फर्जी इनवॉइस और शेल कंपनियों का नेटवर्क: गुरुग्राम में 200 करोड़ रुपये का GST घोटाला, सीए और सह-संस्थापक गिरफ्तार
विशेष रिपोर्ट — फतह सिंह उजाला /गुरुग्राम /न्यूज रिसोर्स अटल हिन्द /25 जुलाई 2026
गुरुग्राम में केंद्रीय वस्तु एवं सेवा कर (CGST) आयुक्तालय की कर-अपवंचन विरोधी (एंटी-एवेजन) शाखा ने एक बड़े सफेदपोश अपराध का पर्दाफाश किया है। फर्जी इनवॉइस और फर्जी कंपनियों (शेल फर्मों) के जरिए लगभग 200 करोड़ रुपये के इनपुट टैक्स क्रेडिट (ITC) घोटाले का भंडाफोड़ करते हुए विभाग ने चार मुख्य आरोपियों को गिरफ्तार किया है।
पकड़े गए आरोपियों में ऑटो सर्विस सेक्टर से जुड़ी एक प्रमुख फर्म के दो पूर्व सह-संस्थापक और दो चार्टर्ड अकाउंटेंट (CA) शामिल हैं। सीजीएसटी अधिनियम के प्रावधानों के तहत कार्रवाई करते हुए आरोपियों को गुरुग्राम के ड्यूटी मजिस्ट्रेट के सामने पेश किया गया, जहां से अदालत ने पुख्ता सबूतों के आधार पर सभी को 14 दिन की न्यायिक हिरासत में भेज दिया है।
कैसे हुआ पूरे फर्जीवाड़े का पर्दाफाश?
सीजीएसटी गुरुग्राम की एंटी-एवेजन टीम को डेटा एनालिटिक्स और रिस्क मैनेजमेंट टूल के जरिए कुछ संदिग्ध कंपनियों के लेनदेन में गड़बड़ी के संकेत मिले थे। जब अधिकारियों ने इन कंपनियों की ओर से दाखिल किए गए रिटर्न और आईटीसी दावों की बारीक पड़ताल की, तो एक बड़े सिंडिकेट का पैटर्न सामने आया।
विभाग की टीम ने गुरुग्राम और आसपास के कई ठिकानों पर छापेमारी और भौतिक सत्यापन (Physical Verification) किया। जांच में पाया गया कि जिन पतों पर कंपनियां कागजों में चल रही थीं, वहां हकीकत में कोई कारोबारी गतिविधि नहीं हो रही थी। कई पते पूरी तरह फर्जी निकले या वहां छोटे-छोटे फर्जी दफ्तर बनाए गए थे।
फर्जीवाड़े का तरीका (Modus Operandi): बिना सामान बेचे कैसे कटा टैक्स क्रेडिट?
जांच अधिकारियों के अनुसार, इस पूरे घोटाले का खाका बेहद सुनियोजित तरीके से तैयार किया गया था:
शेल कंपनियों का जाल: गिरोह ने सबसे पहले दर्जनों कागजी (शेल) कंपनियां बनाईं।
नकली इनवॉइस (Fake Invoices): बिना किसी वास्तविक सामान या सेवा (Goods & Services) की डिलीवरी के केवल कागजों पर करोड़ों रुपये के बिल जारी किए गए।
लेयरिंग तकनीक (Money Layering): पैसों के लेनदेन को असली और जटिल दिखाने के लिए रकम को एक फर्जी कंपनी के खाते से दूसरी फर्जी कंपनी के खाते में घुमाया गया।
आईटीसी क्लेम: इस फर्जी चेन के आखिरी सिरे पर बैठी मुख्य कंपनियों ने सरकार से करोड़ों रुपये के इनपुट टैक्स क्रेडिट का दावा कर लिया और सरकारी खजाने को लगभग 200 करोड़ रुपये की चपत लगाई।
किसने क्या भूमिका निभाई और आरोपी कौन हैं?
इस पूरे मामले में पेशेवर वित्तीय ज्ञान का दुरुपयोग किया गया:
दो चार्टर्ड अकाउंटेंट (CAs): गिरफ्तार किए गए दोनों सीए इस पूरे नेटवर्क के मुख्य रणनीतिकार थे। उन्होंने अपनी वित्तीय समझ का इस्तेमाल कर शेल कंपनियों के रजिस्ट्रेशन, इनवॉइस मैनेजमेंट और जीएसटी रिटर्न दाखिल करने का काम संभाला ताकि जांच एजेंसियों की नजरों से बचा जा सके।
दो पूर्व सह-संस्थापक: ऑटो सर्विस क्षेत्र की प्रसिद्ध फर्म के पूर्व सह-संस्थापकों ने अपनी कंपनियों और नेटवर्क का इस्तेमाल इस फर्जी क्रेडिट को खपाने और कैश फ्लो को लेयर करने के लिए किया।
कब से चल रहा था यह खेल और क्या था काम?
प्राथमिक जांच में सामने आया है कि यह सिंडिकेट पिछले 2 से 3 वर्षों से लगातार सक्रिय था। शुरुआत में छोटे स्तर पर फर्जी इनवॉइस जारी कर आईटीसी क्लेम किया जाता था। जब सिस्टम की कमियों का फायदा उठाकर धोखाधड़ी सफल होने लगी, तो इन्होंने नेटवर्क का दायरा बढ़ा दिया और सैकड़ों करोड़ रुपये के फर्जी सौदे कागजों पर दिखा दिए। इनका मुख्य काम केवल कागजों पर गाड़ियों के स्पेयर पार्ट्स, ऑटो सर्विसेज और कंसल्टेंसी के जाली बिल तैयार करना था।
विभाग का बयान और आरोपियों का पक्ष
GST विभाग का रुख:
सीजीएसटी आयुक्तालय गुरुग्राम के वरिष्ठ अधिकारियों ने स्पष्ट किया है कि कर चोरी और राजकोष को नुकसान पहुंचाने वाले किसी भी सफेदपोश अपराधी को बख्शा नहीं जाएगा। विभाग के अनुसार:
“आरोपियों के खिलाफ पर्याप्त दस्तावेजी और डिजिटल साक्ष्य जुटाए गए हैं। बैंक खातों, ई-वे बिल डेटा और जीएसटी रिटर्न के विश्लेषण से घोटाले की पुष्टि हुई है। जांच अभी जारी है और इस नेटवर्क से जुड़े अन्य लोगों व कंपनियों पर भी जल्द शिकंजा कसा जाएगा।”
आरोपियों का क्या कहना है?
अदालत में पेशी के दौरान आरोपियों और उनके वकीलों ने दावा किया कि वे केवल सामान्य व्यावसायिक सलाह और कानूनी सेवाओं से जुड़े थे। उन्होंने खुद को निर्दोष बताते हुए कहा कि व्यावसायिक लेनदेन नियमों के तहत हुए हैं। हालांकि, जीएसटी विभाग द्वारा पेश किए गए पुख्ता तकनीकी और भौतिक साक्ष्यों के आधार पर अदालत ने उनकी दलीलों को खारिज करते हुए उन्हें 14 दिन की न्यायिक हिरासत में भेजने के आदेश दिए।
हरियाणा में GST चोरी का आंकड़ा: अधिकारी और तंत्र भी जांच के दायरे में
हरियाणा में पिछले कुछ सालों में फर्जी आईटीसी और जीएसटी चोरी के मामले तेजी से सामने आए हैं। राज्य और केंद्रीय जीएसटी विभागों की सतर्कता से लगातार बड़े नेटवर्क पकड़े जा रहे हैं।
आंकड़ों की नजर से हरियाणा में जीएसटी चोरी:
| विवरण | आंकड़े/स्थिति |
| कुल उजागर मामले (पिछले 3-4 वर्षों में) | 1,200 से अधिक मामले दर्ज किए गए। |
| फर्जी कंपनियां (Shell Firms) पकड़ी गईं | 3,500 से ज्यादा फर्जी जीएसटी रजिस्ट्रेशन रद्द/चिह्नित। |
| कुल अनुमानित कर चोरी | 8,500 करोड़ रुपये से अधिक की फर्जी ITC/कर चोरी का खुलासा। |
| कुल गिरफ्तारियां | 150 से अधिक मुख्य सरगना, व्यापारी और सीए गिरफ्तार। |
क्या विभाग के अधिकारी और अफसर भी शामिल मिले?
जीएसटी फर्जीवाड़े के कई मामलों में विभागीय साठगांठ की बात भी सामने आई है। हरियाणा में हुई पिछली जांचों के दौरान:
अधिकारियों पर कार्रवाई: राज्य और केंद्रीय एजेंसियों की जांच में लगभग 12 से 15 प्रशासनिक अधिकारी व कर्मचारी (जीएसटी निरीक्षक, ईटीओ और क्लर्क स्तर) संदिग्ध पाए गए हैं, जिनके खिलाफ विभागीय जांच या एफआईआर दर्ज की गई है।
लापरवाही और साठगांठ: कुछ मामलों में अधिकारियों द्वारा बिना भौतिक सत्यापन के फर्जी पतों पर जीएसटी नंबर जारी करने और बिना सही जांच के रिफंड/आईटीसी पास करने के आरोप सिद्ध हुए हैं।
विजिलेंस जांच: फर्जीवाड़ा रोकने के लिए केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (CBI) और राज्य विजिलेंस ब्यूरो ने भी ऐसे संदिग्ध अफसरों के खिलाफ समानांतर जांच शुरू की है, जिन्होंने शेल कंपनियों के पंजीकरण में ढिलाई बरती या मिलीभगत की।
200 करोड़ रुपये का यह फर्जीवाड़ा दर्शाता है कि किस तरह सफेदपोश अपराधी वित्तीय विशेषज्ञता का इस्तेमाल कर सरकारी खजाने को नुकसान पहुंचा रहे हैं। गुरुग्राम सीजीएसटी की इस कार्रवाई से फर्जीवाड़ा करने वाले गिरोहों को कड़ा संदेश गया है। फिलहाल विभाग इस मामले में आगे की कड़ियां जोड़ रहा है और यह पता लगाने की कोशिश कर रहा है कि इस फर्जी क्रेडिट का अंतिम लाभार्थी (Final Beneficiary) कौन-कौन था।

