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हमें पत्रकारों की परवाह, दुरुपयोग के हर आरोप की जांच कर रहे हैं: एनएसओ ग्रुप के प्रमुख

हमें पत्रकारों की परवाह, दुरुपयोग के हर आरोप की जांच कर रहे हैं: एनएसओ ग्रुप के प्रमुख
नई दिल्ली: एनएसओ समूह के सह-संस्थापक शैलेव हुलियो ने पेगासस के उपयोग से जुड़े मानवाधिकार हनन के किसी भी मामले की जांच करने का वादा किया है.
यह बयान समाचार संगठनों के एक संघ द्वारा यह रिपोर्ट किए जाने के बाद आया है कि कैसे इजरायल स्थित स्पायवेयर निर्माता के ग्राहकों ने दुनियाभर के पत्रकारों के खिलाफ घातक स्पायवेयर टूल को तैनात किया था.
पेगासस प्रोजेक्ट के निष्कर्ष प्रकाशित होने के एक दिन बाद वाशिंगटन पोस्ट को एक साक्षात्कार में हुलियो ने हजारों नंबरों की सूची, जिसका विश्लेषण पेगासस प्रोजेक्ट ने किया, को यह कहकर खारिज करना जारी रखा कि इसका एनएसओ से कोई लेना-देना नहीं है.
हालांकि, उन्होंने यह भी कहा कि कुछ कथित आरोप परेशान करने वाले थे, जिनमें पत्रकारों पर जासूसी करना भी शामिल था.
उन्होंने अखबार से कहा, ‘व्यवस्था के दुरुपयोग के हर आरोप के लिए मैं चिंतित हूं. यह ग्राहकों को दिए भरोसे का हनन है. हम हर आरोप की जांच कर रहे हैं और अगर यह सच पाए जाते हैं, तो हम कड़ी कार्रवाई करेंगे.’
अपनी नवीनतम पारदर्शिता रिपोर्ट में एनएसओ ने उल्लेख किया कि उसने कथित दुरुपयोग की जांच के बाद 2016 से पांच ग्राहकों के साथ करार समाप्त कर दिया था, जिसमें पिछले साल एक मामला शामिल था जिसमें एक ‘सुरक्षा प्राप्त’ व्यक्ति को निशाना बनाने के लिए पेगासस का दुरुपयोग किया गया था.
प्रकाशन से पहले एनएसओ ने अपने कानूनी सलाहकार के माध्यम से पेगासस प्रोजेक्ट को निराधार और बढ़ा-चढ़कर पेश किया हुआ बताया था. पिछले हफ्ते बयानों में उसने कहा कि वह अपने ग्राहकों को दिए लाइसेंस वाले स्पायवेयर ऑपरेट नहीं करता है और उनकी विशिष्ट खुफिया गतिविधियों की उसे कोई खास जानकारी नहीं है.
अखबार ने कहा कि हुलियो ने रविवार को एक अधिक नरम रुख अपनाने की कोशिश की. हुलियो ने कहा, ‘कंपनी सामान्य रूप से पत्रकारों और कार्यकर्ताओं और नागरिक समाज की परवाह करती है.’
उन्होंने कहा, ‘हम समझते हैं कि कुछ परिस्थितियों में हमारे ग्राहक सिस्टम का दुरुपयोग कर सकते हैं और कुछ मामलों में जैसा कि हमने (एनएसओ) पारदर्शिता और उत्तरदायित्व रिपोर्ट में दर्ज किया है, हमारे पास सिस्टम का दुरुपयोग करने वाले ग्राहकों के लिए शटडाउन सिस्टम हैं.’
एनएसओ प्रमुख ने यह भी कहा कि कंपनी ने पिछले 12 महीनों में मानवाधिकारों के हनन के लिए दो ग्राहकों को निलंबित कर दिया है.

We care about journalists, are investigating every allegation of misuse: NSO Group chief

हुलियो का आश्वासन एक स्पष्ट प्रश्न उठाता है: यदि एनएसओ समूह को वास्तव में अपने ग्राहकों की विशिष्ट खुफिया गतिविधियों की कोई खास जानकारी नहीं है, तो यह कैसे यह निर्धारित या जांच करने का इरादा रखता है कि इसकी प्रणाली का दुरुपयोग किया गया है या नहीं?
जैसा कि गार्जियन ने बताया है, दुनियाभर के 180 पत्रकारों के फोन नंबर एनएसओ समूह के ग्राहकों के संभावित लक्ष्यों की लीक सूची में पाए गए थे.
उस सूची में कई जाने-माने नाम थे, जिनमें फाइनेंशियल टाइम्स के संपादक रूला खलाफ और मैक्सिकन पत्रकार सेसिलियो पिनेडा बिर्टो शामिल थे, जिनकी हत्या उनके फोन को सर्विलांस के लिए चुने जाने के एक महीने बाद कर दी गई थी. जितने भी नाम सामने आए हैं उनमें से एनएसओ ने खास तौर पर खलाफ का फोन हैक होने से इनकार किया है.
गार्जियन ने कहा, ‘सूची में शामिल पत्रकार वॉल स्ट्रीट जर्नल, सीएनएन, न्यूयॉर्क टाइम्स, अल जज़ीरा, फ़्रांस 24, रेडियो फ्री यूरोप, मीडियापार्ट, एल पाइस, एसोसिएटेड प्रेस, ल मोंद, ब्लूमबर्ग, एजेंस फ़्रांस प्रेस, द इकोनॉमिस्ट, रॉयटर्स और वॉयस ऑफ अमेरिका सहित वैश्विक स्तर पर कुछ सबसे बड़े प्रकाशनों में काम करते हैं. कई फ्रीलांसर भी सूची में हैं, जैसे कि बिर्टो.’
ब्रिटिश अखबार के विश्लेषण से पता चलता है कि संयुक्त अरब अमीरात, अजरबैजान, बहरीन, हंगरी, भारत, कजाकिस्तान, मैक्सिको, मोरक्को, रवांडा और सऊदी अरब की सरकारों ने स्पायवेयर के लक्ष्य के रूप में पत्रकारों को चुना होगा.
लीक हुए डेटाबेस और स्पायवेयर से इंफेक्ट किए फोन के फॉरेंसिक विश्लेषण के अनुसार, इस्तांबुल में सऊदी वाणिज्य दूतावास में सऊदी विरोधी और पत्रकार जमाल खशोगी की क्रूर हत्या से पहले के महीनों में और कम से कम एक साल बाद तक उनसे जुड़े लोगों, जिनमें उनकी करीबी दो महिलाएं भी शामिल थीं, को इजरायली कंपनी एनएसओ ग्रुप के ग्राहकों द्वारा संभावित निगरानी के लिए चुना गया था.
पेगासस से भारतीय पत्रकारों को निशाना बनाया गया
भारत में पेगासस प्रोजेक्ट एक फॉरेंसिक जांच के माध्यम से पत्रकारों के तीन फोन में पेगासस संक्रमण की उपस्थिति की पुष्टि करने में सक्षम था जिसमें दो फोन द वायर के संस्थापक संपादकों एमके वेणु और सिद्धार्थ वरदराजन के हैं और तीसरा इंडियन एक्सप्रेस के पूर्व सहयोगी संपादक और वर्तमान में द इंडिया केबल के कॉन्ट्रिब्यूटर सुशांत सिंह, परंजॉय गुहा ठाकुरता और एसएनएम अब्दी के हैं.
द हिंदू की विजेता सिंह के फोन में भी पेगासस से हैकिंग के प्रयास किए जाने के सबूत पाए गए.
परेशान करने वाली बात यह है कि वेणु और सुशांत सिंह के फोन में केवल लीक हुए डेटाबेस से संबंधित अवधि यानी 2016-2019 के लिए ही नहीं बल्कि वर्तमान में भी पेगासस घुसपैठ के लक्षण भी दिखाई दिए.
उस समय द ट्रिब्यून की डिप्लोमैटिक एडिटर स्मिता शर्मा के फोन में भी पेगासस हैक की कोशिश के प्रमाण मिले हैं.
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