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सिविल सेवा परीक्षा में सफलता के सूत्र

सिविल सेवा परीक्षा में सफलता के सूत्र
Formula of success in civil service exam
Formula of success in civil service exam
===सक्सेस गुरु ए. के. मिश्रा===
देश की प्रशासनिक नौकरियों को कौन नहीं हासिल करना चाहता. लेकिन सबकी ये ख्वाहिश पूरी नहीं हो पाती है, क्योंकि अधिकांश लोग उसके लिए अपने आप को मानसिक रूप से तैयार नहीं कर पाते अत: तैयारी छोड़ देते हैं. ऐस में वे हारे बिना ही हार जाते हैं. दरअसल प्रारंभिक परीक्षा में प्रदर्शन तथा मुख्य परीक्षा की तैयारी के आधार पर अभ्यर्थियों को तीन श्रेणियों में बांटा जा सकता है.
1. वे अभ्यर्थी जो प्रांरभिक परीक्षा उत्तीर्ण कर लेने के प्रति काफी आश्वस्त होंगे और उन्होंने मुख्य परीक्षा के काफी हिस्से की तैयारी कर रखी होगी.
2. वे अभ्यर्थी जो प्रारंभिक परीक्षा उत्तीर्ण कर लेने के प्रति आश्वस्त होंगे, लेकिन मुख्य परीक्षा की पूर्व तैयारी नहीं की होगी. किंतु प्रारंभिक परीक्षा देने के बाद मुख्य परीक्षा की तैयारी में लग गए होंगे.
वे अभ्यर्थी जो प्रारंभिक परीक्षा उत्तीर्ण कर लेने के प्रति आश्वस्त नहीं होंगे,
इसलिए वे परिणाम को देख लेने के बाद ही मुख्य परीक्षा की तैयारी प्रारंभ करना चाहते होंगे. कहना न होगा कि पहली श्रेणी के अभ्यर्थियों की स्थिति अपेक्षाकृत बेहतर होगी. दूसरी श्रेणी के अभ्यर्थी मुख्य परीक्षा की तैयारी की दृष्टि से बहुत अच्छी स्थिति में नहीं होंगे,
लेकिन परिणाम की प्रतीक्षा किए बिना मुख्य परीक्षा की तैयारी शुरू कर देने की वजह से ऐसी आशा की जा सकता है कि वे अंत तक अच्छी स्थिति में आ जाएंगे. जहां तक तीसरी श्रेणी के अभ्यर्थियों का प्रश्र है, उनकी स्थिति अच्छी नहीं कही जा सकती.
ऐसे अभ्यर्थियों के लिए कहा जा सकता है कि अभी भी देर नहीं हुई है, शुरूआत करें और तैयारी के लिए जी-जान से आगे बढ़ें. आपकी प्रारंभिक परीक्षा बेहतर हुई है या नहीं, आप इसमें सफल होंगे या नहीं, आपने पहले से मुख्य परीक्षा की तैयारी कर रखी है या नहीं.
इन सभी मामलों में मुख्य परीक्षा की तैयारी तुरंत प्रारंभ कर देनी चाहिए, क्योंकि आप को खोना कुछ नहीं, बस पाना ही पाना है. एक मिनट भी परिणाम की प्रतीक्षा या उसके बारे में चितिंत होने में बर्बाद न करें. इस समस्या का सर्वोत्तम समाधान है-‘चिंतित होना बंद करें और काम करना शुरू करें’.Formula of success in civil service exam
प्रारंभिक परीक्षा और मुख्य परीक्षा के बीच का अंतराल काफी महत्वपूर्ण होता है. इस अंतराल में अभ्यर्थी कई मन:स्थितियों से गुजरते हैं. कभी वे परिणाम को लेकर चिंतित होते हैं, तो कभी वे ‘क्या करें, क्या न करें’ के ऊहापोह में लगे रहते हैं.
लेकिन स्वयं पर नियंत्रण रखते हुए इन स्थितियों को अपना बनाना होगा. कहा गया है, ‘दो निरंतर युद्धों के बीच की तैयारी अवधि विजयश्री को सुनिश्चत करने में प्राय:सर्वाधिक महत्वपूर्ण कारक होती है’. जो अपने हौसले को उच्च स्तर पर बनाए रखता है तथा सकारात्मक मन:स्थिति को संपोषित करने में सक्षम होता है. वही विजेता बनकर उभरता है.
कोई भी युद्ध तभी जीता जा सकता है, जब उसके लिए पहले ही एक फुलप्रूफ योजना बनाई जाए और उस योजना के तहत तैयारी की जाए. बिना योजना बनाए युद्ध लडऩा पराजय को ही आमंत्रित करना होता है, क्योंकि ऐसी स्थिति में हर योद्धा दिशाहीन लड़ाई लड़ेगा,
आक्रमण जिधर करना चाहिए उधर नहीं होगा, अंधेरे में तीर चलेंगे, परिणाम तो शून्य होगा ही. सिविल सेवा परीक्षा का युद्ध तीन स्तरों ‘प्रारंभिक, मुख्य और साक्षात्कार’ पर लड़ा जाता है, जिनमें से मुख्य परीक्षा काफी अहम है.
ऐसा इस लिए कि इसमें प्राप्त होने वाले अंक ही आप को इस सेवा में जाने की गारंटी देते हैं. अत: युद्ध के इस स्तर को लडऩे के लिए पूर्व तैयारी करना आवश्यक है. लेकिन मुख्य परीक्षा की तैयारी प्रारंभ करने के पूर्व यह जानलेना आवश्यक है कि इस परीक्षा की प्रकृति कैसी है और आयोग इस परीक्षा के माध्यम से अभ्यर्थियों में किन गुणों की खोज करना चाहता है?
साथ ही, यह भी जानना जरूरी है कि मुख्य परीक्षा प्रारंभिक परीक्षा से कैसे भिन्न है? ताकि स्पष्ट रूप से ज्ञात हो सके कि मुख्य परीक्षा में करना क्या है.
मुख्य परीक्षा परिमाणात्मक एवं गुणात्मक रूप से प्रारंभिक परीक्षा से भिन्न होती है. मुख्य परीक्षा में सही विकल्प का चुनाव करने और उसे ओएमआर पत्रक में चिह्नित करने के बजाए शब्द सीमा एवं समय सीमा का ध्यान रखते हुए विस्तृत व व्यापक अध्ययन के विपरीत मुख्य परीक्षा के लिए चयनात्मक, गहन एवं विशषणात्मक अध्ययन की जरूरत होती है.
संघ लोक सेवा आयोग आप से यह अपेक्षा नहीं करता कि आपका ज्ञान सही या किताबी हो, इसके बजाए वह आशा करता है कि आपने विशेष का गहन विश£षण किया होगा तथा उसके बारे में अपने विचार विकसित किए होंगे.
जहां प्रारंभिक परीक्षा बहुत सारे तथ्यों, चित्रों और सूचनाओं को स्मरण रखने की अपेक्षा करती है, वहीं इनके अलावा मुख्य परीक्षा अभ्यर्थी से पढ़ी गई सामग्री को सुव्यवस्थित करने, उसका विश्लेषण करने तथा अभ्यर्थी को अपनी विचारधारा को विकसित करने की अपेक्षा रखती है.
इससे तैयारी में एक गुणात्मक अंतर पैदा हो जाता है. अत:उम्मीदवार को मुख्य परीक्षा की तैयारी पूर्णत: नए तथा नियोजित एवं वैज्ञानिक तरीके से करनी चाहिए, जो पूर्ण रूप से परीक्षा की मांग के अनुरूप हो.
जहां प्रारंभिक परीक्षा एक छंटनी परीक्षा है और वह नेगेटिव मार्किंग के साथ बहुविकल्पीय वस्तुनिष्ठ प्रश्रों पर आधारित होती है.Formula of success in civil service exam
वहीं मुख्य परीक्षा में वर्णानात्मक प्रकार के प्रश्र होते हैं जिनके उत्तर अभ्यर्थियों को भिन्न-भिन्न लंबाई में लिखने होते हैं. उधर साक्षात्कार अपने आप में एक अलग ही चरण है. किंतु, इन अंतरों के बावजूद इस परीक्षा के विभिन्न चरण परस्पर अनन्य एवं स्वतंत्र भी नहीं हैं.
वास्तव में, वे अंतनिर्भर एवं अंतर्संबंधित होते हैं. एक साथ मिलकर वे अभ्यर्थी की प्रशासनिक क्षमताओं तथा सिविल सेवाओं के लिए व्यक्तिगत उपयुक्तता का निष्पक्ष मूल्यांकन करते हैं.
इस परीक्षा की आवश्यकताओं को पूरा करने के लिए अभ्यर्थी को पहले उसकी प्रकृति को समझना होगा और फिर इस परीक्षा के प्रत्येक चरण के लिए सोच एवं सम्प्रेषण में मौलिकता विकसित कर स्वयं को पुर्ननुकूलित करना होगा.

 

सिविल सेवा के अभ्यर्थियों के लिए प्रारंभिक परीक्षा और उसका परिणाम घोषित होने के बीच की अवधि सन्नाटे एवं शांति तथा संभ्रम एवं चिंता की अवधि होती है. इस लंबे समयांतराल का उद्देश्य अभ्यर्थी की सहनशीलता और धैर्य का परीक्षण करना होता है.
यदि अभ्यर्थी इस दौरान तनाव और चिंता को मात देकर शांति से अपने अध्ययन पर ध्यान केंद्रित कर लेता है, तो उसकी सफलता की संभावनाएं बढ़ जाती हं. तैयारी के दौरान अपने ऊपर किसी दबाव या तनाव को हावी न होने दें. ये सिर्फ आप की तैयारी को क्षति पहुंचाएंगे.Formula of success in civil service exam
इसके बजाए पर्याप्त आराम करें, पोषक भोजन लें तथा हल्का व्यायाम एवं मेडिटेशन करें. ये गतिविधियां यह सुनिश्चत करेंगी कि आप न केवल शारीरिक रूप से, बल्कि मानसिक रूप से भी स्वस्थ रहें. जिस प्रकार कोई युद्ध में उतरने के पूर्व तैयारी की जरूरत होती है
और उसके लिए योजना बनानी होती है, वैसे ही मुख्य परीक्षा के युद्ध में उतरने के पूर्व तैयारी और उसके लिए योजना बनाने की आवश्यकता होगी. लेखक: सक्सेस गुरु ए. के. मिश्रा चाणक्य आई ए एस एकेडमी के निदेशक हैं.
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