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“बेजार” से “गुलजार” हो गई आम आदमी पार्टी

“बेजार” से “गुलजार” हो गई आम आदमी पार्टी
आम आदमी पार्टी में शामिल होने के लिए हरियाणा के 200 नेताओं की लंबी कतार

अटल हिन्द /राजकुमार अग्रवाल
नई दिल्ली। क्या यह सही है कि पंजाब चुनाव के परिणाम से पहले आम आदमी पार्टी को हरियाणा में कोई “पूछ” नहीं रहा था!
– क्या यह सही है कि पंजाब चुनाव परिणाम से पहले हरियाणा के एक भी पूर्व विधायक या सांसद ने आम आदमी पार्टी में शामिल होने की “हामी” नहीं भरी थी!
– क्या यह सही है कि आप हरियाणा प्रभारी सुशील गुप्ता के लाख प्रयासों के बावजूद कोई बड़ा नेता आप में शामिल होने को तैयार नहीं हुआ!
– क्या यह सही है कि पंजाब चुनाव के परिणाम से पहले हरियाणा के नेताओं को आप “बंजर” नजर आ रही थी!
– क्या यह सही है कि पंजाब चुनाव के बाद आम आदमी पार्टी के हरियाणा में “नजारा” ही बदल गया है!
– क्या यह सही है कि हरियाणा के नेताओं में आप में शामिल होने के लिए “खलबली” मची हुई है!
– क्या यह सही है कि हरियाणा के नेताओं की “लंबी” कतार आम आदमी पार्टी में शामिल होने के लिए “बेकरार’ है!
– क्या यह सही है कि आम आदमी पार्टी में शामिल होने के लिए सैकड़ों नेता सुशील गुप्ता से बात कर रहे हैं!
– क्या यह सही है कि हरियाणा के नेताओं ने आम आदमी पार्टी को सत्ता की अगली “दावेदार” मान लिया है!

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उपरोक्त सभी सवालों का जवाब हां में है।

10 मार्च से पहले हरियाणा के नेताओं को “बेजार” लगने वाली आम आदमी पार्टी एक ही झटके में “गुलजार” हो गई है। आम आदमी पार्टी के हरियाणा प्रभारी सुशील गुप्ता 1 साल से हरियाणा के नेताओं से आम आदमी पार्टी में शामिल होने के लिए “भरसक” प्रयास करते रहे लेकिन एक भी नेता ने आम आदमी पार्टी में जुड़ने की “हामी” नहीं भरी लेकिन पंजाब में आम आदमी पार्टी की जीत से एकदम पूरा “नजारा” बदल गया। यह वक्त का ही फिर है कि 10 मार्च से पहले सुशील गुप्ता हरियाणा के नेताओं के घरों के चक्कर काट रहे थे और अब हरियाणा के सैकड़ों नेता सुशील गुप्ता के घर के चक्कर काट रहे हैं।

जी हां यह सच्चाई है कि पंजाब में आम आदमी पार्टी की धमाकेदार जीत के बाद हरियाणा के नेताओं की भी लार “टपकने” लगी है और इसलिए आम आदमी पार्टी में शामिल होने के लिए अचानक ही हरियाणा के नेताओं के बड़ी फौज तैयार हो गई है। हरियाणा में आम आदमी पार्टी की सत्ता में “मजबूत” दावेदारी की संभावना का अंदाजा लगाकर हरियाणा के सैकड़ों नेता आम आदमी पार्टी में शामिल होने के लिए “बेकरार” हैं।

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सुशील गुप्ता के पास आम आदमी पार्टी में शामिल होने वाले नेताओं की संख्या लगभग 200 के पास पहुंच चुकी है। इन नेताओं में ए, बी और सी तीनों श्रेणियों के चेहरे शामिल हैं। तुन दर्जन पूर्व विधायक और पूर्व सांसद सुशील गुप्ता से आम आदमी पार्टी में शामिल होने की “गुजारिश” कर चुके हैं। इनमें से चार पूर्व मंत्री और विधायक आप में शामिल भी हो चुके हैं। बाकी नेताओं के भी आम आदमी पार्टी में शामिल होने के “प्रबल” संभावना नजर आ रही है। यह वक्त का ही “फेर” है कि कल तक नेताओं के पास सुशील गुप्ता की से मिलने का समय नहीं था और आज सुशील गुप्ता के पास हरियाणा के नेताओं से मिलने का समय नहीं है।

रात को 11-12 बजे तक हरियाणा के नेता सुशील गुप्ता के पास जाकर उन्हें आम आदमी पार्टी में शामिल होने की “गुहार” लगा रहे हैं। इस बदले हुए माहौल का आम आदमी पार्टी “फायदा” उठा रही है। पंजाब चुनाव के परिणाम से पहले आम आदमी पार्टी में शामिल होने वाले नेताओं को टिकट की “गारंटी” दी जा रही थी लेकिन अब बिना किसी टिकट के “भरोसे” के नेताओं को शामिल होने के लिए कहा जा रहा है।

आम आदमी पार्टी के प्रति हरियाणा में आज वही “माहौल” पैदा हो गया है जो 2014 में भाजपा के केंद्र में सरकार बनने के बाद पैदा हुआ था। बात यह है कि 10 मार्च के बाद से हरियाणा में हर जगह सिर्फ आम आदमी पार्टी की चर्चा है। सभी गांव, शहरों और कस्बों में सिर्फ आम आदमी पार्टी की पंजाब में जबरदस्त जीत को लेकर चर्चा हो रही है।
आम जनता के अलावा सभी पार्टियों के वर्करों और नेताओं में आम आदमी पार्टी को लेकर ही चर्चेसे चल रहे हैं और हर जगह ही कहा जा रहा है कि 2024 में आम आदमी पार्टी हरियाणा में भी पंजाब “जैसा” उलटफेर कर सकती है।

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पंजाब के चुनाव परिणाम ने हरियाणा के उन नेताओं को आम आदमी पार्टी में शामिल होने के लिए बेकरार कर दिया है जो या तो घर पर बैठे हुए हैं या भाजपा और कांग्रेस में घुटन महसूस कर रहे हैं। अभी तक आम आदमी पार्टी का हरियाणा में कोई जनाधार था लेकिन पंजाब में सरकार बनाने के साथ हरियाणा में आम आदमी पार्टी का “वजन” बढ़ गया है और उसे एकदम भाजपा और कांग्रेस के “बराबर” सत्ता की “दावेदार” मान लिया गया है।

पंजाब में आई आम आदमी पार्टी की सुनामी के बाद हरियाणा के सियासी समीकरण बदलते हुए नजर आ रहा है।
अब देखना यही है कि अगले 1 महीने के दौरान हरियाणा के कौन-कौन से नेता आम आदमी पार्टी की टोपी पहनते हुए नजर आते हैं। यह सच्चाई है कि पिछले 7 दिन के दौरान आम आदमी पार्टी ने हरियाणा में बीजेपी, कांग्रेस और चौटाला परिवार में चिंता का माहौल पैदा कर दिया है। अब देखना यह है कि आम आदमी पार्टी इस जोरदार सियासी माहौल का फायदा किस तरह से उठाने में सफल होती है??

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