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यानी रूल 158 तो पहले भी था  किताबें, वर्दियां कहीं से भी खरीदो ,शायद जिला प्रशासन भूल गया था या फिर ,,,,हिस्सेदारी चल रही थी ,

यानी रूल 158 तो पहले भी था  किताबें, वर्दियां कहीं से भी खरीदो ,शायद जिला प्रशासन भूल गया था या फिर ,,,,हिस्सेदारी चल रही थी ,,

–सभी प्राइवेट स्कूल संचालक करें रूल 158 की पालना–अभिभावकों को नहीं किया जा सकता किसी एक बुक सेलर से किताबें, वर्दियां इत्यादि खरीदने के लिए बाध्य–स्कूलों की जिम्मेदारी बच्चों का सर्वांगीण विकास करने में अभिभावकों से है ज्यादा :- एसडीएम मनीष लोहान

–एसडीएम मनीष लोहान ने ली प्राईवेट स्कूल संचालकों की बैठक–रूल 158 की पालना के दिए निर्देश

कैथल, 6 अप्रैल (Atal Aind   )

एसडीएम मनीष लोहान ने कहा कि सभी प्राइवेट स्कूल संचालकों की जिम्मेदारी बच्चों का सर्वांगीण विकास करने में अभिभावकों से ज्यादा है। ये सभी संस्थान रूल 158 की पालना करते हुए बच्चों को गुणवत्ता परक शिक्षा देने का कार्य करें।

 

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रूल 158 के तहत किसी भी अभिभावक को किसी एक बुक सेलर से किताबें व वर्दियां इत्यादि खरीदने के लिए बाध्य नहीं किया जा सकता। यदि कोई प्राइवेट स्कूल संचालक रूल की अवहेलना करेगा तो उसके खिलाफ आवश्यक कार्रवाई अमल में लाई जा सकती है।

That is, rule 158 was there even before, buy books, uniforms from anywhere, maybe the district administration had forgotten or else,,,, the share was going on,

एसडीएम मनीष लोहान लघु सचिवालय के सभागार में प्राइवेट स्कूल संचालकों की बैठक लेने के दौरान बोल रहे थे। उन्होंने कहा कि सरकार की हिदायतों के अनुसार प्राइवेट स्कूल प्रथम, छठी, नौंवी तथा ग्यारहवीं कक्षा में वार्षिक फीस ले सकते हैं। इसके बीच में कोई बच्चा अगर स्कूल में लगातार पढ़ रहा है तो उससे वार्षिक फीस नहीं ली जा सकती।

सभी स्कूल संचालक अपने अधीनस्थ स्थापना शाखा के कर्मचारियों को इस बारे में अच्छी तरह से अवगत करवाएं, ताकि किसी भी प्रकार की कोई परेशानी नहीं हो। इसके साथ-साथ स्कूलों में नोटिस भी चस्पा करें कि अभिभावक किसी भी स्थान से पाठ्य सामग्री, वर्दी, जूते व अन्य सामान ले सकते हैं।

इस व्यवस्था से अभिभावकों को भी किसी भी स्थान से यह सामान लेने की सुविधा मिलेगी। कोई भी स्कूल स्वयं इस तरह की पाठ्य सामग्री नहीं बेचेगा।

इस तरह के कार्यों में अगर कोई संलिप्त पाया जाता है तो उसके खिलाफ आवश्यक कार्रवाई अमल में लाई जाएगी। शिक्षा एक व्यवसाय नहीं है, बल्कि  यह तो एक पैकेट सेवा का माध्यम है। शिक्षण संस्थानों से ही बच्चे शिक्षा प्राप्त करके अपना भविष्य उज्ज्वल बनाते हैं।

इस मौके पर डीएसपी कुलवंत सिंह, डीईओ अनिल शर्मा, डॉ. वरुण जैन, प्रज्ञा पाशा जैन, प्रवीण प्रजापति, डॉ. परविंद्र संधू, एनआर गुप्ता, अरुण शर्मा, रजत सिंगला, विवेक, राजीव शर्मा, कुलदीप पुनिया, मंजू, आयुष गर्ग, राकेश कुमार आदि मौजूद रहे।

जिला प्रशासन द्वारा जारी उपरोक्त ब्यान को देखते हुए तो ऐसा लगता है की प्राइवेट स्कूलों और जिला प्रशासन दोनों की मिलीभगत से छात्रों और अभिभावकों को लूटा  जा रहा था और लूट की कमाई भी हिस्सेदारी में जा रही थी।

वरना ऐसा कैसे हो सकता है की बीते इतने वर्षों से चली आ रही समस्या जिसके बारे में समाचार पत्र भी बड़े -बड़े शब्दों में लिखते रहे अभिभावक धरना प्रदर्शन करते रहे और कैथल जिला प्रशासन मूकदर्शक बना बैठा रहा समझ नहीं आ रहा जब कानून में रूल 158 है तो प्राइवेट स्कूल  वर्दी और किताबें जो मात्र हजार-पांच सौ की रही होगीं कई हजारों में कैसे बेचते रहे।

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