डॉ. एपीजे अब्दुल कलाम के जीवन से विद्यार्थियों को मिलती है मेहनत, अनुशासन और राष्ट्रसेवा की प्रेरणा : पवन गर्ग
संजय गांधी ओम प्रकाश गर्ग मेमोरियल पब्लिक स्कूल में पूर्व राष्ट्रपति डॉ. एपीजे अब्दुल कलाम की पुण्यतिथि पर दी श्रद्धांजलि
बाबैन/, 27 जुलाई 2026/सुरेश अरोड़ा
संजय गांधी ओम प्रकाश गर्ग मेमोरियल पब्लिक स्कूल में भारत के पूर्व राष्ट्रपति, महान वैज्ञानिक एवं ‘मिसाइल मैन’ के नाम से प्रसिद्ध डॉ. एपीजे अब्दुल कलाम की पुण्यतिथि के अवसर पर श्रद्धांजलि कार्यक्रम का आयोजन किया गया। इस दौरान स्कूल के स्टाफ सदस्यों ने डॉ. एपीजे अब्दुल कलाम के चित्र पर पुष्प अर्पित कर उन्हें भावपूर्ण श्रद्धांजलि दी और राष्ट्र निर्माण में उनके अमूल्य योगदान को याद किया।
इस अवसर पर स्कूल प्रबंधक समिति के प्रधान पवन गर्ग ने डॉ. एपीजे अब्दुल कलाम को श्रद्धांजलि अर्पित करते हुए कहा कि उनका पूरा जीवन देश के युवाओं और विद्यार्थियों के लिए प्रेरणास्रोत है। उन्होंने कहा कि डॉ. कलाम ने अपने जीवन में संघर्ष, मेहनत और लगन के बल पर देश के सर्वोच्च संवैधानिक पद तक पहुंचकर यह साबित किया कि यदि व्यक्ति के मन में कुछ बड़ा करने का संकल्प हो तो कोई भी लक्ष्य असंभव नहीं है। उन्होंने विद्यार्थियों से डॉ. एपीजे अब्दुल कलाम के आदर्शों को अपने जीवन में अपनाने का आह्वान किया।
डॉ. एपीजे अब्दुल कलाम का जन्म तमिलनाडु के रामेश्वरम में हुआ था। उन्होंने मद्रास इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी से एयरोनॉटिकल इंजीनियरिंग की शिक्षा प्राप्त की और इसके बाद देश के वैज्ञानिक एवं रक्षा क्षेत्र में महत्वपूर्ण योगदान दिया। उन्होंने रक्षा अनुसंधान एवं विकास संगठन (डीआरडीओ) तथा भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (इसरो) में कार्य किया। भारत के पहले स्वदेशी उपग्रह प्रक्षेपण यान एसएलवी-III के परियोजना निदेशक के रूप में उन्होंने महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।
इसके अलावा डॉ. एपीजे अब्दुल कलाम ने भारत के एकीकृत निर्देशित मिसाइल विकास कार्यक्रम में भी महत्वपूर्ण योगदान दिया, जिसके तहत अग्नि और पृथ्वी जैसी रणनीतिक मिसाइलों के विकास का मार्ग प्रशस्त हुआ। वर्ष 1998 के पोखरण परमाणु परीक्षणों में भी उन्होंने महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। विज्ञान एवं रक्षा क्षेत्र में उनके योगदान के कारण उन्हें देशभर में विशेष सम्मान प्राप्त हुआ।
डॉ. एपीजे अब्दुल कलाम ने 25 जुलाई 2002 को भारत के 11वें राष्ट्रपति के रूप में पदभार संभाला। राष्ट्रपति पद पर रहते हुए भी वे विद्यार्थियों और युवाओं से लगातार जुड़े रहे। उनकी सरलता, विनम्रता और सहज व्यक्तित्व के कारण उन्हें ‘जनता के राष्ट्रपति’ के रूप में विशेष पहचान मिली। वे हमेशा युवाओं को बड़े सपने देखने, कड़ी मेहनत करने और अपने सपनों को साकार करने के लिए प्रेरित करते रहे।
डॉ. कलाम का मानना था कि भारत को विकसित राष्ट्र बनाने में देश के युवाओं की सबसे महत्वपूर्ण भूमिका है। उन्होंने ‘इंडिया 2020’ के माध्यम से भारत को एक विकसित और आत्मनिर्भर राष्ट्र बनाने का सपना देखा तथा शिक्षा, विज्ञान, तकनीक और नवाचार को देश की प्रगति का आधार माना।
राष्ट्र के प्रति उनके अमूल्य योगदान के लिए उन्हें अनेक प्रतिष्ठित पुरस्कारों से सम्मानित किया गया। वर्ष 1981 में उन्हें पद्म भूषण, वर्ष 1990 में पद्म विभूषण तथा वर्ष 1997 में देश के सर्वोच्च नागरिक सम्मान भारत रत्न से सम्मानित किया गया।
स्कूल के प्रधानाचार्य सुरेश सैनी ने कहा कि डॉ. एपीजे अब्दुल कलाम ने भारत के वैज्ञानिक और रक्षा क्षेत्र को नई ऊंचाइयों तक पहुंचाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। उन्होंने कहा कि डॉ. कलाम का जीवन हमें यह संदेश देता है कि सफलता प्राप्त करने के लिए लक्ष्य निर्धारित करना, निरंतर मेहनत करना और अनुशासन के साथ आगे बढ़ना आवश्यक है। वे जीवनभर युवाओं को बड़े सपने देखने और उन्हें साकार करने के लिए प्रेरित करते रहे।

