वृंदावन /11 अप्रेल /अटल हिन्द ब्यूरो
वृंदावन के केशी घाट पर हुए दर्दनाक यमुना हादसे में चश्मदीद नाविकों ने चौंकाने वाले खुलासे किए हैं. प्रशासनिक दावों के विपरीत, स्थानीय मल्लाहों का कहना है कि हादसा किसी तूफान से नहीं, बल्कि यमुना में रेत निकालने वाली मशीन से टकराने के कारण हुआ. स्टीमर पर लाइफ जैकेट की कमी और सुरक्षा मानकों की अनदेखी ने पंजाब से आए श्रद्धालुओं की जान जोखिम में डाल दी.

इस त्रासदी में पंजाब के एक ही परिवार के 7 लोगों की जान चली गई, जिनमें मां-बेटे, चाचा-चाची और बुआ-फूफा शामिल हैं सात लोगों की मौत हुई है, उनमें कविता बहल, चरणजीत, पिंकी पत्नी चरणजीत, मधुर बहल पुत्र विजय कुमार, इशांत कटारिया, सपना, हसन, शामिल हैं, यह परिवार गीता कॉलोनी, जगराओं, लुधियाना का रहने वाला था. ऐसे ही राकेश गुलाटी, निवासी फेस टू दुगरी लुधियाना, आशा मिड्ढा निवासी भिवानी, मीनू बंसल निवासी फेस 2 दुगरी लुधियाना की भी इस हादसे में मौत हो गई है. . शनिवार सुबह जब देवरहा बाबा घाट के पास से एक युवक का शव मिला, तो उसके बुजुर्ग पिता की चीखों ने वहां मौजूद हर शख्स की आंखें नम कर दीं. अब तक 22 लोगों को सुरक्षित निकाला जा चुका है, जबकि 4 लोग अभी भी लापता बताए जा रहे हैं.
भिवानी की आशा मिड्ढा (55) भी शामिल
मथुरा के वृंदावन में यमुना नदी में नाव पलटने से 10 श्रद्धालुओं की मौत हो गई. इनमें भिवानी की आशा मिड्ढा (55) भी शामिल हैं. वो लुधियाना में रह रहे अपने मायके वालों के साथ वृंदावन गई थीं. आशा अपने परिवार के साथ भिवानी की जगत कॉलोनी में रहती थीं. वो तीन बच्चों की मां थी. घटना की सूचना मिलने के बाद उनके दोनों बेटे वृंदावन गए हुए हैं.
मायके वालों के साथ वृंदावन गई थी आशा: आशा के नंदोई राधेश्याम ने बताया कि “आशा पिछले साल भी वृंदावन दर्शन करने के लिए गई थी. इस साल उसका लुधियाना से अपने मायके वालों के साथ प्लान बना हुआ था. 9 अप्रैल को उसका एक बेटा उसे सोनीपत छोड़ आया. वहां वो अपनी बेटी के घर रुकी. रात को मुरथल में लुधियाना से बस आनी थी. आशा की बेटी और दामाद उसे छोड़ने मुरथल गए. जिसके बाद सभी वृंदावन चले गए.

नाविक रूप सिंह ने बताया, ‘स्टीमर का इंजन यमुना की रेती में फंस जाने के कारण बंद हो गया था. जैसे ही पानी का तेज बहाव आया, स्टीमर पीपा पुल के साइड से टकराकर पलट गया. हमने करीब एक दर्जन लोगों को तो सुरक्षित निकाल लिया, लेकिन कुछ लोग तेज बहाव में बह गए.’ रूप सिंह ने एक और बड़ा खुलासा करते हुए बताया कि हादसे के बाद प्रशासन को सूचना देने में भी देरी हुई.
कैसे हुआ हृदय विदारक हादसा?
शुक्रवार दोपहर करीब 3:00 बजे, पंजाब से आए श्रद्धालुओं का एक समूह श्रृंगार घाट से नाव में सवार होकर देवरहा बाबा आश्रम के लिए निकला था. नाव में कुल 37 लोग सवार थे. चश्मदीदों के मुताबिक, नाव की रफ्तार तेज थी और लोग भजन-कीर्तन कर रहे थे. जैसे ही नाव वंशीवट और केसी घाट के बीच पहुंची, वहां यमुना में लगे पांटून (पीपा) पुल की मरम्मत का काम चल रहा था. एक जेसीबी मशीन रस्से के सहारे पुल के एक हिस्से को खींच रही थी.
खतरा भांपते हुए यात्रियों ने नाविक पप्पू उर्फ दाऊजी से नाव रोकने या वापस मोड़ने की गुहार लगाई, लेकिन नाविक ने उनकी एक न सुनी. अचानक नाव पुल के लोहे के हिस्से से टकराई और देखते ही देखते 25 फीट गहरे पानी में समा गई. पल भर में खुशियों भरा माहौल चीखों में तब्दील हो गया.

ग्राउंड जीरो पर मिली जानकारी के मुताबिक, इतने बड़े स्तर पर स्टीमर का संचालन होने के बावजूद श्रद्धालुओं को सुरक्षा के कोई उपकरण नहीं दिए गए थे. नाविकों का कहना है कि स्टीमर पर एक भी लाइफ जैकेट मौजूद नहीं थी. अगर यात्रियों के पास लाइफ जैकेट होती, तो शायद मृतकों का आंकड़ा कम हो सकता था. फिलहाल, यमुना के घाटों पर दहशत का माहौल है और पीड़ित परिवारों में प्रशासन के खिलाफ भारी आक्रोश देखा जा रहा है. सवाल अब भी वही है कि आखिर यमुना में चल रही इन अवैध मशीनों और सुरक्षा मानकों की अनदेखी का जिम्मेदार कौन है?


