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Lok Sabha Election Facts-भारत की जनता का पसंद हमेशा कांग्रेस रही बीजेपी ने बदले कई नाम ,निर्दलीयों का रहा दबदबा 

भारत की जनता का पसंद हमेशा कांग्रेस रही बीजेपी ने बदले कई नाम ,निर्दलीयों का रहा दबदबा

1951: देश में जब पहली बार हुआ मतदान, कितने उम्मीदवारों की जमानत हुई थी जब्त?

भारत की जनता का पसंद हमेशा कांग्रेस रही बीजेपी ने बदले कई नाम ,निर्दलीयों का रहा दबदबा 
1951: देश में जब पहली बार हुआ मतदान, कितने उम्मीदवारों की जमानत हुई थी जब्त?

 

आजाद भारत से 2019 तक का सफर जिसमे भारत की जनता ने अपनी धर्म निरपेक्षता की पहचान कायम रखने की भरपूर कोशिश की लेकिन देश में बदलते राजतीनिक वातावरण और नए मुखोटों ने छीर हरण कर भारत की जनता की एकता को खतम कर दिया जिसके चलते आज का भारत 1951 वाला भारत नहीं रहा। और ना की वो संसद भवन जिसे भारत का अभिमान समझा जाता था।

 

Lok Sabha Election Facts: पहला लोकसभा चुनाव (Lok Sabha Elections)बेहद खास था क्योंकि इससे आजाद भारत की नई सरकार (New government of independent India)चुनी जानी थी। इसमें कई उम्मीदवारों की जमानत जब्त हो गई थी। आइए जानते हैं कि जमानत जब्त होना क्या होता है और 1951-52 के चुनाव में कितने उम्मीदवारों की जमानत जब्त हुई थी।लक्षद्वीप में पहला लोकसभा चुनाव 1967 में हुआ था। लक्षद्वीप 1956 तक मालाबार निर्वाचन क्षेत्र का हिस्सा था। उस वर्ष एक अलग केंद्रशासित प्रदेश बन गया। 1957 और 1962 के बीच लक्षद्वीप में एक नामांकित सदस्य ही हुआ करता था। वे थे के नल्ला कोया थांगल। वर्ष 2014 तक यह वोटरों की संख्या के हिसाब से देश का सबसे छोटा लोकसभा निर्वाचन क्षेत्र था।
Lok Sabha Election Facts: लोकसभा चुनाव का बिगुल बज चुका है। देशभर में 19 अप्रैल से लेकर 1 जून तक 7 चरणों में वोट डाले जाएंगे। नतीजे 4 जून को आएंगे। इस दौरान जहां कई नेताओं को बड़ी जीत मिलेगी, तो वहीं कई ऐसे नेता भी होंगे, जिनकी जमानत जब्त हो जाएगी। आपने अक्सर सुना होगा कि चुनाव में किसी उम्मीदवार की जमानत जब्त हो गई। आखिर ये जमानत जब्त होना क्या होता है? देश में पहली बार आम चुनाव या लोकसभा चुनाव कैसा हुआ था। इसमें कितने उम्मीदवारों की जमानत जब्त हो गई थी?
1951 में भी था दुनिया का सबसे बड़ा चुनाव
साल 1951 में हुए भारत के आम चुनावों में दुनिया की आबादी का करीब 17 फीसदी हिस्सा मतदान करने वाला था। भारत का पहला लोकसभा चुनाव तब भी यह उस समय का सबसे बड़ा चुनाव था और आज भी दुनिया का सबसे बड़ा मतदान है। उस दौरान अलग-अलग तारीखों को मिलाकर कुल 17 दिन मतदान हुआ था। तब चुनाव आयोग ने पूरे देश में 1,96,084 मतदान केंद्र स्थापित किए गए थे।
सुकुमार सेन पहले चुनाव आयुक्त
निर्वाचन आयोग की स्थापना 25 जनवरी, 1950 को हुई। सुकुमार सेन पहले मुख्य चुनाव आयुक्त बने। उन्हीं की बदौलत पहला आम चुनाव हुआ, नागरिक पहली बार मताधिकार का इस्तेमाल कर पाए। उनकी ख्याति से प्रभावित सूडान ने भी उन्हें अपने यहां चुनाव करवाने बुलाया था। कहा जाता है, सेन की ही बदौलत दूसरे आम चुनाव में साढ़े चार करोड़ की बचत हो सकी। वे 1958 तक इस पद पर रहे। सेन को 1954 में पद्म भूषण से सम्मानित किया गया।
499 सीटों के लिए हुआ था पहला चुनाव
साल 1951-52 में हुए पहले लोकसभा चुनाव के दौरान भारत(bharat) की कुल जनसंख्या लगभग 36 करोड़ थी। पहले आम चुनाव में 10 करोड़ 59 लाख मतदाताओं ने वोट डाला था। 1951-52 के पहले लोकसभा चुनाव में कुल 45.67 फ़ीसदी मतदान हुआ था। इस चुनाव में देशभर में 499 सीटों के लिए वोट डाले गए थे और 1874 उम्मीदवार मैदान में थे । 1951-52 के आम चुनाव में कुल 53 पार्टियां चुनाव मैदान में थीं, जिसमें 14 राष्ट्रीय पार्टियां और 39 क्षेत्रीय पार्टियां थीं।
पहले मतदाता श्याम सरण नेगी
आजाद भारत (independent india)में पहली बार आम चुनाव फरवरी, 1952 में हुए थे, पर भारी बर्फबारी की आशंका के कारण हिमाचल में पांच महीने पहले मतदान की व्यवस्था की गई थी। सर्दियों के मौसम में काल्पा में चार से पांच फुट तक बर्फ गिरती थी, तापमान माइनस 20 डिग्री तक चला जाता है। चीनी तहसील के नागरिकों ने सबसे पहले मतदान किया और देश के पहले वोटर बने श्याम सरण नेगी। नेगी ने 25 अक्टूबर, 1951 को मतदान किया। वर्ष 2022 में 106 साल की उम्र में उनका निधन हो गया था। लोकतंत्र में मताधिकार को लेकर वे इतने जागरूक थे कि हर चुनाव में मतदान किया। हालांकि अधिक उम्र के चलते आखिरी बार मतदान घर से ही किया था। 2014 में चुनाव आयोग ने उन्हें ब्रांड एंबेसडर बनाया था।
कांग्रेस ने हासिल किया था प्रचंड बहुमत
आपको बता दें कि पहले लोकसभा चुनाव 25 अक्टूबर 1951 से लेकर 21 फरवरी 1952 तक हुए थे। इसमें कुल 489 सीटें थीं। हालांकि उस वक्त मतदान करने की न्यूनतम उम्र 21 साल थी। अब ये 18 वर्ष है। इस चुनाव में 54 राजनीतिक पार्टियों ने हिस्सा लिया था। जिसमें 14 नेशनल पार्टियां और बाकी रीजनल और इंडिपेंडेंट पार्टी शामिल थी। इस चुनाव में कांग्रेस को पहले चुनाव में प्रचंड बहुमत हासिल हुआ था। कांग्रेस को 364 सीटों पर जीत मिली थी।Congress has always been the choice of the people of India, BJP changed many names, independents remained dominant.
पहले चुनाव में कांग्रेस बनी थी सबसे बड़ी राजनीतिक पार्टी
पहली बार लोकसभा के लिए हुए आम चुनाव में कांग्रेस सबसे बड़ी राजनीतिक पार्टी बनकर उभरी थी. वामपंथियों को 27, समाजवादियों को 12 और जनसंघ को तीन सीटें मिली थीं. इसी जनसंघ से निकले लोगों ने बाद में भारतीय जनता पार्टी की स्थापना की थी. साल 1957 में 494 सीटों के लिए हुए चुनाव में भी कांग्रेस ही सबसे आगे रही और उसे 371 सीटें मिलीं. वामपंथियों को 27, समाजवादी को 19 और जनसंघ ने चार सीटें जीती थीं. सन् 1962 में 494 सीटों के लिए हुए तीसरे चुनाव में कांग्रेस को 361, वामपंथियों को 29, प्रजा समाजवादी को 12 और जनसंघ को 14 सीटें हासिल हुई थी.
कितने उम्मीदवारों की जमानत हुई थी जब्त?
चुनाव आयोग के आंकड़ों के अनुसार, पहले आम चुनावों में कुल 1874 उम्मीदवारों ने हिस्सा लिया था। जिसमें से 745 उम्मीदवारों की जमानत जब्त हो गई थी। राष्ट्रीय दलों की बात करें तो 1217 उम्मीदवारों ने हिस्सा लिया। इसमें से 344 उम्मीदवारों की जमानत जब्त हो गई।
क्या होता है जमानत जब्त होना?
चुनाव आयोग के नियमों के अनुसार, यदि उम्मीदवार कुल वैध वोटों का न्यूनतम छठा हिस्सा हासिल करने में विफल रहता है, तो उसकी जमानत जब्त हो जाती है। इसके बाद उसके द्वारा जमा कराई गई राशि राजकोष में चली जाती है। लोकसभा चुनाव लड़ने के लिए सामान्य वर्ग को 25 हजार, एससी, एसटी वर्ग के उम्मीदवारों को 12,500 रुपये जमानत राशि के तौर पर जमा कराने होते हैं।
==आजादी के बाद से लेकर अब तक जानें कितनी बार हुए हैं लोकसभा चुनाव, क्या रहे परिणाम?
साल 1952 में हुए लोकसभा चुनाव से लेकर अब तक कुल 17 बार लोकसभा चुनाव हो चुके हैं और 18वें चुनाव का शंखनाद हो गया है. अंग्रेजों से देश की आजादी के बाद पहली बार लोकसभा के लिए आम चुनाव 1951-52 में हुए थे. आइए आज जानते हैं कि भारत में आजादी से लेकर अब तक हुए लोकसभा के चुनावों के परिणाम क्या रहे.
साल 1952 में हुए लोकसभा चुनाव से लेकर अब तक कुल 17 बार लोकसभा चुनाव हो चुके हैं और 18वें चुनाव का शंखनाद हो गया है. अंग्रेजों से देश की आजादी के बाद पहली बार लोकसभा के लिए आम चुनाव 1951-52 में हुए थे. इस चुनाव में लोकसभा की 489 सीटों के लिए वोट डाले गए थे. इसमें कांग्रेस को 364 सीटें मिली थीं, जबकि जनसंघ को तब केवल 3 सीटों से संतोष करना पड़ा.
पांचवें चुनाव तक बरकरार रहा कांग्रेस का जलवा
चौथा चुनाव साल 1967 में 520 सीटों के लिए कराया गया था, जिसमें कांग्रेस आगे तो रही पर उसकी सीटें तीन सौ के नीचे आ गईं और उसे 283 सीटों पर जीत मिली थी. धीरे-धीरे आगे बढ़ रही जनसंघ को 35 सीटों पर जीत हासिल हुई. वहीं, वामपंथी दलों में सीपीआई को 23 और सीपीएम को 19 सीटों पर विजय मिली थी. प्रजा समाजवादी के प्रत्याशी 13 सीटों पर जीते थे. 518 सीटों के लिए साल 1971 में हुए पांचवें चुनाव में कांग्रेस ने फिर बड़ा हाथ मारा और उसे 352 सीटें मिलीं. सीपीएम को 25, सीपीआई को 24, डीएमके को 23 और जनसंघ को 21 सीटों पर जीत मिली थी.
1977 में जनता पार्टी ने दी थी कांग्रेस को पटखनी
आजादी के बाद से पांचवें लोकसभा चुनाव तक सबसे बड़ी पार्टी बनी रही कांग्रेस को साल 1977 के चुनाव में जनता पार्टी ने बुरी तरह पटखनी देकर सबसे बड़ी पार्टी बनकर उभरी. इसमें कांग्रेस को केवल 154 सीटें मिलीं, जबकि जनता पार्टी ने 542 में से 298 सीटों पर जीत हासिल की थी. हालांकि, 1980 में हुए अगले ही चुनाव में कांग्रेस फिर सत्ता में आ गई और उसे 353 सीटों पर विजय हासिल हुई. जनता (सेक्युलर) को 41, सीपीएम को 36, सीपीआई को 11 और डीएमके को 16 सीटें मिली थीं.
कांग्रेस को राजनीतिक करियर की सबसे बड़ी जीत मिली
इंदिरा गांधी की हत्या के बाद साल 1984 में हुए चुनाव में कांग्रेस को आम लोगों की ऐसी सहानुभूति मिली की उसने अपने राजनीतिक करियर की सबसे बड़ी जीत दर्ज करते हुए 415 सीटें हासिल कर लीं. तब तक भाजपा का गठन हो चुका था और इस चुनाव में उसने भी 2 सीटें जीती थीं. टीडीपी को 28, सीपीएम को 22, सीपीआई को छह सीटें हासिल हुई थीं. 1989 में कांग्रेस को 197, जनता दल को 141, भाजपा को 86, सीपीएम को 32, सीपीआई को 12 और टीडीपी को दो सीटें मिलीं. 1991 में कांग्रेस को 232, भाजपा को 119, जनता दल को 59, सीपीएम को 35, सीपीआई को 13 और टीडीपी को भी इतनी ही सीटें मिलीं.
11वें चुनाव में पहली बार भाजपा बनी सबसे बड़ी पार्टी
साल 1996 में हुए ग्यारहवें लोकसभा चुनाव के दौरान पहली बार भाजपा सबसे बड़ी पार्टी बनकर उभरी और उसे 161 सीटें मिलीं. कांग्रेस को 140, जनता दल को 46, सीपीएम को 32, समाजवादी पार्टी को 17, टीडीपी को 16, सीपीआई को 12 और बसपा को 11 सीटें मिली थीं. अगला चुनाव 1998 में हुआ तो भी भाजपा ही सबसे बड़ी पार्टी थी. उसे 182, कांग्रेस को 141 सीटें मिलीं. वहीं, सीपीएम को 32, सपा को 20, टीडीपी को 12, सीपीआई को नौ और बसपा को पांच सीटें मिली थीं.
13वें लोकसभा चुनाव में भी भाजपा की स्थिति बरकरार रही और उसे 1999 में 182 सीटें मिलीं, जबकि कांग्रेस 114 सीटों पर सिमट गई थी. 2004 में कांग्रेस की स्थिति थोड़ी सुधरी और उसने 145 सीटें हासिल की, जबकि भाजपा 138 सीटों पर ही जीत सकी थी. 2009 के चुनाव में कांग्रेस को 206 और भाजपा को 116 सीटें मिली थीं.
2014 में पूर्ण बहुमत के साथ सत्ता में आई भाजपा
2014 में लोकसभा का 16वां आम चुनाव शुरू हुआ तो प्रधानमंत्री के रूप में नरेंद्र मोदी का नाम आगे बढ़ाया जा चुका था. इस पर भाजपा ने 543 में से 282 सीटें हासिल कर लीं. कांग्रेस 44 सीटों तक सिमट गई. एआईएडीएमके ने 37 और टीएमसी ने 34 सीटें हासिल की थी. 2019 में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अगुवाई वाली सरकार ने 17वें आम चुनाव में फिर प्रचंड बहुमत से वापसी की और उसे 303 सीटों पर विजय प्राप्त हुई. कांग्रेस को 52 सीटें मिली थीं.
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