जिस घर, क्षेत्र और परिसर में यज्ञ हवन होता है। उसमें 7 दिन तक पवित्र वातावरण बना रहता है-चन्द्रकान्त आर्य
हवन के प्रभाव से जीवाणु और विषाणु लगभग एक महीना निष्क्रिय हो जाते हैं-चन्द्रकान्त आर्य
नरवाना, 3 मई, (नरेन्द्र जेठी)
जिस घर ,क्षेत्र और परिसर में यज्ञ हवन होता है। उसमें 7 दिन तक पवित्र वातावरण बना रहता है।आज आर्य समाज नरवाना संबंद्धता आर्य प्रतिनिधि सभा हरयाणा दयानन्द मठ रोहतक ने प्रधान चंद्रकांत आर्य के मार्गदर्शन में विश्व यज्ञ दिवस के उपलक्ष मे आयोजित कार्यक्रम में बोलते हुए प्रधान चन्द्रकान्त आर्य ने यह विचार वयक्त किए ।
उन्होने बताया कि वैज्ञानिक परिषद के अन्वेषण के आधार पर यह पाया गया है कि हवन के प्रभाव से जीवाणु और विषाणु लगभग एक महीना निष्क्रिय हो जाते हैं। हवन के क्षेत्र में पशु -पक्षियों ,जीव जंतुओं, पेड़- पौधों और वनस्पतियों के व्यवहार में भी सकारात्मक बदलाव सिद्ध हुआ है। फल -फूल, औषधियां, अनाज, दलहन, तिलहन और गन्ना इत्यादि की गुणवत्ता में वृद्धि सिद्ध हुई है।
राजा जनक और उद्धालक ऋषि के संवाद में भी यज्ञ के महत्व का उल्लेख मिलता है। गीता में योगीराज श्री कृष्ण चंद्र महाराज ने कहा है कि भोजन करने से पहले प्रत्येक मनुष्य को यज्ञ हवन करना चाहिए।
प्रधान चंद्रकांत आर्य ने कहा कि शतपथ ब्राह्मण और यजुर्वेद के मंत्र यज्ञों वै श्रेष्ठतम कर्म अनुसार प्रत्येक मनुष्य को यज्ञ-हवन, संध्या, उपासना संधिकाल में प्रात: एवं साय काल में अवश्य करना चाहिए। यज्ञ से शारीरिक, मानसिक, बौद्धिक एवं आध्यात्मिक पवित्रता के साथ परिवार के संस्कार पवित्र होने से सामाजिक और सांस्कृतिक एकता सुदृढ़ होती है।
चारों वेदों में यज्ञ की महिमा का वैज्ञानिक आधार पर गुणगान किया गया है। इस अवसर पर जयपाल सिंह आर्य ने कहा कि बदलते वातावरण का दुष्प्रभाव पर्यावरण पर दिन प्रतिदिन गहराता जा रहा है। किसान भाइयों से गेहूं के फान्नों को न जलाने का आह्वान करते हुए कहा कि फान्नों में पानी लगाकर दो बार गहरी जुताई करने से भूमि में उर्वरा शक्ति, पोषण के साथ लाभदायक कीट -पतंगों और जीवाणुओं की संख्या में वृद्धि होती है।
इस बात को बरटा गांव के एक खेत में किसान राम मेहर मलिक ने भी स्वीकार किया कि हम अपने खेतों में आग नहीं लगते, बल्कि पराली एवं फसल अवशेषों को प्राकृतिक खाद में बदल देते हैं। भूमि की गुणवत्ता भी उत्तम है। आग लगने से सडक़ ,नदी -नाले एवं आम रास्तों पर खड़े छोटे- बड़े, पेड़- पौधे और वनस्पतियां जल रही है ,जिसे पशु- पक्षी और लाभदायक की पतंगे खत्म या भस्म हो रहे हैं।
यह सब बीज और फलियों को इधर-उधर भूमि पर बिखर कर पर्यावरण संरक्षण में अहम योगदान करते हैं । कमला स्मारक राजकीय महाविद्यालय नरवाना की परिसर में 5000-6000 के आसपास पेड़- पौधे और वनस्पतियां हैं।
महाविद्यालय परिसर के वनस्पति क्षेत्र में लगभग 15 प्रजातियों के 500- 600 पक्षियों के आशियाने हैं। पक्षियों की चहचहाहट दिन प्रतिदिन बढ़ रही है। इससे आसपास का वातावरण अति सौम्य और पवित्र है।
सुबह-शाम भ्रमण करने से अनेकों प्रकार की व्याधियों से निजात मिलती है। आओ सब मिलकर के महाविद्यालय के सघन वनस्पति क्षेत्र के संरक्षण के साथ आसपास के क्षेत्रों में भी ऐसी व्यवस्थाएं स्थापित करें, जिससे वातावरण शुद्ध हो और आम जनमानुष का जीवन सरल और सुखी हो। कार्यक्रम में सत्संग व पर्यावरण शुद्धि एवं समृद्धि के लिए यज्ञ- हवन भी किया गया।
धर्मपाल, डॉक्टर प्रताप सिंह एवं यशपाल आर्य ने भजन एवं गीतों में ईश्वर स्तुति, प्रार्थना, उपासना के साथ महर्षि दयानंद के सामाजिक चेतना जागृति अभियान और वेदों की ओर लोटो और वैदिक संस्कृति के पुनर्जागरण का उल्लेख किया। इस अवसर पर किताब सिंह, प्रेम, कर्ण, राजवीर ढिल्लों एवं अन्य आर्यगण उपस्थित रहे।


