अयोध्या: राम मंदिर के पहले CEO की चयन प्रक्रिया तेज, निर्माण समिति के अध्यक्ष नृपेंद्र मिश्रा ने शक्तियों और नियमों पर किया बड़ा खुलासा
अयोध्या / 12 जुलाई 2026 /अटल हिन्द
राम मंदिर में कथित दान चोरी के विवाद, एसआईटी (SIT) जांच, एफआईआर और हाल ही में चंपत राय व अनिल मिश्रा के इस्तीफे के बाद अयोध्या लगातार सुर्खियों में है. कृष्ण मोहन को अंतरिम महामंत्री चुने जाने के साथ ही राम मंदिर प्रशासन अब एक बड़े बदलाव के दौर से गुजर रहा है. मंदिर की व्यवस्थाओं को पेशेवर और पारदर्शी बनाने के लिए अब देश के सबसे प्रतिष्ठित धार्मिक स्थलों में से एक, राम मंदिर के लिए पहले मुख्य कार्यकारी अधिकारी (CEO) की नियुक्ति की कवायद तेज हो गई है.
रविवार को राम मंदिर कंस्ट्रक्शन कमेटी के चेयरमैन नृपेंद्र मिश्रा ने मीडिया से बात करते हुए नए सीईओ की शक्तियों, जिम्मेदारियों और प्रशासनिक ढांचे को लेकर कई महत्वपूर्ण जानकारियां साझा कीं.
सरकार का नहीं होगा कोई दखल, ट्रस्ट तय करेगा शक्तियां
राम मंदिर के सीईओ की स्वायत्तता और उनकी शक्तियों से जुड़े सवालों का जवाब देते हुए नृपेंद्र मिश्रा ने स्पष्ट किया कि मंदिर प्रशासन में सरकार की कोई भूमिका नहीं होगी.
असिस्टेंट के रूप में कार्य: सीईओ मुख्य रूप से राम मंदिर ट्रस्ट के एक सहयोगी (असिस्टेंट) के तौर पर काम करेंगे.
वित्तीय प्रबंधन: नए सीईओ के जिम्मे मंदिर की वित्तीय व्यवस्थाओं (Financial Management) की देखरेख का मुख्य जिम्मा होगा.
ट्रस्ट का नियंत्रण: सीईओ के पास कितने अधिकार और शक्तियां होंगी, यह पूरी तरह से ट्रस्ट तय करेगा. उनका पूरा स्टाफ और कामकाज ट्रस्ट के दायरे में ही रहेगा.
“राम मंदिर ट्रस्ट या सीईओ के कामकाज में केंद्र या राज्य सरकार का कोई दखल नहीं होगा. सीईओ का मुख्य काम वित्तीय प्रबंधन को संभालना और भक्तों का अटूट विश्वास बनाए रखना होगा.”
— नृपेंद्र मिश्रा, चेयरमैन, राम मंदिर कंस्ट्रक्शन कमेटी
चयन के लिए बनी 3 सदस्यीय हाई-प्रोफाइल कमेटी
सीईओ के निष्पक्ष और पारदर्शी चयन के लिए 6 जुलाई को एक विशेष 3 सदस्यीय चयन समिति का गठन किया गया था. शनिवार को दिल्ली में हुई इस कमेटी की बैठक में चयन के कड़े मानदंड तय किए गए. इस हाई-प्रोफाइल कमेटी में शामिल हैं:
जस्टिस (रिटायर्ड) प्रमोद कोहली
लेफ्टिनेंट जनरल (रिटायर्ड) विष्णुकांत चतुर्वेदी
सुरेश हवारे (पूर्व चेयरपर्सन, एनआईटी रायपुर व श्री साईंबाबा संस्थान ट्रस्ट)
समिति की सहायता के लिए एक सचिव की नियुक्ति का भी फैसला लिया गया है, और लक्ष्य रखा गया है कि अगले 1 महीने के भीतर चयन प्रक्रिया को पूरा कर लिया जाए.
CEO पद के लिए
कमेटी द्वारा जारी की गई गाइडलाइंस के अनुसार, इस प्रतिष्ठित पद के लिए निम्नलिखित योग्यताएं होना अनिवार्य है:
धर्म: आवेदक का हिंदू धर्म से होना अनिवार्य है.
शैक्षणिक योग्यता: उम्मीदवार का कम से कम ग्रेजुएट होना जरूरी है.
अनुभव: प्रशासन या फाइनेंस (वित्त) के क्षेत्र में न्यूनतम 20 साल का कार्य अनुभव होना चाहिए. (मंदिर प्रबंधन का पूर्व अनुभव रखने वाले उम्मीदवारों को प्राथमिकता दी जाएगी).
कार्यकाल व निवास: शुरुआती नियुक्ति 3 साल के लिए होगी और सेवाकाल के दौरान सीईओ को अयोध्या में ही निवास करना अनिवार्य होगा.
आवेदन कैसे करें?
योग्य उम्मीदवार 18 जुलाई 2026 तक अपना आवेदन जमा कर सकते हैं. इसके लिए एक विशेष ईमेल आईडी तैयार की जा रही है. आवेदनों की स्क्रूटनी के बाद कमेटी शॉर्टलिस्टेड उम्मीदवारों के साथ व्यक्तिगत साक्षात्कार (인터뷰) करेगी.
चयन प्रक्रिया से दूर रहेंगे नृपेंद्र मिश्रा
नृपेंद्र मिश्रा ने साफ किया कि वह सीईओ के नामों की सिफारिश करने वाली इस समिति की बैठकों में शामिल नहीं होंगे. उन्होंने कहा, “मैं बिना वोटिंग राइट्स के एक एक्स-ऑफिशियो डायरेक्टर हूँ. 6 जुलाई की बैठक में भी मैं शामिल नहीं था. आगामी 22 जुलाई की बैठक के एजेंडे में अगर कंस्ट्रक्शन (निर्माण) से जुड़ा मामला होगा, तभी मैं उसमें भाग लूँगा.”
विवादों के बीच भक्तों के अनुभव पर बात करते हुए मिश्रा ने दावा किया कि अयोध्या आने वाले श्रद्धालुओं में भगवान राम और मंदिर की व्यवस्था के प्रति अटूट आस्था है और उन्हें भक्तों की ओर से केवल सकारात्मक फीडबैक ही मिला है.

