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कुछ न कहो, ख़ामोश रहो/ लब सी लो, ख़ामोश रहो! : राजेंद्र शर्मा भाई ये तो इंसाफ की बात…
संवैधानिक प्रावधानों को प्रगतिशील व्याख्या की दरकार आलेख : एम ए बेबी, अनुवाद : संजय पराते राज्यपाल और राष्ट्रपति की शक्तियों से जुड़े राष्ट्रपति के संदर्भ…
कोई भारत का राष्ट्रपति हो, तो उसका धार्मिक होना सहज संभाव्य है। जहां करोड़ों -करोड़ लोग धार्मिक हों, जहां का प्रधानमंत्री किसी न किसी मंदिर…
संघ का नया चुनावी युद्घघोष — घुसपैठियों का खतरा! आलेख : राजेंद्र शर्मा ”राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए गंभीर खतरे”…
क्या भारत का लोकतंत्र अब ‘नियंत्रित लोकतंत्र’ में बदल गया है? (आलेख : कृष्ण प्रताप सिंह)अंदेशे तो पहले से जताए जा रहे थे, लेकिन अब देश…
(व्यंग्य : मज़्कूर आलम) देश में ऐसे ऐतिहासिक क्षण बार-बार नहीं आते, जब लाल किले के प्राचीर से…
विवादों के बीच इतिहास से संवाद: क्या कहती है ‘द बंगाल फाइल्स’? [विवादों के पार, सिनेमा का सवाल—क्या हम सच से डरते हैं?] पश्चिम बंगाल की सांस्कृतिक…
रत के मुसलमानों को राजनीतिक रूप से हाशिए पर धकेल दिया (भारतीय मुस्लिमों पर दो लेखों की श्रृंखला की यह पहली क़िस्त है.)भारतीय मुसलमानों का राजनीतिक…
1976 तक तो लोकसभा, राज्यसभा और राज्यों की विधानसभाओं की सीटों की संख्या इस तरह तय की जाती रही ताकि आबादी के प्रतिनिधित्व का समान अनुपात…
अप्रवासियों भारतियों के साथआतंकवादियों जैसा सलूक क्यों किया गया? घुमा-फिराकर ठीकरा वही नरेंद्र मोदी जी के सिर पर; मोदी जी ने ऐसा कैसे होने दिया? डोनाल्ड…
अटल हिन्द - राष्ट्रीय हिंदी दैनिक
राजकुमार अग्रवाल (मुख्य संपादक)
