इसरो (ISRO) में आजकल बहुत बड़ी हलचल मची हुई है।
खबर आई है कि पिछले कुछ महीनों में बहुत सारे वैज्ञानिकों ने अपनी नौकरी से इस्तीफा दे दिया है।
करीब 100 से 120 वैज्ञानिकों ने नौकरी छोड़ दी है, जिससे सरकार काफी परेशान है।
सरकार को सबसे ज्यादा चिंता ‘गगनयान मिशन’ की है, जो भारत का बहुत बड़ा प्रोजेक्ट है।
सरकार चाहती है कि गगनयान मिशन किसी भी हालत में लेट न हो।
इसीलिए सरकार ने एक नया और बहुत सख्त नियम बना दिया है।
अब गगनयान और दूसरे बड़े प्रोजेक्ट्स से जुड़े वैज्ञानिक आसानी से नौकरी नहीं छोड़ पाएंगे।
जो वैज्ञानिक समय से पहले रिटायर होना चाहते हैं (वीआरएस), उन्हें भी अभी मंजूरी नहीं मिलेगी।
पहले इन वैज्ञानिकों के इस्तीफे इसरो के लोकल सेंटर्स के डायरेक्टर खुद ही मंजूर कर देते थे।
लेकिन अब यह फैसला सीधे दिल्ली में बैठे अंतरिक्ष विभाग (DoS) के बड़े अधिकारी करेंगे।
अब सवाल उठता है कि आखिर ये वैज्ञानिक इसरो क्यों छोड़ रहे हैं?
पहली बड़ी वजह है कि देश में अब बहुत सारी प्राइवेट स्पेस कंपनियां आ गई हैं।
ये प्राइवेट कंपनियां इसरो के अनुभवी वैज्ञानिकों को बहुत अच्छी सैलरी और बड़ा पद दे रही हैं।
दूसरी वजह यह बताई जा रही है कि इसरो में काम का बहुत ज्यादा दबाव और तनाव है।
कुछ लोग यह भी कह रहे हैं कि वहां की सरकारी कार्यशैली और फाइलों के चक्कर से नए वैज्ञानिक परेशान हैं।
इस पूरे मामले पर अब राजनीति भी शुरू हो गई है।
विपक्ष के नेताओं का कहना है कि सरकार को जबरदस्ती रोकने के बजाय वैज्ञानिकों की परेशानियां दूर करनी चाहिए।
वहीं, सरकारी मंत्रियों का कहना है कि यह केवल एक प्रशासनिक फैसला है और घबराने की कोई बात नहीं है।
इसरो के बड़े अधिकारियों ने भी भरोसा दिलाया है कि किसी के जाने से हमारा काम नहीं रुकेगा और हमारे पास पूरा बैकअप प्लान तैयार है।
इसरो में ‘इस्तीफों की झड़ी’ से हड़कंप: गगनयान पर संकट टालने को सरकार सख्त, इस्तीफे और VRS पर लगी रोक
नई दिल्ली / 16 जुलाई 2026 / अटल हिन्द डेस्क:
भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (ISRO) में पिछले कुछ महीनों से वैज्ञानिकों और तकनीकी विशेषज्ञों द्वारा लगातार दिए जा रहे इस्तीफों ने केंद्र सरकार और अंतरिक्ष विभाग (DoS) की चिंताएं बढ़ा दी हैं। देश के सबसे महत्वाकांक्षी ‘गगनयान मिशन’ सहित कई अन्य राष्ट्रीय महत्व की परियोजनाओं को समय पर पूरा करने के लिए सरकार ने अब बेहद सख्त कदम उठाए हैं।
डिपार्टमेंट ऑफ स्पेस ने एक आंतरिक ज्ञापन (इंटरनल मेमोरेंडम) जारी कर गगनयान और अन्य महत्वपूर्ण मिशनों से जुड़े ‘ग्रुप ए’ के वैज्ञानिकों के इस्तीफे और स्वैच्छिक सेवानिवृत्ति (VRS) के नियमों को कड़ा कर दिया है। नए नियमों के मुताबिक, केंद्रों के निदेशक अब सामान्य परिस्थितियों में इन आवेदनों को स्वीकार नहीं कर सकेंगे। अंतिम मंजूरी का अधिकार अब प्रभावी रूप से अंतरिक्ष विभाग (DoS) के मुख्यालय के पास होगा। यह फैसला साल 2020 में केंद्र निदेशकों को दिए गए अधिकारों को पलटता है।
क्यों पड़ी इस सख्त कदम की जरूरत?
‘टाइम्स ऑफ इंडिया’ की एक रिपोर्ट और सूत्रों के अनुसार, पिछले कुछ महीनों में करीब 100 से 120 वैज्ञानिक और तकनीकी कर्मचारी इसरो छोड़ चुके हैं।
प्रमुख केंद्र प्रभावित: अकेले बेंगलुरु स्थित यूआर राव सैटेलाइट सेंटर (URSC) से लगभग 80 और तिरुवनंतपुरम के विक्रम साराभाई स्पेस सेंटर (VSSC) से करीब 20 कर्मचारियों ने इस्तीफा दिया है।
दिग्गज वैज्ञानिकों का पलायन: नौकरी छोड़ने वालों में एलवीएम-3 (LVM-3) प्रोजेक्ट डायरेक्टर विक्टर जोसेफ, SpaDeX मिशन के प्रोजेक्ट डायरेक्टर और चंद्रयान-3 की सफल लैंडिंग के लिए 25 टेराबाइट डेटा तैयार करने वाले युवा वैज्ञानिक आदित्य रल्लापल्ली जैसे नाम शामिल हैं।
भले ही इसरो के 14,600 से अधिक कर्मचारियों की तुलना में यह संख्या कम दिखे, लेकिन रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण पदों पर बैठे अनुभवी लोगों के जाने से परियोजनाओं के समयबद्ध क्रियान्वयन पर प्रतिकूल असर पड़ रहा था।
निजी स्टार्टअप्स का आकर्षण और अंदरूनी तनाव बड़ी वजह
विशेषज्ञों और रिपोर्टों के अनुसार, वैज्ञानिकों के इसरो छोड़ने के पीछे तीन मुख्य कारण सामने आ रहे हैं:
प्राइवेट स्पेस सेक्टर का बूम: साल 2020 में अंतरिक्ष क्षेत्र को निजी कंपनियों के लिए खोलने और 2023 की अंतरिक्ष नीति के बाद भारत में 400 से ज्यादा पंजीकृत स्पेस स्टार्टअप्स आ चुके हैं। स्काईरूट, अग्निकुल कॉसमॉस और पिक्सेल जैसी कंपनियां भारी-भरकम वेतन और नेतृत्व के अवसरों के साथ इसरो के दिग्गजों को आकर्षित कर रही हैं। खुद इसरो के पूर्व चेयरमैन एस. सोमनाथ हाल ही में ‘अग्निकुल कॉसमॉस’ के बोर्ड में ऑब्जर्वर के रूप में शामिल हुए हैं।
काम का अत्यधिक दबाव: कई वैज्ञानिकों ने कार्यस्थल पर अत्यधिक तनाव और वर्क प्रेशर को इस्तीफे की वजह बताया है।
प्रशासनिक और संगठनात्मक संस्कृति: सोशल मीडिया और अंदरूनी हलकों में यह चर्चा भी तेज है कि अपर्याप्त फंडिंग, लालफीताशाही और वरिष्ठों की अत्यधिक पदानुक्रमित (Hierarchical) कार्य संस्कृति के कारण प्रतिभाशाली युवाओं का मनोबल गिर रहा है।
मामले पर राजनीतिक घमासान और सरकार का पक्ष
इस मुद्दे पर विपक्ष ने भी सरकार को घेरा है। कांग्रेस नेता अभिषेक मनु सिंघवी ने सोशल मीडिया पर लिखा:
“आप द्वार बंद कर सकते हैं, लेकिन प्रतिभा को कैद नहीं कर सकते। यदि वैज्ञानिक अभूतपूर्व संख्या में इसरो छोड़ रहे हैं, तो सरकार को इसके कारणों का पता लगाना चाहिए, न कि केवल छोड़ने की प्रक्रिया को कठिन बनाना चाहिए। गिरते मनोबल से भारत की अंतरिक्ष यात्रा को गति नहीं मिल सकती।”
दूसरी तरफ, विज्ञान और प्रौद्योगिकी राज्य मंत्री जिंतेंद्र सिंह ने इन चर्चाओं को खारिज करते हुए कहा कि यह कदम पूरी तरह प्रशासनिक है और इसे किसी विवाद से नहीं जोड़ा जाना चाहिए। उन्होंने कहा:
“इसरो में लोग आते-जाते रहते हैं। इस निर्देश का मकसद सिर्फ यह सुनिश्चित करना है कि फैसले अधिक परिपक्व स्तर पर लिए जाएं। इसरो संस्थागत निरंतरता के साथ काम करता है, इसलिए पूर्व चेयरमैन एस. सोमनाथ के जाने से गगनयान मिशन पर कोई असर नहीं पड़ेगा।”
वहीं, इसरो प्रमुख वी. नारायणन ने भी भरोसा दिलाया है कि संगठन इस स्थिति से निपटने के लिए पूरी तरह तैयार है। अगर कोई जाता भी है, तो उसकी जिम्मेदारी संभालने के लिए बैकअप प्लान तैयार है ताकि राष्ट्रीय महत्व के प्रोजेक्ट्स में कोई रुकावट न आए।

