पटौदी में कारगिल विजय दिवस सत्ता पक्ष-नेताओं के लिए बेगाना
भारत रत्न, पूर्व पीएम अटल बिहारी के कार्यकाल में कारगिल युद्ध जीता गया
पटौदी में भाजपा के विभिन्न संकायों के अनेक पदाधिकारीयों की फौज मौजूद
पटौदी में होते हुए भी विधायक विमला चौधरी शहीद स्मारक तक नहीं पहुंची
जिस कार्यक्रम में मौजूद रही, मंच से ने करगिल और न हीं शहीदों को याद किया
गुरुग्राम/पटौदी/अटल हिन्द न्यूज रिसोर्स /26 जुलाई 2026 /फतह सिंह उजाला
अहीरवाल क्षेत्र को शहीदों और सैनिकों की खान माना जा रहा है । 1857 के युद्ध के अमर शहीद राव तुलाराम से लेकर भारत रत्न पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेई के कार्यकाल के दौरान कारगिल विजय में अहीरवाल क्षेत्र के सैनिकों का सर्वोच्च बलिदान सर्वाधिक रहा है। सैनिकों की शहादत संख्या में पटौदी के विभिन्न शहीदों के नाम शामिल हैं ।
इनमें सबसे मुख्य और महत्वपूर्ण केवल मात्र पौने 18 वर्ष की आयु में शहीद होने वाला गांव कूणी का जांबाज बिजेंद्र भी शामिल है। जो कि संभवत आजाद भारत की फौज में सबसे कम आयु में शहादत देने वाला सैनिक माना जाता है।
संडे 26 जुलाई को कारगिल विजय दिवस के रूप में पूरे देश में कारगिल के शहीदों के साथ-साथ अन्य ज्ञात अज्ञात शहीदों को श्रद्धा सुमन अर्पित करते हुए मनाया जाता है। इनमें आजादी के आंदोलन 1857 के भी सभी ज्ञात अज्ञात शहीद शामिल हैं और उन्हें भी विशेष रूप से याद किया जाता है ।
पटौदी विधानसभा क्षेत्र जो की राजनीतिक रूप से भी अमर शहीद राव तुलाराम के वंशजों का सबसे बड़ा और मजबूत समर्थक माना जाता है । इसी परिवार के सांसद एवं केंद्रीय मंत्री राव इंद्रजीत सिंह के आशीर्वाद के बिना लोगों के कहे मुताबिक पटौदी से चुनाव जीत कर विधायक बनाना लोहे के चने चबाने के बराबर है। सीधे और सरल शब्दों में पटौदी से विधायक बनने के लिए राव इंद्रजीत सिंह का आशीर्वाद या समर्थन होना जरूरी माना जाता है।
भाजपा की ट्रिपल इंजन वाली हैट्रिक सरकार है। पटौदी में भी राजनीतिक इतिहास के हिसाब से जिला गुरुग्राम की एकमात्र महिला पटौदी से दूसरी बार विधायक बनी विमला चौधरी केंद्रीय मंत्री राव इंद्रजीत सिंह के सबसे विश्वसनीय मानी गई है । संडे को कारगिल विजय दिवस के दिन वह पटौदी में ही एक कार्यक्रम में विशेष रूप से मौजूद रही। कार्यक्रम में यहां मंच पर उनके द्वारा सैकड़ो होनहार विद्यार्थियों को सम्मानित किया गया । आयोजकों को उनकी समस्याओं के समाधान का आश्वासन भी दिया।
लेकिन सबसे अधिक हैरानी की बात यही रही की देश का भविष्य और मौजूदा युवा पीढ़ी को उनके द्वारा कारगिल विजय दिवस और कारगिल युद्ध में शहादत देने वाले सैनिकों के शौर्य के विषय में एक शब्द कहना भी जरूरी नहीं समझ गया।
जहां यह कार्यक्रम आयोजित किया गया वहां से कुछ ही दूरी पर पटौदी का सही स्मारक भी मौजूद है । समाचार लिखे जाने तक उपलब्ध जानकारी के मुताबिक जनता और शहीद परिवारों के द्वारा चुनी गई भाजपा पार्टी की जनप्रतिनिधि के द्वारा शहीद स्मारक पर दो फूल भी श्रद्धांजलि के अर्पित किया जाना भी जरूरी नहीं समझ गया ?
पटौदी के पूर्व सैनिक और पूर्व सैनिक संगठनों के द्वारा अवश्य अपने शहीद सैनिक साथियों और भाइयों तथा परिवारों को याद करते हुए श्रद्धांजलि अर्पित कर परिजनों को सम्मानित किया गया।
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