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गब्बर की पैनी नजर, किया ब्लड सेंटर सील

गब्बर की पैनी नजर, किया ब्लड सेंटर सील

जनता की सेहत के साथ खिलवाड़ करने वाले नहीं बच सकेंगे

गुरुग्राम के सेक्टर 56 के पुलिस थाना में किया गया मामला दर्ज

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सेक्टर 56 के सुशांत लोक पार्ट 2 में लायंस ब्लड सेंटर पर छापा

यहां अनियमितताएं पाए जाने पर ब्लड सेंटर पर लगाई गई सील

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फतह सिंह उजाला
गुरुग्राम । हरियाणा की राजनीति में गब्बर के नाम से चर्चित और पहचाने जाने वाले स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण और गृहमंत्री अनिल विज जिस शहर में जाएं और उनसे संबंधित मंत्रालय के किसी भी विभाग पर कार्यवाही ना हो ? ऐसा बहुत कम देखने को मिलता है । अनिल विज फेम गब्बर जिस भी शहर में जाते हैं उनकी पैनी नजर से गलत काम करने वाला कोई भी संस्थान और वहां काम करने वाले कर्मचारी, अधिकारी बचे नहीं रह सकते हैं। शनिवार को अनिल विज फेम गब्बर गुरुग्राम पहुंचे थे । उनके गुरुग्राम शहर में रहते हुए ही गुरुग्राम के सेक्टर 56 में सुशांत लोक पार्ट 2 के लायंस ब्लड सेंटर पर अनियमितताओं की शिकायतों को लेकर छापेमारी की गई । इस ब्लड सेंटर पर अनियमितताएं पाए जाने के बाद ब्लड सेंटर को सील कर दिया गया। सील किया जाने के साथ ही गुरुग्राम के सेक्टर 56 के पुलिस थाना में मुकदमा भी दर्ज किया गया । इस पूरे प्रकरण पर अपनी प्रतिक्रिया देते हुए स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्री अनिल विज ने साफ साफ शब्दों में कहा कि हरियाणा की जनता की हेल्थ के साथ खिलवाड़ करने वाले बच नहीं सकेंगे।

वेतन 60 हज़ार, जांच पर 25 हज़ार प्रति माह
उन्होंने बताया कि इस छापामारी के दौरान खाद्य एवं औषधि प्रशासन विभाग के अधिकारियों में परविंदर मलिक, एसडीसीओ, गुरुग्राम और अमनदीप चौहान, डीसीओ ने काफी सनसनीखेज खुलासे किए हैं। गौरतलब है कि ब्लड सेंटर पर मेडिकल अधिकारी की पूर्णकालिक तैनाती होनी चाहिए और उसकी मौजूदगी में ही डोनर सिलेक्शन और ब्लड डोनर के शरीर से ब्लड लिया जाना चाहिए परंतु यहां पर दर्शाया गया मेडिकल ऑफिसर डॉ विपिन कथुरिया पालम विहार, गुरुग्राम स्थित विजया डायग्नोस्टिक सेंटर पर पैथोलॉजिस्ट के रूप में कार्य करता हुआ पाया गया। उन्होंने बताया कि रक्तदाता रजिस्टर स्क्रीनिंग फॉर्म्स पर फर्जी हस्ताक्षर होना या थोड़े समय के लिए ब्लड सेंटर पर आकर एक साथ औपचारिकता पूर्ण करने हेतु भी कार्य पाया गया। प्राप्त दस्तावेजों में मेडिकल ऑफिसर का वेतन 60 हज़ार रुपये प्रतिमाह दिखाया गया, जबकि बैंक खाता स्टेटमेंट की जांच पर 25 हज़ार रुपये प्रति माह वेतन के तौर पर भुगतान किया गया है।

एक रक्त भंडारण ऑथराइज नहीं
मंत्री विज ने बताया कि जांच के दौरान पता चला है कि उपरोक्त ब्लड सेंटर द्वारा पिछले 2 वर्षों में 176 आउटडोर ब्लड डोनेशन कैंप बिना अनुमति के आयोजित किए गए। जिनमें 6015 रक्त यूनिट्स एकत्रित किए गए। जिनकी कोई सूचना विभाग को नहीं दी गई और ना ही इन कैंपों में तकनीकी स्टाफ कानूनी योग्यता रखता था। उन्होंने बताया कि हरियाणा के निवासियों का ब्लड, रक्त शिविरों के माध्यम से दान में लेकर उत्तर प्रदेश के दूरदराज शहरों जैसे कि झांसी, कानपुर और पंजाब के शहरों में बेचना भी पाया गया है । जिसके एवज में 500 रुपये से लेकर 2000 तक रक्त और रक्त कॉम्पोनेंट्स के वसूले गए हैं। ऐसे ही, दिल्ली स्थित एक रक्त भंडारण केंद्र जिसको उपरोक्त दोषी ब्लड सेंटर देने हेतु ऑथराइज नहीं था, वहां पिछले 2 हफ्ते के दौरान 164 ब्लड कॉम्पोनेंट्स सप्लाई किए गए।

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ब्लड सेंटर को मौके पर ही सील कर दिया
यहां यह बताना आवश्यक है कि खून और रक्त कॉन्पोनेंट्स यदि सड़क के माध्यम से सैकड़ों किलोमीटर दूर ट्रांसपोर्ट शिफ्ट किए जाएं तो कोशिकाएं टूट जाती हैं यानी कि रक्त और कॉम्पोनेंट्स असरहीन हो जाते हैं। लाखों रुपए की लेनदेन अवैध तौर पर भी इस सेंटर पर पाया गया है जो कि पुलिस जांच में सामने आने की संभावना है। उन्होंने बताया कि ब्लड सेंटर को मौके पर ही सील कर दिया गया है और इस सारे खेल के पीछे इस ब्लड सेंटर की कार्यकारी निदेशक स्वाति पत्नी दृश्यटम का हाथ है और सेक्टर-56 पुलिस थाना, गुरुग्राम में एफआईआर दर्ज करवा दी गई है। मंत्री अनिल विज ने बताया कि हरियाणा सरकार ने नशे में दुरुपयोग होने वाली दवाइयों, अवैध रूप से एमटीपी किट बेचने वालों, नर्सिंग होम्स में अवैध दुकानों और अवैध कार्यों में लिप्त रक्त केंद्रों के खिलाफ अभियान चलाया हुआ है। उन्होंने बताया कि हरियाणा की जनता के स्वास्थ्य के साथ खिलवाड़ करने वालों को बख्शा नहीं जाएगा।

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