नई दिल्ली, 26 मई 2014।
देश की राजनीति में एक ऐतिहासिक क्षण दर्ज हुआ जब नरेंद्र मोदी ने भारत के 15वें प्रधानमंत्री के रूप में शपथ ली। शपथ ग्रहण समारोह का आयोजन नई दिल्ली स्थित Rashtrapati Bhavan के भव्य प्रांगण में किया गया, जहां तत्कालीन राष्ट्रपति Pranab Mukherjee ने उन्हें पद और गोपनीयता की शपथ दिलाई।
ऐतिहासिक जनादेश के बाद नई सरकार
2014 के लोकसभा चुनावों में भारतीय जनता पार्टी को पूर्ण बहुमत मिला—यह लगभग तीन दशकों बाद पहली बार था जब किसी एक पार्टी ने स्पष्ट बहुमत हासिल किया। इस जनादेश को “परिवर्तन” और “स्थिर सरकार” की उम्मीद के रूप में देखा गया।
पड़ोसी देशों को विशेष निमंत्रण
शपथ समारोह की एक और बड़ी विशेषता थी—दक्षिण एशियाई देशों (SAARC) के नेताओं को आमंत्रण। इसे क्षेत्रीय कूटनीति में नई पहल माना गया। पड़ोसी देशों के शीर्ष नेताओं की मौजूदगी ने समारोह को अंतरराष्ट्रीय महत्व दे दिया।
जनता की उम्मीदें और वादे
प्रधानमंत्री पद संभालते ही मोदी ने विकास, सुशासन और भ्रष्टाचार-मुक्त प्रशासन का संकल्प दोहराया। चुनाव प्रचार के दौरान दिए गए “अच्छे दिन” के नारे और विकास मॉडल को लेकर जनता में बड़ी उम्मीदें थीं।
रोजगार, महंगाई, बुनियादी ढांचा और निवेश—ये मुद्दे नई सरकार की प्राथमिकताओं में शामिल बताए गए।
️ बड़े पैमाने पर शपथ समारोह
राष्ट्रपति भवन के खुले प्रांगण में आयोजित यह समारोह पहले के मुकाबले अधिक भव्य और सार्वजनिक था। हजारों मेहमान, उद्योग जगत के प्रतिनिधि, धार्मिक नेता और विभिन्न क्षेत्रों की प्रमुख हस्तियां इसमें शामिल हुईं। यह आयोजन भारतीय लोकतंत्र की ताकत और जनभागीदारी का प्रतीक बना।
राजनीतिक संदेश
विश्लेषकों के अनुसार, यह शपथ समारोह सिर्फ सत्ता परिवर्तन नहीं बल्कि राजनीतिक संस्कृति में बदलाव का संकेत भी था। मजबूत नेतृत्व, निर्णायक फैसलों और वैश्विक मंच पर भारत की सक्रिय भूमिका—इन संकेतों को नई सरकार की दिशा माना गया।
निष्कर्ष
26 मई 2014 का दिन भारतीय राजनीति में एक नए अध्याय की शुरुआत के रूप में याद किया जाता है। ऐतिहासिक बहुमत, भव्य शपथ समारोह और क्षेत्रीय कूटनीति के संदेश के साथ नरेंद्र मोदी ने देश की कमान संभाली। आने वाले वर्षों में लिए गए फैसलों ने इस कार्यकाल को भारतीय राजनीति के महत्वपूर्ण दौर में बदल दिया।
नई दिल्ली।
26 मई 2014 को Narendra Modi ने Rashtrapati Bhavan में भारत के प्रधानमंत्री पद की शपथ ली। यह क्षण भारतीय राजनीति में एक निर्णायक बदलाव के रूप में देखा गया। 20 फरवरी 2026 तक का यह सफर कई बड़े फैसलों, राजनीतिक उतार-चढ़ाव और वैश्विक मंच पर भारत की सक्रिय भूमिका का गवाह रहा।
2014: प्रचंड बहुमत और नई शुरुआत
2014 के लोकसभा चुनावों में पूर्ण बहुमत के साथ सरकार बनी। “विकास” और “अच्छे दिन” के वादों के साथ नई नीतियों की शुरुआत हुई। प्रशासनिक ढांचे में बदलाव और केंद्रित नेतृत्व शैली ने सरकार की पहचान बनाई।
2016–2019: बड़े और निर्णायक फैसले
इस अवधि में कई महत्वपूर्ण निर्णय लिए गए—आर्थिक और सामाजिक सुधारों को लेकर व्यापक बहस हुई। 2019 में दोबारा बहुमत के साथ सरकार बनी और दूसरी बार शपथ ग्रहण हुआ।
2019 के बाद: संरचनात्मक बदलाव
दूसरे कार्यकाल में कई संवैधानिक और नीतिगत फैसले चर्चा में रहे। राष्ट्रीय सुरक्षा, बुनियादी ढांचा, डिजिटल इंडिया और वैश्विक कूटनीति पर विशेष जोर दिया गया।
वैश्विक मंच पर भारत
अंतरराष्ट्रीय सम्मेलनों और रणनीतिक साझेदारियों में भारत की भूमिका मजबूत हुई। वैश्विक अर्थव्यवस्था, जलवायु परिवर्तन और तकनीकी सहयोग जैसे मुद्दों पर सक्रिय भागीदारी देखी गई।
2024 के बाद से 2026 तक
हालिया वर्षों में आर्थिक विकास, सामाजिक योजनाओं और चुनावी रणनीतियों को लेकर राजनीतिक बहस जारी रही। विपक्ष और सरकार के बीच नीतिगत मुद्दों पर टकराव भी सामने आया।
निष्कर्ष
26 मई 2014 से 20 फरवरी 2026 तक का यह दौर भारतीय राजनीति में गहरे प्रभाव छोड़ने वाला रहा। समर्थकों के लिए यह निर्णायक नेतृत्व और विकास का समय है, जबकि आलोचकों के लिए यह नीतियों और फैसलों की समीक्षा का दौर।
इतिहास के पन्नों में यह अवधि एक ऐसे अध्याय के रूप में दर्ज रहेगी जिसने भारतीय राजनीति की दिशा और विमर्श दोनों को प्रभावित किया।


