सशक्त राष्ट्र निर्माण में सशक्त नारी का महत्वपूर्ण योगदान: प्रो. सोमनाथ सचदेवा
राष्ट्रीय प्रतिभाओं को एक साथ लाने में का मंच है कला उत्सव: प्रो. सोमनाथ सचदेवा
कला उत्सव में दूसरे दिन कलाकारों ने रचनात्मक कला को किया प्रदर्शित
कुरुक्षेत्र/ 2 मई/अटल हिन्द ब्यूरो
कुरुक्षेत्र विश्वविद्यालय के कुलगुरु प्रो. सोमनाथ सचदेवा ने कहा है कि सशक्त राष्ट्र निर्माण में सशक्त नारी का महत्वपूर्ण योगदान है। वर्तमान में ज्ञान, विज्ञान, खेल, कला एवं संस्कृति सहित अन्य क्षेत्रों में महिलाएं उल्लेखनीय योगदान देकर देश को सशक्त बनाने में अपना महत्वपूर्ण योगदान दे रही हैं।
कुलगुरु प्रो. सोमनाथ सचदेवा ने यह विचार शनिवार को युवा एवं सांस्कृतिक कार्यक्रम विभाग व ललित कला विभाग के सहयोग से आयोजित कला उत्सव – सशक्त नारी, सशक्त समाज, सशक्त राष्ट्र विषय पर आयोजित पांच दिवसीय कला उत्सव के दूसरे दिन बतौर मुख्यातिथि व्यक्त किए।
कुलगुरु प्रो. सोमनाथ सचदेवा ने कलाकारों के प्रयासों की सराहना करते हुए कहा कि इस प्रकार के आयोजन समाज में सकारात्मक परिवर्तन लाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। उन्होंने समाज में महिलाओं की ताकत और योगदान के बारे में शक्तिशाली संदेश देने के लिए कलाकारों की सराहना की।
कुलगुरु प्रो. सोमनाथ सचदेवा ने आयोजकों को बधाई देते हुए कहा कि सांस्कृतिक समावेशिता और सशक्तीकरण को बढ़ाने के लिए राष्ट्रीय प्रतिभाओं को एक साथ लाने में कला उत्सव ने एक जीवंत मंच के रूप में कार्य किया है।
इस कार्यशाला में पूरे भारत से दस प्रमुख कलाकारों ने हिस्सा लिया, जिनमें से 60 महिला कलाकार थीं, जो लैंगिक समानता और महिला सशक्तीकरण के प्रति विश्वविद्यालय की प्रतिबद्धता को दर्शाता है।
कार्यशाला के क्यूरेटर डॉ. गुरचरण सिंह ने कहा, कला उत्सव प्राचीन परंपराओं को आधुनिक रचनात्मकता के साथ जोड़ता है, जो युवाओं को कला के माध्यम से अपनी सांस्कृतिक पहचान व्यक्त करने के लिए सशक्त बनाता है।
उन्होंने इस बात पर प्रकाश डाला कि हमारे देश की महिलाएं किसी भी क्षेत्र में पीछे नहीं हैं और राष्ट्र के हर कार्य में बढ़-चढ़कर हिस्सा लेती हैं।
उन्होंने इस बात पर भी जोर दिया कि इस आयोजन के दौरान साझा किया गया ज्ञान और रचनात्मक तालमेल छात्रों के शैक्षणिक व व्यावसायिक विकास पर एक स्थायी प्रभाव डालेगा। कार्यशाला के दूसरे दिन कलाकारों ने विभिन्न तकनीकों और वैचारिक अभिव्यक्तियों को दर्शाते हुए गतिशील, व्यावहारिक प्रदर्शन करते हुए कलाकृतियों का निर्माण किया।
इस अवसर पर प्रो. परमेश कुमार, लोक सम्पर्क विभाग के निदेशक प्रो. महासिंह पूनिया, कुटा प्रधान डॉ. जितेन्द्र खटकड़, डॉ. पवन कुमार, डॉ. मोनिका, डॉ. राकेश बानी, डॉ. हरविन्द्र सिंह लोंगोवाल, डॉ. सुशील कुमार सहित प्रतिभागी कलाकार मौजूद थे।
कलाकारों ने कला से मोहा सबका मन
कला उत्सव में विभिन्न राज्यों से आए कलाकारों ने अपनी कला से सभी का मन मोह लिया। कलाकार विनय शर्मा ने जलरंग (वॉटरकलर) तकनीकों पर एक आकर्षक लाइव प्रदर्शन किया, जिससे छात्रों को इस माध्यम के प्रवाह और नियंत्रण के बारे में व्यावहारिक जानकारी मिली। इसके साथ ही, कलाकार अंजनी रेड्डी ने प्राकृतिक दुनिया की सुंदरता को उजागर करने के लिए प्रकृति की गोद में विषय पर अपनी सौंदर्य दृष्टि को कैनवास पर उतारा। कलाकार रितु ने प्रभावशाली पर्यावरण विषय पर एक शानदार पेंटिंग बनाई, जिसमें कला और पारिस्थितिक जागरूकता के बीच के महत्वपूर्ण संबंध पर जोर दिया गया। इसके अलावा, कलाकार गौरी शंकर सोनी ने आसपास के तत्वों को मानव संपर्क और ऐतिहासिक सांस्कृतिक परिवर्तनों से जोड़ने वाला एक विचारोत्पादक प्रदर्शन प्रस्तुत किया, जबकि कलाकार के.के. गांधी ने एक राजसी पहाड़ी घाटी और एक गहरे, शांत बौद्ध मठ की अवधारणा को दर्शाती अपनी गहन पेंटिंग से दर्शकों को मंत्रमुग्ध कर दिया।


