संसद में महिलाओं से डरने वाले मोदी? का राष्ट्र के नाम संबोधन पर विवाद, विपक्ष पर ‘भ्रूण हत्या’ जैसा आरोप
आदर्श आचार संहिता का उल्लंघन?
नई दिल्ली/19 अप्रैल /अटल हिन्द ब्यूरो
बीजेपी के प्रधानमंत्री ने एक सम्बोधन किया किसके लिए यह उन्होंने नहीं बताया पर महिला बिल को लेकर भारत की जनता को पापी बता दिया लेकिन बीजेपी के इस बक बक करने वाले नेता ने अपने सम्बोधन में यह नहीं बोला की महिलाओ से मुझे बहुत डर लगता है महिलाओं के डर से वे सबसे तगड़ी सुरक्षा में रहते है इसके बावजूद कांग्रेस की कुछ महिला सांसदों के डर से वे संसद नहीं जा पा रहे उन्हें इन महिलाओं सांसदों से जान का खतरा है ?इस बात को बताने के लिए उन्होंने लोकसभा स्पीकर को अपना प्रवक्ता नियुक्त किया हुआ है वे मुझे कुछ भी बक बक करने से नहीं रोकते अपितु विपक्ष को बोलने तक नहीं देते ऐसा वफादार पालतू आज तक किसी भी पूर्व सरकार को लोकसभा स्पीकर नहीं मिला।
आज यही बीजेपी का प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी महिलाओं की बात कर रहा है और आँख में आंसू ला कर सहानुभूति बटोरने का नाकाम प्रयास कर रहा है लेकिन बीजेपी वाले और वफादार स्पीकर शायद यह भूल गए की यह सिर्फ महिला आरक्षण बिल नहीं गिरा बल्कि बीते 12 वर्षों में पहली बार भारत की जनता की जीत हुई है।
लोकसभा में संविधान (131 वां संशोधन) विधेयक 2026 के गिरने के एक दिन बाद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने शनिवार शाम राष्ट्र के नाम संबोधन दिया। इस संबोधन में उन्होंने विपक्षी दलों पर महिला आरक्षण को रोकने का आरोप लगाते हुए तीखा हमला बोला। विपक्ष ने इसे आदर्श आचार संहिता का उल्लंघन करार दिया और कहा कि पीएम ने सरकारी मंच का दुरुपयोग कर चुनावी भाषण दिया।विधेयक शुक्रवार (17 अप्रैल) को लोकसभा में दो-तिहाई बहुमत न मिलने के कारण गिर गया।
इस बिल के साथ परिसीमन विधेयक भी लंबित था, जिसे सरकार ने महिला आरक्षण लागू करने से जोड़ा था।प्रधानमंत्री मोदी ने अपने लगभग 30 मिनट के संबोधन में कहा, “देश की करोड़ों महिलाओं की नजर संसद पर थी। मुझे भी दुख हुआ कि नारी शक्ति का यह प्रस्ताव गिरा तो कांग्रेस, सपा, टीएमसी, डीएमके जैसी परिवारवादी पार्टियां खुशियां मना रही थीं। ऐसे लोगों को इस देश की महिलाएं कभी माफ नहीं करेंगी।”उन्होंने आगे कहा, “हमारे भरसक प्रयासों के बावजूद हम सफल नहीं हो पाए। नारी शक्ति वंदन अधिनियम में संशोधन नहीं हो पाया। मैं सभी माताओं, बहनों से माफी चाहता हूं। जब कुछ लोगों के लिए दलहित सब कुछ हो जाता है, दलहित देश हित से बड़ा हो जाता है तो नारी शक्ति को इसका खामियाजा उठाना पड़ता है।”


