मुख्य सचिव वी. श्रीनिवास ने राज्य में किये गए डी-रेगुलेशन सुधारों के संबंध में जर्मनी की प्रोफेसर डॉ. सबाइन कुहलमैन के साथ चर्चा की
डी-रेगुलेशन सुधारों से निवेश, व्यापार सुगमता और सुशासन को मिली नई गति : मुख्य सचिव
प्रो. सबाइन ने राजस्थान के सुशासन एवं निवेश-अनुकूल प्रयासों की सराहना की
जयपुर /16 जुलाई 2026 /अटल हिन्द ब्यूरो /दिनेश जांगिड़
मुख्य सचिव वी. श्रीनिवास ने गुरूवार को शासन सचिवालय से वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से जर्मनी के पॉट्सडैम विश्वविद्यालय में राजनीति विज्ञान, प्रशासन एवं संगठन विभाग की प्रोफेसर डॉ. सबाइन कुहलमैन को राजस्थान में डी-रेगुलेशन एण्ड कम्प्लायंस रिडक्शन के संबंध में किये गए प्रयास, नवाचार और सफलता की जानकारी दी, राज्य के डी रेग्यूलेशन, संरचना एवं अन्य जानकारियों के बारे में चर्चा की।
चर्चा में “इम्पैक्ट असेसमेंट स्टडी : कम्प्लायंस रिडक्शन एंड डी-रेगुलेशन (प्रथम चरण)” की मासिक प्रगति प्रतिवेदन पर विस्तृत चर्चा की गई। राज्य सरकार के ‘राजनिवेश पोर्टल’ की कार्यप्रणाली एवं उपलब्धियों की विस्तार से जानकारी दी। मुख्य सचिव ने बताया कि यह पोर्टल राज्य में उद्योगों एवं निवेशकों को विभिन्न विभागों की अनुमतियां, स्वीकृतियां एवं सेवाएं एक ही डिजिटल मंच पर उपलब्ध कराकर निवेश प्रक्रिया को सरल, पारदर्शी एवं समयबद्ध बना रहा है।
मुख्य सचिव ने कहा कि डी-रेगुलेशन प्रकोष्ठ का मुख्य उद्देश्य राज्य में व्यापार सुगमता (Ease of Doing Business) को बढ़ावा देना तथा उद्योगों एवं नागरिकों पर अनावश्यक प्रशासनिक अनुपालन का बोझ कम करना है। इसके तहत विभिन्न विभागों के कानूनों, लाइसेंसों, अनुमतियों तथा अनापत्ति प्रमाण-पत्रों की समीक्षा कर प्रक्रियाओं को सरल, पारदर्शी, समयबद्ध एवं निवेश-अनुकूल बनाया जा रहा है। उन्होंने उद्योग, राजस्व, नगरीय विकास एवं आवासन (यूडीएच), श्रम सहित विभिन्न विभागों को नियामकीय सुधारों के बारे में भी चर्चा की।
मुख्य सचिव ने कहा कि प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में केंद्र सरकार द्वारा श्रम कानूनों को सरल एवं प्रभावी बनाने के लिए चार श्रम संहिताओं को लागू किया गया है। इन संहिताओं से श्रमिकों को बेहतर वेतन, सामाजिक सुरक्षा एवं कल्याण सुनिश्चित हुआ है। उन्होंने श्रम सुधारों का उल्लेख करते हुए कहा कि अब महिलाओं को उनकी सहमति के आधार पर रात्रि पाली (नाइट शिफ्ट) में कार्य करने की अनुमति है, बशर्ते नियोक्ता सुरक्षित परिवहन, सुरक्षित कार्यस्थल एवं आवश्यक सुविधाएं उपलब्ध कराए। उन्होंने कहा कि केंद्र सरकार द्वारा डी-रेगुलेशन की दिशा में किए गए व्यापक सुधार प्रशासनिक एवं आर्थिक व्यवस्था में ऐतिहासिक परिवर्तन का आधार बने हैं तथा इन सुधारों की नियमित मॉनिटरिंग की जाती हैं।
बैठक को वीसी के माध्यम से संबोधित करते हुए डॉ. सबीन कुहलमन ने भारत की लोकतांत्रिक व्यवस्था एवं प्रशासनिक प्रणाली की सराहना की। उन्होंने जर्मनी में प्रशासनिक नीति-निर्माण, प्रशासनिक परामर्श तथा लोक प्रशासन के क्षेत्र में किये जा रहे नवाचारों के संबंध में अनुभव साझा किए।
उन्होंने जर्मनी में प्रशासनिक व्यवस्था, तुलनात्मक लोक प्रशासन, प्रशासनिक आधुनिकीकरण एवं सार्वजनिक क्षेत्र सुधार, बेहतर विनियमन एवं नौकरशाही में कमी, प्रशासन के डिजिटलीकरण, प्रशासन एवं संकट प्रबंधन तथा तुलनात्मक स्थानीय शासन अनुसंधान जैसे विषयों पर विस्तार से विचार रखे। उन्होंने प्रशासनिक सुधारों के क्षेत्र में भारत और जर्मनी के बीच ज्ञान एवं अनुभवों के आदान-प्रदान को उपयोगी बताते हुए नियामकीय सुधारों को सुशासन एवं आर्थिक विकास का महत्वपूर्ण आधार बताया।
प्रस्तुत मासिक प्रगति प्रतिवेदन में बताया गया कि भूमि, श्रम, उपयोगिताओं, अनुमोदन एवं निरीक्षण से जुड़े 23 प्राथमिक सुधार लागू होने से अनुमोदन प्रक्रियाएं तेज हुई हैं, अनुपालन का बोझ कम हुआ है तथा ईज ऑफ डूइंग बिजनेस को बढ़ावा मिला है। अप्रैल-जून 2026 के दौरान 30,017 आवेदन प्राप्त हुए, जिनमें से 17,201 स्वीकृत किए गए और स्वीकृति दर 57.30 प्रतिशत रही।
मुख्य सचिव ने राजनिवेश पोर्टल की उपलब्धियों की जानकारी देते हुए बताया कि पोर्टल के माध्यम से अनुमोदन प्रक्रिया अधिक तेज, पारदर्शी, विकेन्द्रीकृत एवं निवेशक-अनुकूल बनी है। पोर्टल पर सेवाओं की संख्या 181 से बढ़ाकर 190 की गई है तथा वर्ष 2025-26 में 34,704 आवेदन प्राप्त हुए। जून 2026 में आवेदन संख्या बढ़कर 10,908 तक पहुंच गई।
उन्होंने बताया कि जयपुर, जोधपुर, अजमेर, डीडवाना-कुचामन, कोटा एवं अलवर अनुमोदनों में अग्रणी रहे, जबकि सिरोही, डीडवाना-कुचामन सहित कई जिलों में उल्लेखनीय वृद्धि दर्ज की गई। जून 2026 में रूपए 1.03 लाख करोड़ से अधिक के निवेश (एमओयू) प्राप्त हुए तथा रियल एस्टेट, नवीकरणीय ऊर्जा, पर्यटन, वस्त्र, रत्न एवं आभूषण सहित विभिन्न क्षेत्रों में निवेश बढ़ा।
उद्योगों में सिंगल विंडो प्रणाली, कौशल प्रशिक्षण, जल संरक्षण, सौर ऊर्जा एवं सतत विकास उपायों को बढ़ावा दिया जा रहा है। साथ ही सुरक्षित रात्रि पाली, पिक-अप एवं ड्रॉप, क्रेच और अन्य सुविधाओं से उद्योगों में महिलाओं की भागीदारी 26 प्रतिशत से बढ़कर 32 प्रतिशत तक पहुंचना है। बैठक में नीमराना को निवेशक-अनुकूल औद्योगिक विकास का सफल मॉडल बताते हुए वहां जापानी उद्योगों के निवेश और बेहतर आधारभूत संरचना की भी सराहना की गई। इस अवसर पर श्रम विभाग के शासन सचिव श्री पीसी किशन, सीएस कार्यालय ओएसडी सुश्री गरिमा नरूला, सुश्री सीमा कुमार सहित अन्य मौजूद रहे।

