CJP-Police Clash Delhi: जंतर-मंतर पर अभिजीत दीपके और पुलिस में तीखी बहस, नीट विरोध प्रदर्शन में बढ़ा तनाव
दिल्ली के जंतर-मंतर पर कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) के प्रदर्शन को लेकर तनाव अब भी जारी है। 20 और 21 जुलाई को NEET और दूसरी परीक्षाओं में पेपर लीक जैसी अनियमितताओं के खिलाफ छात्रों और युवाओं का आंदोलन काफी उग्र हो गया। पुलिस और प्रदर्शनकारियों के बीच झड़प हुई, लाठीचार्ज हुआ और आंसू गैस भी छोड़ी गई। सैकड़ों युवा घायल हुए। अब 22 जुलाई को CJP प्रमुख अभिजीत दीपके और पुलिस के बीच हुई तीखी बहस की खबर भी सामने आई है।
नई दिल्ली /21 जुलाई 2026 /अटल हिन्द /राजकुमार अग्रवाल
अभिजीत दीपके और पुलिस अधिकारी के बीच तीखी झड़प
नीट (NEET) और अन्य राष्ट्रीय परीक्षाओं में कथित धांधली के विरोध में दिल्ली का जंतर-मंतर लगातार दूसरे दिन भी भारी हंगामे और गहमागहमी का गवाह बना। 20 जुलाई को ‘संसद मार्च’ के दौरान हुए लाठीचार्ज और आंसू गैस के इस्तेमाल के बाद 21 जुलाई को भी छात्रों और पुलिस बल के बीच तीखी बहस और कहासुनी देखने को मिली।
21 जुलाई के प्रदर्शन के दौरान का एक वीडियो सामने आया है, जिसमें कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) के संस्थापक अभिजीत दीपके लाउडस्पीकर (माइक) से सीधे दिल्ली पुलिस के अधिकारियों से सवाल पूछते नजर आ रहे हैं।
वीडियो में अभिजीत दीपके एक वाहन (गाड़ी) के ऊपर बैठकर नीचे खड़ी दिल्ली पुलिस की टीम से सवाल करते हैं:
अभिजीत दीपके: “पब्लिक बैरिकेड खोलिए सर… आपने सर इतनी लड़कियों को मारा? मैंने आपको देखा है, आपने लड़की के ऊपर डंडा चलाया है… सर, आप बैरिकेड खोल दीजिए, प्लीज रिक्वेस्ट है।”
इसके जवाब में मौके पर मौजूद दिल्ली पुलिस के अधिकारी संदीप लांबा (Sandeep Lamba) अपना पक्ष रखते हुए और भीड़ को शांत करने की कोशिश करते हुए कहते हैं:
पुलिस अधिकारी (संदीप लांबा): “माइक दीजिए, सबके सामने बात कहिए… आप नीचे आ जाइए।”
जब अधिकारी माइक मांगते हैं, तो अभिजीत दीपके उन्हें माइक देने से मना करते हुए कहते हैं:
अभिजीत दीपके: “आप कहिए सर, मुझे सुनाई दे रहा है… जैसे आप डंडा चला रहे थे, वैसे ही बोलिए। बैरिकेड खोल दीजिए सर।”
इसके बाद अभिजीत दीपके भीड़ के साथ मिलकर नारे लगाने लगते हैं: “पुलिस गुंडा… पुलिस की गुंडागर्दी नहीं चलेगी!” और कहते हैं कि “हम गांधी जी को मानने वाले लोग हैं, शांति से प्रदर्शन कर रहे हैं, आप इस तरह से कार्रवाई नहीं कर सकते।”
दिल्ली में CJP छात्र आंदोलन-लोकतंत्र, नागरिक अधिकार और सुरक्षा बलों की भूमिका पर उठते सवाल
अभिजीत ने मांगी माफी
अभिजीत दीपके ने अपने समर्थकों से माफी भी मांगी। उन्होंने कहा, “मैं सभी समर्थकों से, खासकर उन लड़कियों से माफी मांगता हूं जिन पर पुरुष पुलिसवालों ने अत्याचार किया। हम आपको बेहतर तरीके से बचा सकते थे। मैं बेहतर कर सकता था।” उन्होंने आरोप लगाया कि एक मंत्री को बचाने के लिए सरकार युवाओं का खून बहाने को तैयार है।
20 और 21 जुलाई की घटनाओं का घटनाक्रम
20 जुलाई (‘संसद मार्च’ में लाठीचार्ज): CJP के आह्वान पर छात्रों ने संसद की ओर बढ़ने का प्रयास किया। रास्ते में पुलिस बैरिकेड्स पर पुलिस और प्रदर्शनकारियों के बीच धक्का-मुक्की और पथराव हुआ। पुलिस ने भीड़ को नियंत्रित करने के लिए लाठीचार्ज किया और आंसू गैस छोड़ी। पुलिस का दावा है कि इस हिंसा में पुलिसकर्मी घायल हुए और कई सरकारी गाड़ियों को नुकसान पहुँचा। वहीं छात्रों का आरोप है कि पुलिस ने बर्बरतापूर्वक लाठीचार्ज किया जिसमें 200 छात्र-छात्राएं घायल हुईं।
21 जुलाई (जंतर-मंतर पर दोबारा जुटना): सुबह पुलिस द्वारा मंच और लाउडस्पीकर हटाए जाने के बावजूद दोपहर तक हजारों छात्र पुनः जंतर-मंतर पर एकत्रित हो गए। आयोजकों ने स्वयंसेवकों के जरिए सुरक्षा और पहचान पत्र (ID) जांच की व्यवस्था की, ताकि अराजक तत्वों से बचा जा सके।
प्रदर्शनकारियों की आपबीती और प्रत्यक्षदर्शियों के बयान
प्रदर्शन स्थल पर देश के अलग-अलग हिस्सों से आए युवाओं और कार्यकर्ताओं ने पुलिस कार्रवाई पर अपनी आपबीती साझा की:
अश्विनी भिवबड़े (सामाजिक कार्यकर्ता, महाराष्ट्र): “कल जब हम शांतिपूर्ण मार्च में शामिल थे, तभी अचानक पुलिस ने लाठीचार्ज कर दिया। मेरे पति दिलीप भिवगड़े को गंभीर चोटें आईं। सरकार का यह रवैया औपनिवेशिक मानसिकता जैसा है।”
क्रांति नाम की एक महिला ने कहा, “हमारे साथ छोटे बच्चे भी थे। पुलिस ने अचानक लाठियां चलानी शुरू कर दीं। धक्का-मुक्की में बच्चे गिर पड़े।” जयकांत ने कहा, “सरकार ने छात्रों पर लाठीचार्ज कराया और आंसू गैस छोड़ी। छात्र सिर्फ पेपर लीक के बदले शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान का इस्तीफा मांग रहे हैं। अगर यह नहीं हुआ तो प्रदर्शन जारी रहेगा।”
जयकांत (छात्र, महाराष्ट्र): “लाखों छात्रों का भविष्य दांव पर है। हमारी एक ही मांग है कि पेपर लीक की नैतिक जिम्मेदारी लेते हुए शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान इस्तीफा दें। जब तक ऐसा नहीं होता, प्रदर्शन जारी रहेगा।”
विरोध का अनोखा तरीका
मंगलवार को कुछ प्रदर्शनकारियों ने अहिंसक विरोध जताते हुए तैनात पुलिसकर्मियों को गुलाब के फूल भेंट किए और कहा— “सर, कल की लाठियों के बदले आज यह फूल स्वीकार कीजिए।”
विपक्षी दलों की प्रतिक्रिया और राजनीतिक घमासान
इस मामले ने अब बड़ा राजनीतिक रूप ले लिया है:
राहुल गांधी और प्रियंका गांधी: कांग्रेस नेताओं ने अन्य विपक्षी सहयोगियों (समाजवादी पार्टी आदि) के साथ मिलकर प्रधानमंत्री आवास के पास प्रदर्शन किया। पुलिस ने उन्हें हिरासत में लिया और बाद में रिहा कर दिया। राहुल गांधी ने आरोप लगाया कि शिक्षा प्रणाली पूरी तरह से भ्रष्टाचार की शिकार हो चुकी है और सरकार युवाओं की आवाज दबाने के लिए पुलिस का सहारा ले रही है।
संसद में हंगामा: संसद के मानसून सत्र में भी नीट परीक्षा में अनियमितता और छात्रों पर हुए लाठीचार्ज को लेकर दोनों सदनों में विपक्षी सांसदों ने जोरदार नारेबाजी और हंगामा किया।
स्थानीय नेताओं का समर्थन: उत्तराखंड कांग्रेस के वरिष्ठ नेता हरक सिंह रावत और दिल्ली प्रभारी काजी निजामुद्दीन ने जंतर-मंतर पहुंचकर छात्रों की मांगों का समर्थन किया।

