कैथल के निजी स्कूल में छात्राओं का वीडियो बनाने के आरोप में कर्मचारी गिरफ्तार, POCSO एक्ट के तहत मामला दर्ज
कैथल शहर के एक बड़े निजी स्कूल में उस वक्त हड़कंप मच गया, जब स्विमिंग पूल के चेंजिंग रूम में छात्राओं का अश्लील वीडियो बनाने का संगीन मामला सामने आया। कपड़े बदल रही छात्राओं की सतर्कता से आरोपी रंगे हाथों पकड़ा गया। घटना की सूचना मिलते ही परिजनों में भारी रोष फैल गया। पुलिस ने त्वरित कार्रवाई करते हुए आरोपी के खिलाफ पॉक्सो (POCSO) एक्ट समेत विभिन्न गंभीर धाराओं में मामला दर्ज कर उसे गिरफ्तार कर लिया है।
कैथल, 25 जुलाई 2026 | अटल हिन्द न्यूज रिसोर्स
कैथल जिले के एक निजी स्कूल में छात्राओं की सुरक्षा और निजता से जुड़ा गंभीर मामला सामने आया है। स्विमिंग पूल के चेंजिंग रूम में कपड़े बदल रही छात्राओं का कथित रूप से मोबाइल फोन से वीडियो बनाने के आरोप में स्कूल के एक चतुर्थ श्रेणी कर्मचारी को पुलिस ने गिरफ्तार किया है। आरोपी के खिलाफ पॉक्सो (POCSO) अधिनियम और भारतीय न्याय संहिता (BNS) की संबंधित धाराओं के तहत एफआईआर दर्ज कर जांच शुरू कर दी गई है।
पुलिस के अनुसार आरोपी की पहचान कलायत निवासी गौरव के रूप में हुई है, जो संबंधित निजी स्कूल में चतुर्थ श्रेणी कर्मचारी के रूप में कार्यरत था।
छात्राओं की सतर्कता से उजागर हुई घटना
जानकारी के अनुसार स्कूल में स्विमिंग प्रशिक्षण के बाद छात्राएं चेंजिंग रूम में कपड़े बदलने गई थीं। इसी दौरान उन्हें कमरे में किसी की मौजूदगी का आभास हुआ। जब उन्होंने ध्यान से देखा तो स्कूल का एक कर्मचारी कथित रूप से मोबाइल फोन से उनका वीडियो रिकॉर्ड कर रहा था।
छात्राओं ने बिना घबराए तुरंत इसकी जानकारी स्कूल प्रबंधन और अपने अभिभावकों को दी। उनकी सूझबूझ के कारण मामला तत्काल सामने आ गया और आरोपी मौके से भाग नहीं सका।
परिजनों और स्कूल स्टाफ ने आरोपी को पकड़ा
घटना की सूचना मिलते ही छात्राओं के परिजन स्कूल पहुंच गए। स्कूल स्टाफ की मदद से आरोपी को वहीं रोक लिया गया और सिविल लाइन थाना पुलिस को सूचना दी गई। पुलिस मौके पर पहुंची और आरोपी को हिरासत में लेकर पूछताछ शुरू की। बाद में उसे औपचारिक रूप से गिरफ्तार कर लिया गया।
घटना के बाद स्कूल परिसर में कुछ समय तक तनाव का माहौल बना रहा। बड़ी संख्या में अभिभावक स्कूल पहुंचे और बच्चों की सुरक्षा व्यवस्था को लेकर चिंता जताई।
मोबाइल फोन जब्त, डिजिटल साक्ष्यों की जांच
पुलिस ने आरोपी का मोबाइल फोन कब्जे में लेकर जांच शुरू कर दी है। डिजिटल साक्ष्यों की फोरेंसिक जांच कराई जाएगी ताकि यह स्पष्ट हो सके कि कोई वीडियो रिकॉर्ड हुआ था या नहीं, यदि हुआ तो उसे कहीं साझा (शेयर) किया गया है या नहीं, और क्या आरोपी पहले भी इस प्रकार की हरकत कर चुका है।
जांच एजेंसियां मोबाइल फोन, इलेक्ट्रॉनिक डेटा और अन्य उपलब्ध साक्ष्यों का परीक्षण कर रही हैं।
POCSO एक्ट के तहत दर्ज हुई एफआईआर
पीड़ित छात्राओं के परिजनों की शिकायत के आधार पर पुलिस ने आरोपी के खिलाफ POCSO Act तथा भारतीय न्याय संहिता (BNS) की संबंधित धाराओं में मामला दर्ज किया है। पुलिस का कहना है कि जांच पूरी होने के बाद उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर आगे की कानूनी कार्रवाई की जाएगी।
डीएसपी बोले- हर पहलू से हो रही जांच
डीएसपी रमेश चंद्र ने बताया कि सूचना मिलते ही पुलिस टीम को मौके पर भेजा गया और आरोपी को तुरंत हिरासत में ले लिया गया। उन्होंने कहा कि मामला बेहद संवेदनशील है और इसकी निष्पक्ष एवं गहन जांच की जा रही है।
उन्होंने बताया कि छात्राओं, स्कूल स्टाफ और अन्य संबंधित लोगों के बयान दर्ज किए जा रहे हैं। साथ ही डिजिटल साक्ष्यों की भी जांच कराई जा रही है, ताकि मामले के सभी तथ्यों का पता लगाया जा सके।
अभिभावकों ने उठाए सुरक्षा व्यवस्था पर सवाल
घटना के बाद अभिभावकों ने स्कूल प्रशासन से सुरक्षा व्यवस्था को और मजबूत बनाने की मांग की। उनका कहना है कि स्कूल परिसर, विशेषकर स्विमिंग पूल, चेंजिंग रूम और खेल गतिविधियों वाले क्षेत्रों में पर्याप्त निगरानी और सुरक्षा प्रबंध होने चाहिए।
अभिभावकों ने कर्मचारियों के नियमित पुलिस सत्यापन (Police Verification), संवेदनशील स्थानों पर प्रवेश नियंत्रण, महिला स्टाफ की पर्याप्त तैनाती तथा प्रभावी चाइल्ड प्रोटेक्शन पॉलिसी लागू करने की आवश्यकता पर भी जोर दिया।
POCSO कानून क्या है?
प्रोटेक्शन ऑफ चिल्ड्रेन फ्रॉम सेक्सुअल ऑफेंसेस (POCSO) अधिनियम, 2012 बच्चों को यौन अपराधों से सुरक्षा प्रदान करने के उद्देश्य से बनाया गया विशेष कानून है। इस कानून के तहत नाबालिगों की निजता का उल्लंघन, अश्लील फोटो या वीडियो बनाना, यौन उत्पीड़न और अन्य संबंधित अपराधों पर कठोर दंड का प्रावधान है। ऐसे मामलों की सुनवाई विशेष अदालतों में प्राथमिकता के आधार पर की जाती है।
पुलिस ने कहा है कि मामले की जांच जारी है और फोरेंसिक रिपोर्ट सहित सभी साक्ष्यों के आधार पर आगे की कानूनी कार्रवाई की जाएगी। साथ ही यदि जांच में कोई अतिरिक्त तथ्य सामने आते हैं तो संबंधित धाराएं भी जोड़ी जा सकती हैं।

