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गुरुग्राम हरियाणा

जनाब पटौदी विधानसभा क्षेत्र के हेली मंडी में ही है यह टूटा बांध

जनाब पटौदी विधानसभा क्षेत्र के हेली मंडी में ही है यह टूटा बांध

हेलीमंडी नगर पालिका क्षेत्र हरियाणा राज्य का अभिन्न हिस्सा है

मंगलवार देर रात को पूरी तरह से मुंरम्मत किया क्षतिग्रस्त बांध

बांध टूटने से मकानों सहित खेतों में भर गया 4 से 5 फुट तक पानी

लोगों की मांग पटौदी-हेली मंडी के बीच बांध पर पक्की सड़क बने

फतह सिंह उजाला
पटौदी ।
 बरसात जैसी प्राकृतिक आपदा के समय बचाव के लिए बस्तियों और कस्बों सहित गांव के आसपास बांध बनाने की परंपरा अतीत से चली आ रही है । हैरानी उस वक्त हुई जब बीते रविवार-सोमवार मध्य रात्रि के समय पटौदी विधानसभा क्षेत्र के हेली मंडी इलाके में बांध टूटने के बाद विभिन्न विभागों के अधिकारियों के बीच यही फैसला नहीं हो सका कि जिस स्थान पर यह बांध बना है वह स्थान किस विभाग के अधिकार क्षेत्र में है ।

सीधा और सरल जवाब यही है जो बांध टूटा यह जिला गुरुग्राम के पटौदी विधानसभा क्षेत्र में हेलीमंडी इलाके में ही है यह सभी और संबंधित विभाग सहित विभागों में कार्यरत अधिकारी भी हरियाणा के ही हैं। यह विषय और बात तो कहीं भी सामने नहीं आया टूटा बांध हरियाणा में ही नहीं है ? बांध टूटने की सूचना मिलते ही हेली मंडी अनाज मंडी के व्यापारियों सहित बांध के आसपास के आवासीय क्षेत्र में हड़कंप मच गया । अपने स्तर पर पालिका के चुने हुए प्रतिनिधियों के द्वारा  बांध में तेजी से आ रहे पानी को रोकने का प्रयास भी किया गया । इस बीच सूचना शासन प्रशासन तक नहीं पहुंचा दी गई ।ं

मौका मुआयना के लिए पटौदी के एसडीएम प्रदीप कुमार पहुंचे ं उससे पहले विभिन्न विभागों के अधिकारी भी यहां पहुंच चुके थे , जब एसडीएम प्रदीप कुमार के द्वारा हेली मंडी पालिका, पीडब्ल्यूडी विभाग, मार्केटिंग बोर्ड व अन्य विभागों के अधिकारियों से जवाब तलब किया जिस स्थान पर बांध बना है यह जगह किस विभाग के अधिकार क्षेत्र और बांध भी किस विभाग के अधिकार क्षेत्र में है ? इस पर अधिकारियों ने अपना अपना पल्ला झाड़ दिखायां। मौके पर मौजूद अधिकारियों के द्वारा जानकारी एकत्रित करने पर पटौदी के एसडीएम प्रदीप कुमार के द्वारा हेली मंडी पालिका प्रशासन के जिम्म्में क्षतिग्रस्त हुए बांध के हिस्से की मरम्मत किया जाना लगाया गया । इस बीच जिला प्रशासन से लेकर चंडीगढ़ तक हेली मंडी क्षेत्र में बांध टूटने की सूचना के साथ मकानों में जलभराव और खेतों में जलभराव से फसलों के नुकसान की सूचना से खलबली मचना आरंभ हो गई । सूत्रों के मुताबिक वरिष्ठ वरिष्ठ अधिकारी क्षतिग्रस्त बांध और इसकी मरम्मत की जानकारी लेते रहे ।

सूत्रों के मुताबिक जिला प्रशासन की तरफ से मंगलवार देर रात को भी अधिकारी मौका मुआयना के लिए पहुंचे ं। इसके बाद में क्षतिग्रस्त हुए इस बांध को ऊंचाई के लेवल तक समतल कर दिया गया , बांध टूटने के कारण जय देव कॉलोनी पार्ट 2 में दर्जनों मकानों में 4 से 5 फुट तक पानी भर गया।ं अनेक मकानों में दरारे आ गई , कुछ निर्माणाधीन कमरे धराशाई भी हो गएं  ।   ंदूसरी ओर बांध की मरम्मत के बाद पानी का स्तर ऊंचा उठता चला जाने से बाजरा सहित अन्य फसलें 4 से 5 फुट तक डूबती चली गई । अभी तक यह बात रहस्य बनी हुई है कि आखिर इतनी भारी मात्रा में पानी आया तो आखिर कहां से और किस प्रकार से यहां हेली मंडी क्षेत्र तक पहुंच गया ? जहां जहां से भी यह बरसाती पानी बहता हुआ हेली मंडी क्षेत्र की तरफ आता गया, क्या बीच में किसी भी संबंधित विभाग के द्वारा या आसपास के अन्य विभागीय अधिकारियों को इसके बारे में जानकारी देना जरूरी नहीं समझा गया।
हेली मंडी व्यापार मंडल के अध्यक्ष रमेश कुमार गर्ग के मुताबिक पटौदी से हेली मंडी के बीच यह बांध 1927-28 के आसपास बनाया गया था । 1977 में जब पहली बार भयंकर बाढ़ आई थी ,तब बरसाती पानी से बचाव के लिए बांध एक प्रकार से ढाल बन गया थां । व्यापारी नेता रमेश घर के द्वारा भी हैरानी जाहिर की गई है कि एसडीएम महोदय पाटोदी क्षेत्र के जिम्मेदार और जवाबदेह अधिकारी के प्रति विभिन्न विभागों सहित अधिकारी भी जवाब दे हैं । लेकिन यह एक घिसी पिटी परंपरा चली आ रही है कि किसी भी बड़ी आपदा के समय में कोई भी विभााग अपनी सीधी जिम्मेदारी से बचते हुए पल्ला झाड़ कर दिखाते चले आ रहे हैं । उन्होंने हेली मंडी और पटौदी क्षेत्र की तरफ से पटौदी से हेली मंडी के बीच जो बांध बना है , उस पर सड़क मार्ग बनाने की हरियाणा सरकार से मांग की है । इसका लाभ यह होगा कि यह पटौदी और हेली मंडी के बीच में जाम लगने की स्थिति में एक वैकल्पिक बाईपास के रूप में बेहद उपयोगी साबित हो सकेगा ।

दूसरी ओर मानसून को देखते हुए समाचार लिखे जाने तक भी बरसात एक बार फिर से आरंभ हो चुकी थीं। और जिस प्रकार से बांध का पानी मकानों सहित आसपास के इलाके में भर चुका है उसे देखते हुए मानसून के दौरान फूटने वाली बीमारियों का यहां आस-पास में रहने वाले लोगों के बीच में एक प्रकार से आतंक साफ साफ दिखाई दे देने लगा है । समाचार लिखे जाने तक बांध की पूरी तरह से मरम्मत होने के उपरांत कथित रूप से जो पानी हेली मंडी क्षेत्र की तरफ आ गया वह बरसात के बाद अरावली की पहाड़ियों से बहकर आने वाला पानी बताया जा रहा है और पानी का स्वभाव है जिस तरफ भी ढलान हो पानी उस तरफ ही बहता हुआ चलता चला जाता है । अब देखना यह है कि इस प्रकार की आम जनमानस के लिए अचानक पैदा होने वाली समस्याओं के समाधान के लिए शासन प्रशासन और सरकार के द्वारा किस प्रकार की दूरगामी योजनाएं बना कर राहत प्रदान की जा सकेगी।

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