गेहूं खरीद के नए नियमों के विरोध में दिल्ली-पटियाला नेशनल हाइवे को किसानों ने किया जाम
सडक़ के बीचों-बीच बैठकर 6 घंटे तक हाइवे को रखा जाम
सरकार के खिलाफ रोष प्रकट कर नए नियमों को रदद करने की मांग की
नरवाना 11 अप्रैल (नरेन्द्र जेठी)
गेहूं खरीद के नए नियमों को रदद करने की मांग को लेकर दिल्ली-पटियाला नेशनल हाइवे पर तारखा कोठी के पास हाइवे के बीचों-बीच बैठकर रोड को किसानों ने जाम किया। 11 बजे से शुरू हुआ ये सांकेतिक धरना 3 बजे तक चला। धरने के आस-पास भारी संख्या में पुलिस बल तैनात रहा। वाहनों को सफा खेड़ी, डूमरखा से डायवर्ड किया गया ताकि वाहन चालकों को परेशानी न हो। किसानों ने सरकार के खिलाफ नारेबाजी करते हुए नियमों को किसान विरोधी करार दिया। वक्ताओं ने कहा कि जिस तरह से तीन कृषि कानूनों को भाजपा सरकार किसान हितैषी बताती थी जो किसान आंदोलन के चलते सरकार को रदद करने पड़े। ऐसे ही गेहूं खरीद के नियमों को भाजपा किसान हितैषी बता रही है जबकि ये नियम किसानों को परेशान करने वाले है। इन नियमों को सरकार रदद करें ताकि किसान पहले की तरह अपनी फसल मंडी बेच कर जल्दी खेत वापिस जा सकें।

अखिल भारतीय किसान सभा के राज्य प्रधान बलबीर सिंह ने कहा कि गेहूं खरीद को लेकर सरकार के नए नियमों के चलते नेशनल हाइवे को जाम किया है। सरकार ने गेहूं की खरीद को लेकर कुछ शर्ते लगाई है। पहली शर्ते लगाई है कि ट्रैक्टर पर नंबर प्लेट, ड्राइविंग लाइसेंस, खेत में जिसके नाम पंजीकरण है उस किसान का आना जरूरी है। किसान के फिंगर प्रिंट लगने के बाद उसका फोटो अलोड किया जाएगा। इन नियमों के चलते किसान परेशानी हो रहा है। हरियाणा में ऐसा क्या हो गया कि ऐसी शर्त लेकर सरकार आई है। इन शर्तों को वापिस करवाने के लिए रोड जाम किया है। पहले गेहूं की खरीद को लेकर 14 घंटे गेट पास काटने के लिए समय तय किया था। जब विरोध हुआ तो उसको 24 घंटे किया गया। सरकार इन नियमों को बढि?ा बता रही है लेकिन किस किसान से सरकार ने पूछा है। नियम किसान के लिए अच्छे होते तो हम क्यों सडक़ों पर आते। कई दिनों से किसान मंडियों में परेशान है। पहले तीन कृषि कानूनों को भी किसान हितैषी सरकार बता रही थी। आने वाले दिनों में मंडियों में किसानों के साधनों की भीड़ होगी। किसान हित में ये नए नियम होते तो हम क्यों विरोध करते।
सीमा बद्दोवाला ने कहा कि सडक़ जाम कर किसानों ने सांकेतिक धरना दिया है। जो सरकार फसल खरीद के लिए नियम लेकर आई है उससे किसान परेशान है। गेहूं की फसल ही किसान की बचत होती है। गेहूं खरीद को लेकर नए-नए नियम जो सरकार लेकर आई है उन नियमों से किसान बहुत परेशान है। किसान अपनी फसल को खेत में कटवाए या मंडी में आकर अंगूठा लगाए। जब सरकार ने किसान से पंजीकरण ले लिया है उसमें पूरी जानकारी है। अब जो बायोमेट्रिक नियम बनाया है वो किस लिए है। सब मिलकर गेहूं खरीद के नियमों का विरोध कर रहे है। खाप, किसान संगठन धरना में शामिल हुए है।
दाडऩ खाप पूर्व प्रधान सूरजभान घसो ने कहा कि जब गेहूं बेचने के लिए मेरी फसल मेरा ब्यौरा पर दर्ज पंजीकरण ले रहे है तो बायोमेट्रिक का नियम क्यों लागू किया है। जो गेटपास है वो भी पहले की तरह होना चाहिए। इंटरनेट बंद होने से परेशानी होती है। ट्रैक्टर के बाद ट्राली पर भी नंबर लिखने की बात सामने आ रही है। जब गेहूं की कटाई चलती है तो ट्राली आपस में किसान एक-दूसरे से लेते है। जो पंजीकरण फसल का है उसके हिसाब से पहले की तरह खरीदा जाए। इस मौके पर रघुबीर नैन, लीला छापड़ा, कैप्टन रणधीर चहल, सिक्कम सफा खेड़ी भी मौजूद रहे।


