पश्चिम बंगाल में हिंदु एकता व सांस्कृतिक चेतना की विजयः जगद्गुरु नरेंद्रानंद

पश्चिम बंगाल में हिंदु एकता व सांस्कृतिक चेतना की विजयः जगद्गुरु नरेंद्रानंद
बंगाल परिणाम राजनीतिक परिवर्तन नहीं, बल्कि समाज में बढ़ती सांस्कृतिक चेतना का प्रतीक-जगद्गुरु नरेंद्रानंद
जनता का मताधिकार से स्पष्ट संदेश परंपराओं, आस्थाओं, सनातन संरक्षण के प्रति सजग
समाज में असंतुलन की स्थिति को जनता ने लोकतांत्रिक तरीके से संतुलित किया
गुरुग्राम/5 मई/ अटल हिन्द/फतह सिंह उजाला
आदि शंकराचार्य महासंस्थानम्, श्री काशी सुमेरु पीठाधीश्वर जगदुरु शंकराचार्य नरेंद्रानंद सरस्वती महाराज ने पश्चिम बंगाल में भारतीय जनता पार्टी की प्रचंड जीत पर अपनी प्रतिक्रिया व्यक्त करते हुए इसे सांस्कृतिक जागरण और हिंदू एकता की महत्वपूर्ण विजय बताया है। उन्होंने कहा कि यह परिणाम केवल राजनीतिक परिवर्तन नहीं, बल्कि समाज में बढ़ती सांस्कृतिक चेतना का प्रतीक है। शंकराचार्य नरेंद्रानंद सरस्वती
 ने अपने वक्तव्य में कहा कि बंगाल की जनता ने अपने मताधिकार के माध्यम से यह स्पष्ट संदेश दिया है कि वे अपनी परंपराओं, आस्थाओं और सनातन मूल्यों के संरक्षण के प्रति सजग हैं।
उन्होंने कहा कि लंबे समय से समाज में असंतुलन की स्थिति बनी हुई थी, जिसे जनता ने लोकतांत्रिक तरीके से संतुलित करने का कार्य किया है। यह जानकारी उनके निजी सचिव के द्वारा मीडिया से सांझा की गई ।
उन्होंने आरोप लगाया कि पूर्ववर्ती सरकार की नीतियों में तुष्टिकरण की प्रवृत्ति अधिक देखने को मिली, जिसके कारण सामाजिक समरसता प्रभावित हुई। उनका कहना था कि किसी भी राज्य की प्रगति के लिए सभी वर्गों के साथ समान व्यवहार आवश्यक है।
जगदुरु शंकराचार्य नरेंद्रानंद सरस्वती महाराज ने यह भी कहा कि देश के विभिन्न हिस्सों में अब सांस्कृतिक और धार्मिक मूल्यों के प्रति जागरूकता तेजी से बढ़ रही है।
उन्होंने इसे सकारात्मक संकेत बताते हुए कहा कि यह प्रवृत्ति राष्ट्र की एकता और अखंडता को मजबूत करने में सहायक होगी। अंत में उन्होंने आशा व्यक्त की कि नई सरकार सभी वर्गों के हितों को ध्यान में रखते हुए कार्य करेगी और राज्य में विकास, शांति तथा सांस्कृक्तिक समृद्धि को बढ़ावा देगी।
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