महेंद्रगढ़ के वार्ड नंबर 6 में 10 दिनों से ठप पेयजल सप्लाई, भीषण गर्मी में बूंद-बूंद को तरसे लोग; विभाग को दी आंदोलन की चेतावनी
महेंद्रगढ़ /30 मई /अटल हिन्द /विनीत पंसारी
महेंद्रगढ़। शहर के मोहल्ला कटला स्थित वार्ड नंबर 6 के निवासी पिछले 10 दिनों से भीषण पेयजल संकट से जूझ रहे हैं। जन स्वास्थ्य विभाग की कथित लापरवाही और लचर कार्यप्रणाली के कारण यहां के बाशिंदे नारकीय जीवन जीने को मजबूर हैं। पानी की किल्लत से आक्रोशित वार्डवासियों ने अब विभाग को कड़े शब्दों में चेतावनी दी है कि यदि जल्द ही नियमित सप्लाई बहाल नहीं हुई, तो वे दफ्तर का घेराव और उग्र आंदोलन करने के लिए बाध्य होंगे।
झूठे वादों का शिकार हुई जनता
स्थानीय निवासियों परमानंद गर्ग, सुरेश सोनी, कन्हैयालाल पंसारी, विनीत पंसारी, अनूप गर्ग, श्याम सुंदर खोरीवाल, ममता, सीमा, चेतनप्रकाश, कैलाशचंद खोरीवाल, मनोज कौशिक, रामचंद्र, विनोद गर्ग और दीपक खोरीवाल सहित अन्य ने रोष व्यक्त करते हुए बताया कि विभाग ने पहले झूठे दिलासे दिए थे। उनका आरोप है कि विभाग ने सार्वजनिक वादा किया था कि दिसंबर तक वाटर टैंकों की सफाई कर दी जाएगी और होली के बाद नियमित पानी दिया जाएगा। लेकिन होली बीते कई महीने बीत चुके हैं, विभाग का वह वादा आज केवल एक “भद्दा मजाक” बनकर रह गया है।
आर्थिक बोझ और जनता की मजबूरी
वार्डवासियों के अनुसार, क्षेत्र में पहले से ही ‘एक दिन छोड़कर एक दिन’ पानी मिलने की समस्या थी, लेकिन पिछले 10 दिनों से सप्लाई पूरी तरह बंद कर विभाग ने लोगों के सब्र का बांध तोड़ दिया है। चिलचिलाती गर्मी में पानी न मिलने के कारण बुजुर्गों, महिलाओं और बच्चों को भारी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। मजबूर होकर लोग निजी टैंकर महंगे दामों पर मंगवाने को विवश हैं, जिससे आम आदमी की जेब पर अतिरिक्त आर्थिक बोझ पड़ रहा है।
प्रशासन को अंतिम चेतावनी: “अब कोरे आश्वासन नहीं, समाधान चाहिए”
मोहल्लावासियों ने स्पष्ट किया है कि अब वे खोखले वादों से थक चुके हैं। आक्रोशित निवासियों ने प्रशासन को आगाह करते हुए कहा है “क्या अधिकारी तब तक कुंभकर्णी नींद में सोते रहेंगे जब तक जनता का गुस्सा सड़कों पर नहीं उतर आता? यदि पानी की समस्या का स्थायी समाधान नहीं निकाला गया, तो मोहल्लावासी विभाग के दफ्तर का घेराव करेंगे। अब स्थिति बिगड़ती है तो इसकी पूरी जिम्मेदारी जन स्वास्थ्य विभाग और प्रशासन की होगी।”
क्षेत्रीय जनता की मांग है कि अविलंब पानी की नियमित सप्लाई बहाल की जाए, ताकि उन्हें राहत मिल सके। अब देखना यह होगा कि प्रशासन इस चेतावनी के बाद हरकत में आता है या जनता को मजबूरन सड़कों पर उतरना पड़ेगा।


