रोहतक की गेस्ट टीचर सस्पेंड, जंतर-मंतर प्रदर्शन में शामिल होने के बाद कार्रवाई
रोहतक/11 जून 2026 /अटल हिन्द ब्यूरो
रोहतक जिले में एक सरकारी स्कूल की गेस्ट टीचर सुलेखा दलाल को शिक्षा विभाग ने निलंबित कर दिया है। जिला मौलिक शिक्षा अधिकारी (DEEO) द्वारा जारी आदेश के अनुसार उनका निलंबन 8 जून से प्रभावी माना जाएगा। हालांकि विभागीय आदेश में निलंबन का कोई स्पष्ट कारण नहीं बताया गया है।
आदेश के मुताबिक निलंबन अवधि के दौरान सुलेखा दलाल का मुख्यालय रोहतक ब्लॉक शिक्षा अधिकारी (BEO) कार्यालय रहेगा और उन्हें बिना पूर्व अनुमति मुख्यालय छोड़ने की अनुमति नहीं होगी।
वायरल वीडियो के बाद बढ़ी चर्चा
सुलेखा दलाल हाल ही में दिल्ली के जंतर-मंतर पर आयोजित ‘कॉकरोच जनता पार्टी’ (CJP) के विरोध प्रदर्शन में शामिल हुई थीं। प्रदर्शन के दौरान उनका एक वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हुआ था।
वीडियो में उन्होंने कहा था कि यह युवाओं और अभिभावकों की लड़ाई है और वह एक चिंतित मां के रूप में अपने बच्चों के भविष्य की चिंता को लेकर प्रदर्शन में शामिल हुई हैं। उनके बयान में “कॉकरोच की मां मैदान में उतर चुकी है” जैसी टिप्पणी भी चर्चा का विषय बनी थी।
“सस्पेंशन की वजह नहीं बताई गई”
निलंबन पर प्रतिक्रिया देते हुए सुलेखा दलाल ने कहा कि उन्हें अब तक यह नहीं बताया गया कि आखिर उन्हें किस कारण से सस्पेंड किया गया है।
उन्होंने कहा कि वह कई वर्षों से बतौर गेस्ट टीचर सेवाएं दे रही हैं और उन्हें यह जानकारी नहीं थी कि ऐसे किसी प्रदर्शन में शामिल होना नियमों के खिलाफ हो सकता है। उनका कहना है कि कार्रवाई से पहले विभाग को कारण स्पष्ट करना चाहिए था।
बेटे की परीक्षा से जुड़ी चिंता बताई वजह
सुलेखा दलाल ने बताया कि उनके बेटे ने हाल ही में एक भर्ती परीक्षा दी थी, जिसमें कथित अनियमितताओं की शिकायतें सामने आई थीं। इसी वजह से वह एक अभिभावक के रूप में इस मुद्दे से खुद को जुड़ा हुआ महसूस करती हैं।
उन्होंने कहा कि वह किसी राजनीतिक संगठन या समूह का हिस्सा नहीं हैं और केवल एक मां के रूप में अपनी चिंता व्यक्त करने के लिए प्रदर्शन में शामिल हुई थीं।
क्या है कॉकरोच जनता पार्टी (CJP)?
कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) ने 6 जून को नई दिल्ली के जंतर-मंतर पर प्रदर्शन आयोजित किया था। इसमें देशभर से छात्र, युवा और अभिभावक शामिल हुए थे। प्रदर्शनकारियों ने विभिन्न प्रतियोगी परीक्षाओं में कथित गड़बड़ियों की जांच, जिम्मेदारी तय करने और केंद्रीय शिक्षा मंत्री के इस्तीफे की मांग उठाई थी।
पिछले कुछ समय से यह समूह सोशल मीडिया अभियानों के जरिए चर्चा में है और खुद को शिक्षा व्यवस्था में सुधार तथा परीक्षा पारदर्शिता की मांग करने वाले युवा मंच के रूप में प्रस्तुत कर रहा है।
मामला बना चर्चा का विषय
सुलेखा दलाल के निलंबन के बाद शिक्षा विभाग की कार्रवाई और सरकारी कर्मचारियों की सार्वजनिक आंदोलनों में भागीदारी को लेकर बहस शुरू हो गई है। वहीं, सोशल मीडिया पर भी इस फैसले को लेकर अलग-अलग प्रतिक्रियाएं देखने को मिल रही हैं।


