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ANIL VIJ-अनिल विज को मनोहर की चतुराई से ज्यादा उनका घमंड ले डूबा ,राजनीतिक करियर खतरे में ?

अनिल विज को मनोहर की चतुराई से ज्यादा उनका घमंड ले डूबा ,राजनीतिक करियर खतरे में ?

चंडीगढ़ /राजकुमार अग्रवाल
हरियाणा की राजनीति में खासकर हरियाणा बीजेपी के धुरंधर नेता अनिल विज का राजनीतिक अस्तित्व खतरे में दिखाई दे रहा है। जी हाँ हरियाणा की जनता जिन्हे गब्बर सिंह के नाम से बुलाती है वहीँ अनिल विज को उन्ही की पार्टी बीजेपी खुड्डे लाइन लगाने पर तुली है या यूँ कह लीजिये बीजेपी आका जिस तरह विपक्षियों पर शिकंजा कस रहे है उसी तरह अनिल विज पर बीजेपी के अनाम और बदनाम नेताओं का प्रकोप अनिल विज को ले बैठा क्योंकि 2014 के बाद हरियाणा की राजनीति का स्तर इस कदर गिर गया था की बीजेपी के नेताओं की भाषा गुंडे मवालियों में कोई फर्क नहीं रह गया था। कभी हरियाणा में सीधे सरल सभाव के नेता माने जाने वाले अनिल विज भी इस दौरान खुद को भूल कर अपने आकाओं की राह पर चल पड़े जिसके चलते अनिल विज का राजनितिक जीवन लगभग खत्म हो गया।

हरियाणा में बीजेपी का प्रमुख चेहरा माने जाने वाले अनिल विज  को अपनी ही पार्टी और पार्टी के नेताओ से बेइज्जती सहन करनी पड़ी बार बार अनिल विज को नीचा दिखाया गया यान बात अनिल विज अच्छी तरह समझते है की मनोहर लाल ने किस तरह उनके पर कुतरे थे और इस दौरान बार बार अनिल विज तड़पते रह जाते थे। अनिल विज के राजनितिक करियर के खात्मे की शरुआत तो मनोहर और पार्टी आलकमान ने उसी समय कर दी थी जब गृह मंत्री रहते उनके कुछ अधिकार मुख्यमंत्री मनोहर ने अपने पास रख कर बता दिया था की वो सिर्फ अब नाम के गब्बर है बीजेपी में उनका अपना कोई वजूद नहीं है।

अनिल विज नाराज भी हुए लेकिन बीजेपी हरियाणा और बीजेपी आलकमान ने अनिल विज को कोई अहमियत नहीं दी। अनिल विज की तड़प देख मनोहर लाल खुश हो जाते लेकिन  अनिल विज अपना घर संभालने की बजाये अंतराष्ट्रीय स्तर के नेताओं में शुमार होने का ख्बाब पाल बैठे। अनिल विज यह भूल गए थे की उनकी खुद की पहचान सिर्फ अम्बाला की जनता है ना की बीजेपी इस तरह अनिल विज अपने ही घमंड में चूर कभी अमेरिका ,कभी कनाडा ,कभी ,पाकिस्तान,कभी राहुल गाँधी ,कभी सोनिया गाँधी , कोसने लगे और उधर हरियाणा की राजनीति में उनके पांव तले जमीन खिसकती रही या यूँ कह लीजिये अनिल विज को मनोहर की चतुराई से ज्यादा उनका अपना बड़बोला पन ले डूबा शायद अनिल विज का को अहसास हो गया था की अब बीजेपी में उनका कोई वजूद नहीं रह गया इसलिए धोड़ा बहुत अंतराष्ट्रीय नेताओं को ही कोस कर अपना दिल हल्का कर लूँ।

: इन्ही सब हालातों में चलते या तो अनिल विज को खुद राजनीति से सन्यास लेना पड़ेगा वरना मनोहर लाल जैसे नेता और उनकी पार्टी बीजेपी का आलाकमान उन्हें इस कदर खुड्डे लाइन लगा देगा की अनिल विज को पता भी नहीं चलेगा की उनके साथ क्या हुआ। जी हाँ अब तो अनिल विज खुद कहने भी लग गए की कुछ लोगों ने उन्हें अपनी ही पार्टी में ‘पराया’ बना दिया है. अंबाला में एक सार्वजनिक रैली को संबोधित करते हुए भाजपा नेता ने बिना किसी का नाम लिए कहा, ‘माना.. कुछ लोगों ने मुझे मेरी ही पार्टी में बेगाना कर दिया है, पर कई बार बेगाने अपनों से भी ज्यादा काम करते हैं.’
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उन्होंने आगे लोगों से कहा, ‘अगर आप मानते हो कि मैंने कुछ काम किया है… अब काम करने की बारी आपकी है. टोलियां बनाकर घर-घर जाइए और जो काम किए हैं लोगों को बताइए. जो मनोहर लाल जी ने किया है वह भी बताइए.’
मालूम हो कि नवगठित मंत्रिमंडल में अनिल विज को हटा दिया गया था. लोकसभा चुनाव से कुछ हफ्ते पहले राज्य भाजपा प्रमुख नायब सिंह सैनी ने मनोहर लाल खट्टर की जगह मुख्यमंत्री का पद संभाला था. मुख्यमंत्री समेत आठ कैबिनेट सदस्य नए चेहरे थे. 19 मार्च को शामिल किए गए आठ मंत्रियों में से सात दो बार के विधायक हैं.हालांकि, राज्य के पूर्व गृह मंत्री को नई कैबिनेट में जगह नहीं मिल पाई.
अनिल विज, जो हरियाणा के गृह मंत्री थे, के लिए यह और भी अधिक चौंकाने वाला था क्योंकि ऐसी अटकलें थीं कि वह जननायक जनता पार्टी के दुष्यंत चौटाला द्वारा पद खाली किए जाने के बाद भाजपा द्वारा नियुक्त दो उपमुख्यमंत्रियों में से एक होंगे.जिस बैठक में भाजपा ने सैनी को अपना नया नेता चुना, अनिल विज भाजपा विधायक दल की उस बैठक के बीच में ही चले गए थे और बाद में उनके शपथ ग्रहण समारोह में भी शामिल नहीं हुए.उल्लेखनीय है कि जब 2014 में भाजपा ने पहली बार 90 सदस्यीय हरियाणा विधानसभा में बहुमत हासिल किया, तो अनिल विज को मुख्यमंत्री पद के दौड़ में सबसे आगे माना गया था. लेकिन, पार्टी ने इस पद के लिए पहली बार विधायक बने मनोहर लाल खट्टर को चुना.वर्ष 2019 के चुनावों में भी खट्टर ने फिर से विज को दौड़ में हरा दिया था, बाद में उन्हें गृह और स्वास्थ्य विभाग दिए गए.
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