चंडीगढ़ /3 मई /अटल हिन्द ब्यूरो
हरियाणा के जुलाना से कांग्रेस विधायक और अंतरराष्ट्रीय पहलवान विनेश फोगाट ने एक बार फिर भारतीय कुश्ती जगत में हलचल मचा दी है। अपने ताजा बयान में उन्होंने पूर्व कुश्ती संघ अध्यक्ष बृजभूषण शरण सिंह पर लगाए गए गंभीर आरोपों को दोहराते हुए खुद को भी उन 6 महिला खिलाड़ियों में शामिल बताया है, जिन्होंने कथित यौन शोषण के मामले में शिकायत दर्ज कराई थी।
🔴 “मैं भी पीड़ित हूं” – विनेश का खुला ऐलान
सोशल मीडिया पर साझा किए गए भावुक संदेश में विनेश ने कहा कि करीब डेढ़ साल तक वह अखाड़े से दूर रहीं, लेकिन अब उन्होंने दोबारा ट्रेनिंग शुरू कर दी है। उनका लक्ष्य साफ है—देश के लिए फिर से पदक जीतना और तिरंगे का सम्मान बढ़ाना।
हालांकि इस संदेश का सबसे बड़ा पहलू उनका यह खुलासा रहा कि 3 साल पहले महिला खिलाड़ियों ने जो आवाज उठाई थी, वह व्यक्तिगत अनुभवों पर आधारित थी। उन्होंने कहा कि इस केस में 6 महिला पहलवानों ने गवाही दी थी—और वह खुद भी उन्हीं में से एक हैं।
उन्होंने सुप्रीम कोर्ट की गाइडलाइन का हवाला देते हुए कहा कि आमतौर पर पीड़ित की पहचान सार्वजनिक नहीं की जाती, लेकिन “मजबूरी और परिस्थितियों” के चलते उन्हें सामने आना पड़ा।
⚖️ कोर्ट में मामला लंबित, गवाही जारी
यह मामला फिलहाल अदालत में विचाराधीन है और गवाहों से पूछताछ जारी है। विनेश ने स्पष्ट किया कि केस अभी खत्म नहीं हुआ है, बल्कि न्यायिक प्रक्रिया जारी है।

🔥 2023 का जंतर-मंतर आंदोलन बना टर्निंग पॉइंट
साल 2023 में नई दिल्ली के जंतर मंतर पर हुए हाई-प्रोफाइल विरोध प्रदर्शन ने इस मुद्दे को राष्ट्रीय बहस बना दिया था।
इस आंदोलन में विनेश के साथ ओलंपिक पदक विजेता बजरंग पूनिया और साक्षी मलिक भी शामिल थे। सभी ने मिलकर बृजभूषण शरण सिंह पर महिला पहलवानों के साथ यौन उत्पीड़न के गंभीर आरोप लगाए थे।
विनेश ने उस समय सार्वजनिक रूप से आरोप लगाया था कि नेशनल कैंप में महिला खिलाड़ियों का शोषण होता है और बृजभूषण खिलाड़ियों के होटल में ठहरते थे, जो नियमों के खिलाफ है।
🏟️ रैंकिंग प्रतियोगिता पर उठाए सवाल
विवाद यहीं नहीं थमा। विनेश फोगाट ने कुश्ती संघ की नई रैंकिंग प्रतियोगिता पर भी गंभीर सवाल खड़े किए।
उन्होंने आरोप लगाया कि यह प्रतियोगिता उत्तर प्रदेश में उस स्थान पर आयोजित की जा रही है, जहां बृजभूषण शरण सिंह का निजी शिक्षण संस्थान है। ऐसे में निष्पक्षता पर सवाल उठना स्वाभाविक है।
विनेश के मुताबिक:
मुकाबलों के निर्णायकों पर प्रभाव डाला जा सकता है
खिलाड़ियों को दिए जाने वाले अंकों में पक्षपात संभव है
जीत-हार तक प्रभावित की जा सकती है
उन्होंने यह भी कहा कि ऐसे “शत्रुतापूर्ण माहौल” में खेलना उनके लिए मानसिक रूप से बेहद कठिन है, खासकर तब जब वह खुद इस मामले में शिकायतकर्ता हैं।
🧠 मानसिक दबाव और खेल से दूरी
विनेश ने यह भी खुलासा किया कि ऐसे माहौल में प्रतिस्पर्धा करना उनके लिए मानसिक रूप से भारी पड़ रहा है। उन्होंने आशंका जताई कि वह ऐसे वातावरण में अपना 100% प्रदर्शन नहीं दे पाएंगी।
गौरतलब है कि पेरिस ओलंपिक 2024 में अधिक वजन के कारण फाइनल से अयोग्य घोषित होने के बाद से उन्होंने किसी प्रतियोगिता में हिस्सा नहीं लिया है।
📌 खेल से लेकर राजनीति तक फैला विवाद
यह मामला अब सिर्फ खेल तक सीमित नहीं रहा, बल्कि इसमें राजनीति, न्याय व्यवस्था और खिलाड़ियों की सुरक्षा जैसे बड़े मुद्दे जुड़ चुके हैं।
विनेश फोगाट के इस ताजा बयान ने एक बार फिर उस बहस को तेज कर दिया है—क्या भारतीय खेल संस्थानों में खिलाड़ियों, खासकर महिला खिलाड़ियों, को सुरक्षित और निष्पक्ष माहौल मिल रहा है?


