पेयजल नहीं तो क्या, पेयजल नहीं आने के मैसेज तो आ रहे
चार दिन पहले 8 जनवरी को भी सुबह और शाम पेयजल की आपूर्ति नहीं
रात को फाल्ट होने की वजह से टैंक में पानी नहीं होने से पानी नहीं आएगा
सिस्टम सर्दी में स्वस्थ और चुने हुए जनप्रतिनिधि अपनी मस्ती में मस्त
फतह सिंह उजाला
पटौदी /हेलीमंडी /जाटोली। यह तो भला हो इंटरनेट और मोबाइल फोन का बहुत काम की चीज है। बहुत ही महत्वपूर्ण और जरूरी संदेश भी आजकल मोबाइल फोन पर व्हाट्सएप के माध्यम से मिल रहे हैं। यह बात कहने में कोई हर्ज अथवा गुरेज नहीं है कि पेयजल की आपूर्ति हो या नहीं हो ? लेकिन मोबाइल पर पानी नहीं आएगा, यह मैसेज तो आ रहे हैं। यदि यह मैसेज भी नहीं आए की पानी नहीं आएगा तो फिर कैसे पता लगेगा ? सरकारी विभाग कर्मचारी और समाजसेवी जागरूक तथा पूरी तरह से सक्रिय है?
चार दिन पहले 8 जनवरी को भी कुछ ऐसा ही खेल खेला गया। तकनीकी खराबी है, बिजली का फाल्ट है, ना सुबह पानी आया और ना शाम के समय पानी की आपूर्ति की गई । सर्दी के मौसम में जैसे तैसे आम जनता ने और लोगों ने अपना गुजर बसर कर लिया। वैसे भी सर्दी का मौसम है ठंड पड़ रही है, नहीं नहाना हो तो, यह बहाना भी सही है कि पानी ही नहीं आया है । लेकिन घर और घरेलू कार्यों की अन्य जरूरत के लिए पानी तो जरूरी ही है । पानी के बिना दैनिक जीवन के विभिन्न कार्य पूरे होना संभव ही नहीं है।
पानी आया, ना आए , यह जानकारी जलापूर्ति एवं अभियांत्रिकी विभाग के द्वारा मोबाइल के माध्यम से विभिन्न व्हाट्सएप ग्रुप में शेयर की जा रही है । इसी जानकारी को बहुत से समाजसेवी अपने ग्रुप में या अन्य ग्रुप में शेयर करते रहते हैं। पानी नहीं आएगा यह मैसेज फॉरवर्ड करने और किया जाने से इतना तो एहसास हो जाता है कि विभिन्न समाजसेवी पूरी तरह से सक्रिय हैं । ऐसे समाजसेवी लोगों में सत्ता पक्ष से जुड़े हुए लोग भी शामिल हैं। उनकी उपेक्षा किया जाना किसी भी नजरिए से उचित नहीं। सर्दी के मौसम में पानी आए या ना आए हालत को देखते हुए सिस्टम पूरी तरह से सुस्त है।
4 दिन पहले भी जनता के चुने हुए जनप्रतिनिधि के संज्ञान में पानी की समस्या लाई गई । यहां तक अनुरोध किया गया कि पटौदी हेली मंडी जाटोली क्षेत्र में नहरी पानी आधारित पेयजल व्यवस्था बढ़ती जरूरत को देखते हुए अपर्याप्त साबित हो रही है। आम लोगों की परेशानी और समय की मांग को देखते हुए अतीत में जितनी भी वाटर सप्लाई जलापूर्ति एवं अभियांत्रिकी विभाग के द्वारा संचालित की जा रही थी, उन्हें जल्द से जल्द जनहित में आरंभ करवा दिया जाना चाहिए। पानी को नैतिक, कानूनी और संवैधानिक दृष्टि से जीवन की मूलभूत जरूरत भी बताया गया है। आम जनता इन्हीं जरूरत और आने वाली परेशानियों के समाधान के लिए ही अपने जनप्रतिनिधि चुनौती है।
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