फरीदाबाद की न्यायाधीश प्रियंका वर्मा ने बिना दहेज़ और दिखावे के प्रशांत संग लिए सात फेरे
पवित्र धाम : त्रियुगीनारायण मंदिर में दहेज मुक्त सादगीपूर्ण विवाह ने दिया समाज को सकारात्मक संदेश
कुरुक्षेत्र/ 23 अप्रेल /शशि
अशोक कुमार वर्मा हरियाणा पुलिस में उप-निरीक्षक के पद पर कार्यरत की बेटी फरीदाबाद में कार्यरत न्यायाधीश प्रियंका वर्मा का विवाह उत्तराखंड के प्रसिद्ध त्रियुगीनारायण मंदिर में संपन्न एक सादगीपूर्ण और दहेज मुक्त विवाह इन दिनों चर्चा का विषय बना हुआ है। इस अनूठे आयोजन ने न केवल पारंपरिक मूल्यों को पुनर्जीवित किया, बल्कि समाज को एक सुदृढ़ और सकारात्मक संदेश भी दिया। कुरुक्षेत्र निवासी एवं हरियाणा न्यायिक सेवा, फरीदाबाद में कार्यरत न्यायाधीश प्रियंका वर्मा ने प्रशांत के साथ बिना दहेज और बिना किसी दिखावे के सात फेरे लेकर एक नया प्रेरणादायक उदाहरण प्रस्तुत किया है।

यद्यपि विवाह पूरी तरह से वैदिक रीति-रिवाजों के अनुसार, अत्यंत सादगी और गरिमा के साथ सम्पन्न हुआ। सीमित संख्या में परिजनों और निकट सम्बन्धी लोगों की उपस्थिति ने इस आयोजन को और भी विशेष बना दिया। प्रियंका वर्मा के पिता डॉ. अशोक कुमार वर्मा हरियाणा पुलिस में उप-निरीक्षक के पद पर कार्यरत हैं, जबकि उनकी माता सुषमा वर्मा विशेष पुलिस अधिकारी के रूप में कुरुक्षेत्र में अपनी सेवाएं दे रही हैं। यह परिवार लंबे समय से सादगीपूर्ण जीवनशैली और उच्च सामाजिक मूल्यों का पालन करता आ रहा है। डॉ. वर्मा वर्षों से दहेज प्रथा के कट्टर विरोधी रहे हैं।
उनका मानना है कि दहेज जैसी कुरीतियां समाज की प्रगति में बाधक हैं। उन्होंने अपनी संतानों को हमेशा सादगी, ईमानदारी और आत्मनिर्भरता का पाठ पढ़ाया है, विशेषकर बेटियों को शिक्षित और आत्मनिर्भर बनाने पर जोर दिया। वे सदैव सामजिक कुरीतियों का खंडन करते आ रहे हैं। बेटियों को दहेज़ नहीं अपितु शिक्षा और संस्कार देने की विचारधारा लेकर वे वर्षों से कार्य कर रहे हैं। यह विवाह केवल एक पारिवारिक आयोजन नहीं, बल्कि समाज के लिए एक प्रेरणादायक संदेश है कि दिखावे से अधिक महत्वपूर्ण सच्चे संस्कार और आपसी सम्मान हैं। इस पहल ने यह सिद्ध कर दिया कि सरलता और सकारात्मक सोच से ही एक सशक्त और जागरूक समाज का निर्माण संभव है। रात्रि विवाह, डीजे, आतिशबाज़ी और विवाह में अनावश्यक व्यय को लेकर भी डॉ. अशोक वर्मा सदा से जागरूकता अभियान चलाते हैं।


