता दें कि पहले इस कानून में यह पाबंदी सजा सुनाए जाने के 6 साल बाद तक लागू होती थी, लेकिन 2002 में इस कानून में बदलाव किया गया और इस पाबंदी को सजा पूरी होने के छह साल बाद तक लागू कर दिया गया. इसके विरोध में बाद में 2013 में सुप्रीम कोर्ट में पुनर्विचार याचिका दायर की गई थी लेकिन कोर्ट ने इसे खारिज कर दिया था.
पहले था चुनाव में प्रतिबंध का यह नियम
पूर्व सीएम कि रिहाई के बाद से हरियाणा में राजनीतिक हलचल तेज होते दिख रही है. लोग उनकी रिहाई को इनेला के भविष्य से जोड़कर देख रहे हैं और माना जा रहा है कि उनके आने से हरियाणा के आगामी विधानसभा चुनाव में इनेला को काफी फायदा पहुंचेगा. कानूनी तौर पर सजा के बाद वह छह साल तक सक्रीय राजनीति नहीं कर सकते. जनप्रतिनिधित्व कानून में कहा गया है कि सजा पूरी होने के बाद कोई भी व्यक्ति छह साल तक चुनाव नहीं लड़ सकता.
साल 1999-2000 के दौरान हुआ था घोटाला
रोहिणी के स्पेशल CBI जज विनोद कुमार ने इंडियन नेशनल लोकदल के प्रमुख और हरियाणा के पूर्व सीएम ओमप्रकाश चौटाला को घोटाले को इस घोटाले में मुख्य साजिशकर्ता करार दिया था. साल 1999-2000 के दौरान 3206 जूनियर बेसिक ट्रेंड (जेबीटी) शिक्षकों की भर्ती में घोटाले के इस मामले में पूर्व आईएएस संजीव कुमार, पूर्व आईएएस विद्याधर, मौजूदा विधायक शेर सिंह बडशामी और 16 महिला अधिकारियों को भी दोषी करार दिया था. संजीव कुमार ने ही सबसे पहले इस घोटाले का खुलासा किया था, लेकिन सीबीआई जांच में वो खुद भी इसमें शामिल पाए गए थे.
ओपी चौटाला का राजनीतिक सफर
चौधरी ओमप्रकाश चौटाला पांच बार साल 1970, 1990, 1993, 1996 और 2000 में हरियाणा विधान सभा के सदस्य रह चुके हैं. साल 1989 में ओम प्रकाश चौटाला पहली बार प्रदेश के मुख्यमंत्री बने. इसके बाद वह 1990, 1991 और 1999 में भी मुख्यमंत्री पद की दौड़ में विजयी हुए. 1999 में ओम प्रकाश चौटाला नरवाना और रोरी दोनों निर्वाचन क्षेत्र से जीते थे.
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