20 जुलाई 2026 — आज जंतर-मंतर पर जो कुछ हुआ, वो किसी फिल्मी सीन से कम नहीं था, लेकिन ये सच्चाई थी। मोदी सरकार के राज में छात्रों और युवाओं पर लाठियां बरसाई गईं, आंसू गैस के गोले दागे गए। पहले किसानों को कुचला, अब अपने बच्चों पर ही डंडे बरसा रही है ये सरकार
कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) के संसद मार्च के दौरान हजारों छात्र जंतर-मंतर से संसद की तरफ बढ़े। शांतिपूर्ण प्रदर्शन था, मांग सिर्फ इतनी थी कि NEET घोटाले की जिम्मेदारी लो, शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान इस्तीफा दें, और जिन बच्चों ने पेपर लीक के गम में आत्महत्या की, उनके परिवार को मुआवजा मिले। लेकिन सरकार ने जवाब दिया — लाठियां, आंसू गैस और बर्बरता।

नई दिल्ली /20 जुलाई 2026 /अटल हिन्द /राजकुमार अग्रवाल
सवाल ये है — आखिर मोदी सरकार चाहती क्या है? शिक्षा व्यवस्था चरमरा रही है, पेपर लीक हो रहे हैं, बच्चे आत्महत्या कर रहे हैं, लेकिन मंत्री पर कोई असर नहीं। युवा सड़क पर उतरे तो लाठियां। किसान आंदोलन याद है? अब छात्र।
हार गया भारत ,
भारत में 20 जुलाई का दिन इतिहास में काले दिन के नाम से दर्ज किया जाएगा क्योंकि इस दिन बीजेपी ,आरएसएस,भातरीय सेना,और पुलिस चारों ने मिलकर निर्दोष छात्र -छात्राओं पर लाठियां बरसाई ,गोलिया चलवाई।
इस दौरान वहां तैनात बीजेपी की पुलिस और सेना कितने छात्र -छात्राओं को मारती मरना तो वैसे भी है कभी पुलिस की लाठियों से जैसे आज 20 जुलाई को बीजेपी और आरएसएस के गुंडों ने पुलिस और सेना की वर्दी पहन के मारा है।
हर बार हर रोज मरने से तो अच्छा था एक बार नेपाली युवा बन जाते। अगर भारत में आज 20 जुलाई 2026 को यह सब हो जाता तो भविष्य में भारत में आने वाली की भी पार्टी की सरकार बीजेपी और आरएसएस की तरह जनता का उत्पीड़न करने से पहले सौ बार सोचती।
अब यह दिन शायद ही कभी दोबारा मिलेगा छात्र -छात्राओं को क्योंकि नरेंद्र मोदी जिसने गोदरा काण्ड करवाया वहां लोगो को मरवा कर गुजरात के मुख्यमंत्री बने अमित शाह में उनका पूरा साथ दिया था और वही सब कुछ आज 20 जुलाई 2026 को दिल्ली में दोहराया गया।

भारत में 2014 के बाद जो आंतक बीजेपी और आरएसएस ने मचाया है ऐसा भारत के इतिहास में पहले कभी नहीं देखा गया इंदिरा गाँधी के आपातकाल में भी नहीं देखा गया था। भारत के इतिहास में बीजेपी और आरएसएस जिसने भारतीयों को देश द्रोही तक बना दिया कूद नरेंद्र मोदी जनता के सामने आने से डरते है शायद उनके अपने ही उस भाषण की याद आ जाती होगी जिसमे उसने कहा था अगर मेरे से कोई गलती हो जाए या मेरा कोई गलत इरादा निकल जाये तो जनता मुझे चौराहे पर फांसी दे दे।
नई दिल्ली जंतर-मंतर पर CJP और छात्रों का संसद मार्च, पुलिस लाठीचार्ज के बीच कई घायल; जानें पूरा घटनाक्रम
राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली के जंतर-मंतर पर सोमवार को नीट (NEET) परीक्षा में अनियमितताओं, पेपर लीक और लद्दाख के पर्यावरण कार्यकर्ता सोनम वांगचुक की रिहाई की मांग को लेकर कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) और ऑल इंडिया स्टूडेंट्स एसोसिएशन (AISA) के बैनर तले विशाल प्रदर्शन हुआ। जंतर-मंतर से संसद भवन की ओर निकलने वाले ‘संसद चलो’ मार्च के दौरान पुलिस और प्रदर्शनकारियों के बीच गंभीर टकराव की स्थिति उत्पन्न हो गई, जिसमें लाठीचार्ज और आंसू गैस के गोले छोड़े जाने से कई छात्र और प्रदर्शनकारी घायल हो गए।

घटनाक्रम: कब, कहाँ और कैसे क्या हुआ?
सुबह 06:00 बजे: सीजेपी प्रतिनिधिमंडल और दिल्ली पुलिस प्रशासन के बीच मार्च और संवाद को लेकर बातचीत की प्रक्रिया शुरू हुई।
सुबह 09:00 – 10:00 बजे: जंतर-मंतर, कनॉट प्लेस और जनपथ के आसपास करीब 50,000 की संख्या में छात्र और नागरिक एकत्र हुए। दिल्ली पुलिस ने स्थिति को देखते हुए भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता (BNSS) की धारा 163 के तहत निषेधाज्ञा लागू कर दी और सुरक्षा की दृष्टि से नजदीकी मेट्रो स्टेशनों के द्वार बंद कर दिए।
सुबह 10:43 बजे: दिल्ली पुलिस ने सोशल मीडिया पर स्पष्टीकरण जारी करते हुए कहा कि जंतर-मंतर पर हिंसा या लोगों को अवैध रूप से हिरासत में लिए जाने की खबरें भ्रामक हैं और प्रदर्शन को पेशेवर तरीके से नियंत्रित किया जा रहा है।
सुबह 11:00 – 11:45 बजे: प्रदर्शनकारियों ने बैरिकेड्स तोड़कर संसद मार्ग की ओर बढ़ने का प्रयास किया। सुरक्षा बलों द्वारा प्रदर्शनकारियों को रोकने के लिए लाठीचार्ज किया गया और आंसू गैस के गोले दागे गए। एहतियातन संसद के मुख्य द्वारों को बंद कर दिया गया।
दोपहर 12:00 बजे: सीजेपी के प्रतिनिधि सौरव दास और आशुतोष रांका भाजपा अध्यक्ष एवं केंद्रीय मंत्री जे.पी. नड्डा से मुलाकात करने उनके आवास पहुंचे।
दोपहर 01:00 बजे के बाद: जंतर-मंतर, जनपथ और पीटीआई भवन के बाहर पुलिस और प्रदर्शनकारियों के बीच धक्का-मुक्की और झड़पें जारी रहीं।

अंतरराष्ट्रीय मीडिया जैसे अल जजीरा ने भी कवर किया। पूरी दुनिया देख रही है कि भारत में छात्रों की आवाज को कैसे कुचला जा रहा है।
CJP प्रमुख अभिजीत दीपके और प्रवक्ताओं के बयान
कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) के संस्थापक अभिजीत दीपके ने संसद मार्च के दौरान पुलिस प्रशासन पर गंभीर आरोप लगाते हुए कहा:
“प्रदर्शन के दौरान हमारे ट्रक के साथ तोड़फोड़ की गई और शांतिपूर्ण प्रदर्शन कर रहे युवाओं पर पुलिस द्वारा बर्बरता की गई। यह आंदोलन किसी राजनीतिक स्वार्थ के लिए नहीं, बल्कि देश के युवाओं के भविष्य को बचाने के लिए है।”
अभिजीत दीपके ने ढाई दिन के अनशन के बाद सोनम वांगचुक की पत्नी गीतांजलि जे. अंगमो के हाथों पानी पीकर अपना अनशन समाप्त किया, लेकिन आंदोलन जारी रखने की बात कही।
वहीं, CJP प्रवक्ता सौरव दास और आशुतोष रांका ने केंद्रीय मंत्री जे.पी. नड्डा से मुलाकात के बाद बताया कि सरकार के सामने तीन मुख्य मांगें रखी गई हैं:

लद्दाख के पर्यावरण कार्यकर्ता सोनम वांगचुक की तत्काल रिहाई।
नीट धांधली की नैतिक जिम्मेदारी लेते हुए केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान का इस्तीफा।
नीट विवाद और परीक्षा तनाव के कारण जान गंवाने वाले अभ्यर्थियों के परिजनों को 1-1 करोड़ रुपये का मुआवजा।
सोनम वांगचुक का बयान: सोनम वांगचुक ने एक्स (X) पर पत्र साझा कर कहा कि जब तक सांसदों का प्रतिनिधिमंडल सीजेपी नेताओं से वार्ता नहीं करता, उनका अनिश्चितकालीन अनशन जारी रहेगा।
प्रदर्शन में शामिल छात्रों और आम लोगों की आपबीती
प्रदर्शन के दौरान घायल हुए और मौके पर मौजूद छात्रों व समर्थकों ने पुलिस कार्रवाई पर अपनी पीड़ा व्यक्त की:
कानपुर से आए CJP समर्थक: “मैं कानपुर से CJP के समर्थन में आया था। अगर सोनम वांगचुक को न उठाया गया होता तो मैं क्यों आता? मेरा बैग फाड़ दिया गया, मुझे मारा गया। दो दिन से खाया-पिया नहीं हूँ। एक भाई ने मुझे बचाया, वरना मेरा गला दबाया जा रहा था।”
रोहित कुमार (मेरठ से आए छात्र): “हम अपने हक की लड़ाई लड़ने और सोई हुई सरकार को जगाने आए थे। दिल्ली पुलिस के लाठी-डंडों से मेरा पैर तोड़ दिया गया।”
एक भावुक छात्र का पुलिस से सवाल: “अगर आपकी जगह आपका बच्चा यहाँ होता तो आप क्या करते? क्या हम आपके बच्चे नहीं हैं?”
16 वर्षीय छात्राएं: “हम पढ़ाई और स्कूल छोड़कर इसलिए आए हैं क्योंकि आज नहीं बोले तो कल हमारे भविष्य की सुरक्षा का कोई मुद्दा नहीं बचेगा।”
एक रोती हुई महिला प्रदर्शनकारी: “कई पुलिसकर्मी सिविल ड्रेस में थे। उन्होंने अभद्र भाषा का प्रयोग किया और अमानवीय व्यवहार करते हुए प्रदर्शनकारियों को खदेड़ा।”

| विषय | प्रदर्शनकारियों एवं चश्मदीदों के दावे | प्रशासन एवं दिल्ली पुलिस का रुख |
| हताहत व चोटें | CJP का दावा है कि 40 से 50 से अधिक प्रदर्शनकारियों के सिर फूटे हैं, जिनमें एक 12 वर्षीय बच्ची भी शामिल है। | पुलिस के अनुसार बल प्रयोग न्यूनतम और स्थिति के अनुसार कानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए था। |
| सादे कपड़ों में जवान | आरोप है कि सादे कपड़ों और बिना नाम-पट्टिका वाली वर्दी में लोगों ने मारपीट की। | पुलिस ने सभी आरोपों को खारिज करते हुए अफवाहों से बचने की सलाह दी। |
| बैरिकेड्स और सुरक्षा | बैरिकेड्स में बिजली का करंट छोड़े जाने का आरोप। | इस संबंध में पुलिस की ओर से कोई आधिकारिक पुष्टि नहीं की गई। |
प्रमुख राजनीतिक नेताओं की प्रतिक्रियाएं
घटनाक्रम के बाद देश के विभिन्न राजनीतिक दलों के नेताओं ने अपने बयान जारी किए:
राहुल गांधी (नेता प्रतिपक्ष, लोकसभा): “152 पेपर लीक और 7.5 करोड़ छात्र पीड़ित हैं, लेकिन किसी दोषी को सजा नहीं मिली। जब बच्चों ने शिक्षा के वाजिब सवाल उठाए, तो जवाब में लाठियां और हिरासत मिली।”
प्रियंका गांधी वाड्रा (राष्ट्रीय महासचिव, कांग्रेस): “यह बेहद दुखद है कि सरकार इस विषय पर संसद में चर्चा करने को तैयार नहीं है। अपने हक की बात कर रहे मासूम बच्चों पर लाठियां बरसाई जा रही हैं।”
मल्लिकार्जुन खरगे (अध्यक्ष, कांग्रेस): “यह सरकार नौजवानों और छात्रों पर लाठीचार्ज कर रही है। अगर आपसे परीक्षाएं आयोजित नहीं कराई जातीं, तो सत्ता छोड़िए।”
अखिलेश यादव (अध्यक्ष, सपा): “सरकार ने यह नहीं सोचा था कि इतनी बड़ी संख्या में युवा सड़कों पर उतरेंगे। सादे कपड़ों में पुलिस का रवैया और लाठीचार्ज सरकार की विफलता को दर्शाता है।”
अरविंद केजरीवाल (संयोजक, AAP): “पूरा जंतर-मंतर और आसपास का इलाका लोगों से भरा है। इंटरनेट बंद करना और शांतिपूर्ण प्रदर्शनकारियों को संसद जाने से रोकना गलत है।”
दीपांकर भट्टाचार्य (भाकपा-माले): “असंवेदनशील शासन को सबसे मजबूत जवाब जनता का निडर मार्च ही हो सकता है।”
मनोज झा (सांसद, RJD): “ये बच्चे केवल संवाद चाहते थे, लेकिन सरकार अहंकार में डूबी हुई है।”

सरकारी व प्रशासनिक पक्ष और कानूनी स्थिति
दिल्ली पुलिस (अतिरिक्त पुलिस आयुक्त राजीव रंजन): दिल्ली पुलिस ने सभी प्रदर्शनकारियों से शांति बनाए रखने, संयम बरतने और किसी भी प्रकार की भ्रामक या अपुष्ट सूचना पर विश्वास न करने की अपील की है।
दिल्ली हाईकोर्ट में सुनवाई: जंतर-मंतर पर पुलिस द्वारा की जा रही वीडियोग्राफी और ड्रोन निगरानी को लेकर दायर याचिका पर सुनवाई करते हुए चीफ जस्टिस डी.के. उपाध्याय की बेंच ने केंद्र सरकार और दिल्ली पुलिस से जवाब मांगा है। सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने अदालत को आश्वस्त किया कि वीडियोग्राफी का उद्देश्य केवल कानून-व्यवस्था बनाए रखना है, किसी की निजता का हनन करना नहीं। मामले की अगली सुनवाई 21 जुलाई को तय की गई है।

