बीजेपी ने गरीब, मजदूर के वोट लेकर केंद्र और प्रदेश में सरकार बनाई, अब मनरेगा को खत्म करने की साजिश रच उन्हीं को दे रही है धोखा: रामपाल माजरा
पहले मनरेगा के लिए 90 प्रतिशत धनराशि केंद्र सरकार और 10 प्रतिशत धनराशि राज्य सरकार देती थी, अब केंद्र सरकार 60 प्रतिशत और राज्य सरकार 40 प्रतिशत धनराशि देगी
राज्य सरकार पहले से ही 4.5 लाख करोड़ के कर्ज में डूबी हुई है, ऐसे में 40 प्रतिशत हिस्सा देना बहुत बड़ी चुनौती है, अगर राज्य सरकार 40 प्रतिशत हिस्सा नहीं दे पाएगी तो केंद्र सरकार अपना 60 प्रतिशत हिस्सा नहीं देगी तो गरीबों को काम नहीं मिलेगा और मनरेगा योजना पूरी तरह से खत्म कर दी जाएगी
चंडीगढ़/13 जनवरी/राजकुमार अग्रवाल /अटल हिन्द ब्यूरो
इंडियन नेशनल लोकदल(Indian National Lok Dal – INLD) के प्रदेशाध्यक्ष रामपाल माजरा ने केंद्र सरकार द्वारा मनरेगा का नाम बदल कर वीबीजीरामजी करने पर बीजेपी सरकार को घेरते हुए कहा कि यह मनरेगा योजना को पूरी तरह से खत्म करने की बीजेपी की एक बड़ी साजिश है। यह योजना 1977 में चौधरी देवीलाल ने काम के बदले अनाज के रूप में शुरू की थी। उसके बाद कांग्रेस ने इसका नाम बदल कर नरेगा और फिर मनरेगा कर दिया था। अब बीजेपी ने फिर से इसका नाम बदल दिया है।
रामपाल माजरा ने कहा कि बीजेपी ने गरीब, मजदूर के वोट लेकर केंद्र और प्रदेश में सरकार बनाई है और अब उन्हीं को धोखा दे रही है। केंद्र सरकार ने सिर्फ नाम ही नही बदला है बल्कि कई नई शर्तें भी लगा दी हैं। पहले मनरेगा के तहत जो काम दिया जाता था उसके लिए 90 प्रतिशत धनराशि केंद्र सरकार और 10 प्रतिशत धनराशि राज्य सरकार देती थी। लेकिन अब केंद्र सरकार को 60 प्रतिशत और राज्य सरकार को 40 प्रतिशत धनराशि देनी होगी। राज्य सरकार पहले से ही 4.5 लाख करोड़ के कर्ज में डूबी हुई है और तनख्वाह देने के लिए भी कर्ज लेना पड़ता है। ऐसे में 40 प्रतिशत हिस्सा देना बहुत बड़ी चुनौती है। अगर राज्य सरकार 40 प्रतिशत हिस्सा नहीं दे पाएगी तो केंद्र सरकार अपना 60 प्रतिशत हिस्सा नहीं देगी तो गरीबों को काम नहीं मिलेगा।
केंद्र सरकार ने अब 100 की बजाय 125 दिनों का रोजगार देने की बात कही है। अगर 125 दिन में से कुछ दिनों का रोजगार नहीं मिलेगा तो उन दिनों का पूरा भत्ता राज्य सरकार को देना होगा। राज्य सरकार के पास 40 प्रतिशत हिस्सा देने को ही नहीं है तो भत्ता कैसे देगी?। पहले मनरेगा कार्य की मंजूरी के लिए ग्राम पंचायत को 10 प्रतिशत कोरम पूरा करना होता था लेकिन अब यह जिम्मा ग्राम सभा को दे दिया गया है और उसके लिए 40 प्रतिशत कोरम पूरा करना जरूरी कर दिया गया है जो लगभग असंभव है। ऐसे में मनरेगा के कार्य को मंजूरी ही नहीं मिलेगी। अगर यह काम ग्राम सभा करेगी तो चुनी हुई ग्राम पंचायत क्या करेगी?। मतलब साफ है कि ग्राम पंचायत की शक्तियां भी कम की जा रही हैं। ये 40 प्रतिशत का वित्तीय भार राज्यों पर डाला जा रहा है यह सरासर गलत है क्योंकि राज्य यह वित्तीय भार सहन नहीं कर पाएंगे जिसके कारण यह योजना पूरी तरह से खत्म कर दी जाएगी।
उन्होंने कहा कि मुख्य विपक्षी दल कांग्रेस जो संविधान बचाओ, मनरेगा बचाओ और वोट चोरी की बात करते हैं वो हकीकत में इन मुद्दों पर गंभीर नहीं है। इसका उदाहरण सभी के सामने है जब कांग्रेस ने मनरेगा की खिलाफत करने के लिए जिला स्तरीय प्रदर्शन किए थे उसके लिए कांग्रेस किसी भी जिले में 20 लोग भी इक्_ा नहीं कर पाई थी। रामपाल माजरा ने कहा कि बीजेपी और कांग्रेस दोनों पार्टियों की नियत में खोट है जिसका पर्दाफाश इनेलो 15 जनवरी से सभी जिलों में शुरू होने वाले युवा सम्मेलनों में करेगी।
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