राजकोट: पत्रकार का पुलिस पर बर्बरता का आरोप, कहा- गुप्तांग में पेट्रोल डालकर उल्टा लटका कर पीटा
नई दिल्ली/28 मार्च/अटल हिन्द ब्यूरो
गुजरात के राजकोट में एक स्थानीय पत्रकार ने पुलिस हिरासत में गंभीर प्रताड़ना के आरोप लगाए हैं. ‘खबर राजकोट न्यूज़’ नामक ऑनलाइन मीडिया चलाने वाले पत्रकार सुरेश वडेचा का आरोप है कि राजकोट क्राइम ब्रांच के डीसीपी जगदीश बांगड़वा और उनकी टीम ने उन्हें बेरहमी से पीटा और अमानवीय व्यवहार किया.हालांकि, पुलिस ने इन आरोपों को सिरे से खारिज करते हुए इन्हें ‘ड्रामा’ बताया है.
द वायर हिंदी से फोन पर बातचीत में सुरेश वडेचा ने कहा कि 22 मार्च को उन्हें घर से करीब दो किलोमीटर दूर सड़क से पुलिस उठा ले गई. उन्होंने कहा, ‘क्राइम ब्रांच के लोग मुझे बिना कुछ बताए ले गए. एक कथित वसूली के मामले को लेकर मुझे पीटा गया. मेरे कपड़े उतरवाकर गुप्तांगों में पेट्रोल डाला गया. मुझे उल्टा लटका कर जानवरों की तरह मारा गया, जिससे कान का पर्दा फट गया, पैर में फ्रैक्चर हो गया और कमर व सिर पर गंभीर चोटें आईं.’

वडेचा के मुताबिक, 23 मार्च को उन्हें राजकोट सिविल अस्पताल में भर्ती कराया गया. उन्होंने आरोप लगाया कि ’24 घंटे बाद जब मुझे छोड़ा गया तो मेरी तबीयत बिगड़ गई. 108 एम्बुलेंस से अस्पताल पहुंचा, लेकिन वहां भी पुलिसकर्मी डॉक्टरों पर दबाव डाल रहे थे कि मुझे भर्ती न किया जाए और मुझे धमकियां दी गई कि झूठे केस में फंसा देंगे. तुम्हारा घर गिरा देंगे.’
इस बीच, कांग्रेस विधायक जिग्नेश मेवाणी ने 27 मार्च को राजकोट सिविल अस्पताल में सुरेश से मुलाकात की और उनका वीडियो सोशल मीडिया पर साझा किया.पीटीआई के मुताबिक, मेवाणी ने मुख्यमंत्री को पत्र लिखकर डीसीपी के खिलाफ एफआईआर दर्ज करने, गिरफ्तारी और बर्खास्तगी की मांग की है.इस मामले पर गुजरात के पूर्व आईपीएस अधिकारी रमेश सवाणी ने भी प्रतिक्रिया दी है. उन्होंने एक फेसबुक पोस्ट में आरोपों को बेहद गंभीर बताते हुए कहा कि ‘ऐसी सजा तो अदालत भी नहीं दे सकती.’उन्होंने सवाल उठाया कि अगर आरोप सही हैं, तो पुलिस ने कानूनी सीमाएं पार कर बर्बरता क्यों की
पत्रकार का कहना है कि यह पूरा मामला बिल्डर आसिम अगाम से जुड़ा है, जिसके अवैध निर्माण को लेकर उन्होंने रिपोर्टिंग की थी. ‘मेरे खिलाफ कोई ठोस शिकायत नहीं थी, लेकिन उसी के इशारे पर मुझे फंसा कर पिटवाया गया,’ उन्होंने दावा किया.वहीं, राजकोट क्राइम ब्रांच के डीसीपी जगदीश बांगड़वा ने द वायर हिंदी से बातचीत में इन आरोपों को खारिज किया है.उन्होंने कहा, ‘हमने कोई मारपीट नहीं की है. वह एक अपराधी है और उसके खिलाफ कई आपराधिक मामले दर्ज हैं.’ डीसीपी ने कुछ दस्तावेज भी साझा किए, जिनके अनुसार 2020 से 2025 के बीच सुरेश के खिलाफ आठ मामले दर्ज हैं, जिनमें ज्यादातर शांति भंग और स्थानीय विवाद से जुड़े हैं. कुछ मामलों में शिकायतकर्ताओं ने बाद में फाइल बंद करने की सिफारिश भी की है.
सबसे ताजा मामला 10 मार्च 2026 का है, जिसमें ‘भाग्यलक्ष्मी स्क्रैप’ के मालिक भरत भाई वीर भाई सागर ने सुरेश पर ‘व्यवसाय स्थल’ का वीडियो बनाकर लाखों रुपये की उगाही की कोशिश का आरोप लगाया है.हालांकि, द वायर से बातचीत में सागर यह स्पष्ट नहीं कर सके कि कथित वीडियो में क्या था. पुलिस की तरह उन्होंने भी मारपीट के आरोपों को ‘नाटक’ बताया. हालांकि, यह एफआईआर नहीं है, बल्कि भरत भाई वीर भाई सगर द्वारा डीसीपी ऑफिस में दिया गया आवेदन भर है.द वायर हिंदी से बातचीत में सुरेश ने उगाही के आरोपों से पूरी तरह इनकार किया है..
हिरासत में बर्बरता: टॉप पांच राज्यों में गुजरात
देश में हिरासत में मौत और कथित पुलिस बर्बरता के मामलों को लेकर हालिया सरकारी आंकड़े भी गंभीर तस्वीर पेश करते हैं. गृह मंत्रालय के मुताबिक, इस साल 15 मार्च तक देशभर में हिरासत में मौत के 170 मामले दर्ज किए जा चुके हैं, जो पिछले साल के कुल 140 मामलों से भी अधिक हैं.
आंकड़ों के अनुसार, गुजरात भी उन राज्यों में शामिल है जहां ऐसे मामलों की संख्या लगातार चिंता का विषय बनी हुई है. इस साल 15 मार्च तक गुजरात में 14 हिरासत में मौत के मामले दर्ज किए गए, जिससे वह देश के शीर्ष राज्यों में शामिल है.
गृह मंत्रालय के आंकड़े बताते हैं कि गुजरात में 2021-22 में 24, 2022-23 में 15, 2023-24 में 18, 2024-25 में 14 और इस वर्ष अब तक 14 मौतें दर्ज की गई हैं.
इसी अवधि में महाराष्ट्र में भी 14 मामले सामने आए हैं, जबकि बिहार (19), राजस्थान (18) और उत्तर प्रदेश (15) इस सूची में गुजरात से ऊपर हैं.


