सोनम वांगचुक को अनशन से जबरन उठाने पर मानव आवाज संस्था ने जताई आपत्ति, एडवोकेट अभय जैन बोले- मोदी सरकार गंभीरता से ले मांगें
सोनम वांगचुक को जबरन उठाए जाने पर मानव आवाज संस्था ने कड़ी निंदा की
केंद्र, देश के युवाओं की मांग को देखते हुए शिक्षा व्यवस्था में करे सुधार
अनशन पर बैठे वांगचुक से सरकार के किसी प्रतिनिधि ने नहीं की मुलाकात
सोनम वांगचुक को जबरन भूख हड़ताल से उठाना न्यायसंगत नहीं
अनशन से जबरन उठाकर अस्पताल ले जाकर सरकार को मांगे भी माननी चाहिए
फतह सिंह उजाला
गुरुग्राम। नीट पेपर लीक मामले के विरोध में 20 दिन से जंतर-मंतर दिल्ली में भूख हड़ताल पर बैठे लद्दाख के सामाजिक कार्यकर्ता सोनम वांगचुक को जबरन उठाए जाने पर मानव आवाज संस्था ने कड़ी निंदा की है। संस्था के संस्थापक अभय जैन एडवोकेट ने कहा कि सरकार ने 20 दिन तक वांगचुक की सुध नहीं ली और अब जबरन हड़ताल तुड़वाना भी लोकतंत्र के खिलाफ है। अनशन से जबरन उठाकर अस्पताल ले गए हैं तो अब मोदी सरकार को वांगचुक की मांगे भी माननी चाहिए।
अभय जैन ने कहा कि सोनम वांगचुक पिछले 20 दिनों से नीट पेपर लीक और देश की शिक्षा व्यवस्था में सुधार की मांग को लेकर अनशन पर बैठे हैं। इस दौरान सरकार के किसी भी प्रतिनिधि ने उनसे मुलाकात तक नहीं की। उन्होंने कहा कि एक तरफ सरकार शिक्षा और युवाओं की बात करती है, दूसरी तरफ जब कोई व्यक्ति देश के लाखों छात्रों के भविष्य के लिए अपनी जान जोखिम में डालकर बैठा है तो उसकी मांग सुनने वाला कोई नहीं है। यह बेहद दुर्भाग्यपूर्ण है।
नीट पेपर लीक से लाखों छात्रों का भविष्य अंधकारमय
एडवोकेट अभय जैन के अनुसार, नीट पेपर लीक से लाखों छात्रों का भविष्य अंधकार में चला गया है। पेपर लीक करने वालों पर कठोर कार्रवाई और परीक्षा प्रणाली में पारदर्शिता लाने की मांग को लेकर वांगचुक ने यह अनशन शुरू किया था। मानव आवाज संस्था ने सोनम वांगचुक को स्वास्थ्य कारणों से जबरन भूख हड़ताल से उठाकर अस्पताल ले जाए जाने की भी आलोचना की।
सरकार अपनी ताकत का इस्तेमाल जायज मांगे मानने में करें
अभय जैन ने कहा कि अगर सरकार के पास इतनी शक्ति है कि वह किसी को जबरन अनशन से उठवा सकती है, तो उसी ताकत का इस्तेमाल उनकी जायज मांगों को मानने में क्यों नहीं करती।
जबरन उठाकर अस्पताल में भर्ती करना समाधान नहीं है। उन्होंने कहा कि अनशन लोकतांत्रिक विरोध का एक शांतिपूर्ण तरीका है। सरकार को बल प्रयोग के बजाय बातचीत के जरिए समस्या का हल निकालना चाहिए था। अभय जैन ने केंद्र सरकार से मांग की कि वह सोनम वांगचुक की मांगों को गंभीरता से ले और देश की शिक्षा व्यवस्था में तुरंत सुधार करे।
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