मां काली शिव शनि मंदिर में सप्तम दिवसीय त्रिकुंडी महायज्ञ के तृतीय दिवस पर उमड़ा श्रद्धा का सैलाब
नरवाना, 19 मार्च(नरेन्द्र जेठी)
धरोदी रोड स्थित मां काली शिव शनि मंदिर के पावन प्रांगण में आयोजित सप्तम दिवसीय त्रिकुंडी महायज्ञ श्रद्धा और भक्ति के चरमोत्कर्ष पर है। आयोजन के तृतीय दिवस और चैत्र नवरात्रि के पावन शुभारंभ के शुभ अवसर पर मंदिर परिसर माता के जयकारों से गुंजायमान रहा। इस विशेष अवसर पर क्षेत्र के गणमान्य व्यक्तियों ने मुख्य यजमान के रूप में शिरकत कर लोक कल्याण की कामना के साथ यज्ञ में आहुतियां डालीं।
नव संवत्सर और तृतीय दिवस की विशेष पूजा
नवरात्रि के प्रथम दिन और महायज्ञ के तीसरे दिन की शुरुआत ब्रह्म मुहूर्त में विधिवत पूजन के साथ हुई। मुख्य यजमान के रूप में श्री प्रवीण मित्तल , श्री पातीराम , श्री सुभाष जैन , श्री आनंद गोयल (गुवाहाटी) और श्री धर्मपाल (चंडीगढ़) ने सपरिवार उपस्थित होकर यज्ञ की वेदी पर शीश नवाया। यजमानों ने माँ दुर्गा के नौ रूपों का आह्वान करते हुए मंगल पूजन संपन्न किया और विश्व शांति व समृद्धि की प्रार्थना की।
दुर्गा सप्तशती के मंत्रों से सिद्ध हुआ वातावरण
महायज्ञ का संचालन कर रहे पुजारी रोशन लाल ने वैदिक विधि-विधान और शास्त्रोक्त मर्यादा के साथ पूजन प्रक्रिया को पूर्ण करवाया। वेद पाठी विद्वानों द्वारा दुर्गा सप्तशती के सिद्ध मंत्रों के उच्चारण से पूरा वातावरण भक्तिमय और ऊर्जावान हो गया। दुर्गा सप्तशती के प्रत्येक अध्याय के पूर्ण होने पर यजमानों और उपस्थित भक्तों ने विशेष आहुतियां प्रदान कीं। पुजारी जी ने बताया कि नवरात्रि के प्रारंभ में त्रिकुंडी महायज्ञ का संयोग अत्यंत दुर्लभ और फलदायी है, जो साधक के जीवन के समस्त कष्टों का निवारण करता है।
न्यू शिव कावड़ सेवा समिति का विशेष सहयोग
इस भव्य धार्मिक अनुष्ठान के सफल संचालन में न्यू शिव कावड़ सेवा समिति के पदाधिकारियों और सदस्यों का सराहनीय योगदान रहा। समिति के प्रधान श्री तरसेम मोर के नेतृत्व में सेवादारों ने व्यवस्थाओं को सुचारू रूप से संभाला। इस दौरान गंगा सिंह मोर, नना मोर, बलिंदर मोर, ताशी मोर, और काला मोर सहित समिति के अन्य प्रमुख सदस्यों ने यज्ञ में सम्मिलित होकर माता का आशीर्वाद प्राप्त किया।
भक्तों ने ली आहुति, पाया आशीर्वाद महायज्ञ के तीसरे दिन नरवाना और आसपास के क्षेत्रों से सैकड़ों की संख्या में श्रद्धालुओं ने मंदिर में माथा टेका। श्रद्धालुओं ने कतारबद्ध होकर यज्ञ कुंड में आहुति डाली और माता की पावन ज्योत के दर्शन किए। मंदिर समिति द्वारा आए हुए भक्तों के लिए शीतल जल और विशेष प्रसाद की भी उत्तम व्यवस्था की गई थी। आयोजन समिति ने जानकारी दी कि महायज्ञ के आगामी दिनों में भी इसी प्रकार विशिष्ट विद्वानों द्वारा पूजन और संध्या काल में भजन कीर्तन का प्रवाह जारी रहेगा। उन्होंने समस्त धर्मप्रेमी जनता से अपील की है कि वे अधिक से अधिक संख्या में पहुंचकर इस आध्यात्मिक पुण्य के सहभागी बनें।


