
अटल हिन्द /विष्णु नागर
अब विश्व गुरु जी की एक पुरानी भक्तन जी ने भारतीय एपस्टीन फाइल खोल दी है। एक अमेरिकी फाइल अभी आधी खुली और आधी बंद पड़ी है। किसी दिन वाशिंगटन प्रभु ने चाहा तो वह पूरी की पूरी फाइल, पन्ने दर पन्ने, विडियो दर विडियो खुल जाएगी। एक फाइल जब वे जब गुजरात में हुआ करते थे, तब से अब तक चौपट खुली पड़ी है। उसका एक-एक पन्ना खुला हुआ है।उसे देख-देखकर लोग ऊब चुके हैं!
और भी फाइलें होंगी उनकी, जो समय-समय पर खुलती रहेंगी। कुछ फाइलों की चर्चा कानों-कान होती रहती है!हर मुंह में उनकी एक रंग-बिरंगी फाइल रखी हुई है, जो किसी न किसी के कान में खुलती रहती हैं! सारी फाइलें धमाकेदार हैं!
भाइयो-बहनो, इनकी किसिम-किसिम की फाइलें हैं और ढूंढने चलोगे, तो उनकी ऐसी फाइलों का इतना बड़ा अंबार लग जाएगा कि देखते-देखते आंखें थक जाएंगी। न जाने कितनी फाइलें कहां-कहां धूल खा रही होंगी। कुछ फाइलें ऐसी भी होंगी, जो आग में स्वाहा की जा चुकी होंगी। फिर भी बहुत सी फाइलें अभी होंगी। मूल नहीं, तो उनकी फोटो कॉपी होगी। वीडियो में नहीं, तो वे फ़ाइलें फोटो में होंगी। बहुत से चतुर सुजान आए और गए, मगर उनकी फ़ाइलें आज भी अटल-अविचल हैं।
फाइल-फाइल का खेल अगर विश्व गुरु जी खेलना जानते हैं, तो दूसरे भी कम होशियार नहीं हैं। ऐसा भी नहीं कि सब कुछ इन्हें ही आता है। ठीक है, कुछ ने फाइल-फाइल खेलना इनसे भी सीखा होगा। हवा में ही इनके कंप्रोमाइज होने की कहानी नहीं चल रही है। यूं ही ट्रंप नहीं कहता कि मैं चाहूं, तो इनका करियर बर्बाद कर सकता हूं और ये प्रतिवाद में एक शब्द तक नहीं बोलते! कंप्रोमाइज नेता एक ऐसी शै होती है, जिसका फायदा वाशिंगटन से लेकर पेरिस तक और दिल्ली से लेकर मुंबई-अहमदाबाद तक सब बड़े-बड़े खिलाड़ी मजे से उठा सकते हैं। ऐसा विश्वगुरु भी हो, तो इनके लिए बहुत फायदेमंद है। जिसके पास भी आज इन गुरुजी की चाबी है, वे सुखी और निश्चिंत हैं। जब चाहे, जैसी चाहे, उसे घुमा दें, यहां तक कि उल्टी भी घुमा दें, तो ताला खुल जाएगा!
भाइयो-बहनो, सब जानते हैं कि यह भारत है और यहां फाइलें खुलने से अब कोई क्रांति नहीं होती, सत्ता परिवर्तन नहीं होता, वरना पिछले बारह साल में अनेक क्रांतियां हो चुकी होतीं! एक कोने में इनका विश्व होता और दूसरे में गुरुजी कहीं अंधेरे में पड़े मिलते!
विडियो जारी होने से भी अब कोई खास अंतर नहीं पड़ता। यहां रोज ही वीडियो जारी होते रहते हैं। लोग आनंद लेते हैं। थोड़ी सी सुगबुगाहट होती है और सब पहले की तरह सामान्य हो जाता है! न कहीं आंधी आती है, न तूफान! कोई पेड़ तक नहीं गिरता। पत्ते तक नीचे नहीं गिरते! बलात्कारियों और हत्यारों का यहां कुछ नहीं होता, इतनी सावधानी जरूरी है कि वे सही समय पर सही साइड में हों और वे होते हैं! विश्वगुरु की तरफ़ होते हैं, तो यह उनकी योग्यता में शामिल हो जाता है। विधायक-सांसद से लेकर मंत्री बनने तक के अवसर बढ़ जाते हैं।
जब से ये चाल, चरित्र और चेहरे वाले आए हैं, तब से तो इतना पक्का प्रबंध है कि कोई इनकी चाल देखता रह जाता है। इनका चरित्र और चेहरा नहीं देख पाता!

आप-हम अच्छी तरह जानते हैं कि जिन्हें हम अपना विधायक-सांसद आदि चुन रहे हैं, वे आगे कई-कई तरह के गुल खिलाएंगे। हमें कोई भ्रम नहीं होता कि हम इन्हें जनसेवा करने के लिए चुन रहे हैं। ये इस बीच इतना कमाएंगे कि कोई तस्कर भी इतना कमा नहीं सकता! हम जानते हैं कि ये पहले भी काफी गुल खिला चुके थे, इसलिए आज चुनाव मैदान में हैं और आगे ये गुलों का पूरा बगीचा खड़ा कर देंगे। कुछ तो इतने होशियार निकलेंगे कि गुलों का पूरा वन खड़ा कर देंगे और उसकी सुगंध में इतने गुम हो जाएंगे कि अगले चुनाव से पहले नजर नहीं आएंगे और फिर भी हम इन्हें चुनेंगे, क्योंकि हमारा उद्देश्य या तो मुल्लों को सेट करना है या हमें हमारी जाति का झंडा बुलंद रखना है और इनका एकमात्र उद्देश्य कमाई करना है। एक मंत्री जी पूरी तरह देश सेवा में लगे रहते हैं,सांस लेने तक की उन्हें फुरसत नहीं, मगर उनकी संपत्ति 2012 में लगभग 12 करोड़ थी, जो देश सेवा करते-करते बारह साल बाद 65 करोड़ से ज्यादा हो गई, मतलब पांच गुना से भी अधिक हो गई और उनके बेटे की संपत्ति आज 100 से 150 करोड़ के बीच बताई जाती है! अर्थ यह कि देशसेवा भी बेहद मुनाफे का धंधा है!
एडीआर की रिपोर्ट बताती है कि हमारे लगभग आधे सांसद हत्या, बलात्कार, अपहरण जैसे मामलों में फंसे हैं। और वे ऐसे मामलों में फंसे थे, इसलिए उन्हें टिकट मिला है और हमने उन्हें चुना है। इसलिए कोई भ्रम में न रहे कि फाइलें खोलकर विश्व गुरु जी का कोई कुछ बिगड़ सकता है। जितनी फाइलें खोलना हो, खोल लो। जितनी तरह की फाइलें खोलना हो, खोल दो। एपस्टीन फाइल खोल लो या कोई और धांसू टाइप फाइल खोल लो!उनकी चाल, चरित्र और चेहरा साबुत रहेगा! तुम्हारे पास फाइल है, उनके पास पूरा तंत्र और मंत्र है।
हां, जब भी उनका बिगड़ेगा तो फिर इतना बिगड़ेगा, इतना बिगड़ेगा कि जय श्रीराम भी सुधार नहीं पाएंगे। पर अभी उन पर बड़ी पूंजी का साया है। इतना सस्ता, इतना भीरू, इतना एपस्टीन उन्हें आज कोई और उपलब्ध नहीं है। जिस दिन वह मिल गया, इनकी छुट्टी करने में वे देरी नहीं करेंगे! इनके नान बायोलॉजिकल और अवतारी पुरुष होने की हवा निकल जाएगी!
(कई पुरस्कारों से सम्मानित विष्णु नागर साहित्यकार और स्वतंत्र पत्रकार हैं। जनवादी लेखक संघ के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष हैं।)


