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यह खबर…गब्बर फेम अनिल विज, सूबे के सेहत मंत्री के काम की

यह खबर…गब्बर फेम अनिल विज, सूबे के सेहत मंत्री के काम की

पटौदी के उपमंडल नागरिक अस्पताल में हालात सामान्य नहीं

एसीएस, स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण, डीजी हेल्थ, डीसी, को पत्र

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अस्पताल के ही एसएमओ की कथित मनमानी का भेजा चिट्ठा

विशेषज्ञ डॉक्टरों सहित अन्य मेडिकल स्टाफ में बना है त्रीव रोष

घर पर निजी काम के लिए जीडीए स्टाफ का उपयोग का आरोप

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विशेषज्ञ डॉक्टरों पर इस्तीफा या प्रतिनियुक्ति पर जाने का दवाब

atal hind /फतह सिंह उजाला


पटौदी। 
जी हां, हैरान न हों और न ही चौंके। सही मायने में यह खबर…गब्बर फेम अनिल विज, सूबे के सेहत मंत्री के काम की ही है। एक तो मंत्री अनिल विज सूबे सेहत मंत्री है और साथ में सूबे के गृहमंत्री भी है। मामला पटौदी के पटौदी के उपमंडल नागरिक अस्पताल सहित यहां के ही वरिष्ठ चिकित्सा अधिकारी से संबंधित है। इस मामले में यहां कार्यरत सभी विशेषज्ञ डॉक्टरों सहित अन्य मेडिकल स्टाफ के द्वारा एसीएस, स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण, डीजी हेल्थ, डीसी, सीएमओ गुरूग्राम, पटौदी एमएलए, एसडीएम को पत्र लिखकर अवगत कराया गया है।

प्रेषित पत्र के मुताबिक डॉक्टरों और अन्य मेडिकल स्टाफ के खिलाफ पक्षपाती/तर्कहीन व्यवहार दिखा किया जा रहा हैं। सभी विशेषज्ञ डॉक्टरों पर इस्तीफा देने या या फिर एसडीसीएच पटौदी से प्रतिनियुक्ति रद्द करने का दबाव बनाने का खेल हो रहा है।  जिजसे कि सीनियर पोस्ट पर पदासीन डाक्टर अपने वित्तीय और अन्य लाभों के लिए प्राइवेट अस्पतालों के के साथ ं अपने संबंधो को  दोस्ताना सहित प्रगाड कर सकें । अधिकारी डाक्टर अस्पताल परिसर में ही अपने सरकारी आवास से कार्यालय का काम संचालित कर रहा है और अपने कार्यालय में ड्यूटी के घंटों के दौरान बहुत कम मिलता है। अस्पताल और काम के प्रति उनकी ईमानदारी के लिए अधिकासरी की बायोमेट्रिक उपस्थिति और सीसीटीवी फुटेज की जांच की भी मांग की गई है। प्राइवेट डॉक्टरों और अन्य लोगों के लिए परिसर के अंदर अपने आवास पर अल्कोहल पार्टियों के आयोजन जैसे गभीर आरापे भी है, प्राइवेट डाक्टर किसी भी तरह से लाभान्वित कर सकते हैं। असमाजिक तत्वों को कथित तौर पर उनके घर से अस्पताल परिसर के अंदर अंधेरे के संदिग्ध लोगों के साथ अंदर आते देखा गया है।

इस प्रकार के हालात में उनके घर के बगल में रहने वाली महिला डॉक्टरों को परेशानी हो रही है। अधिकारी डाक्टर घर पर अपने निजी काम के लिए जीडीए स्टाफ का उपयोग कर रहा है (ड्यूटी के घंटों के दौरान सफाई, खाना पकाने और पीने की पार्टियां) और वह ड्यूटी के घंटों में छूट के साथ-साथ शराब उपलब्ध कराकर उन्हें लाभान्वित कर रहा है। जिससे मरीजों और डॉक्टरों को असुविधा हो रही है। मरीजों और स्थानीय अवांछित तत्वों के सामने महिला डॉक्टरों के लिए आपत्तिजनक भाषा का इस्तेमाल करने मेें भी अधिकारी डाक्टर को कोई परहेज नही है और उच्च अधिकारियों को इसकी सूचना देने पर उनके कैरियर को खराब करने की धमकी देता है। एसडीसीएच पटौदी और उसके ब्लॉक के तहत विभिन्न स्वास्थ्य कर्मियों से उनके खिलाफ ऐसी ही कई शिकायतें दर्ज हैं

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बीती 8/07/2022 को लगभग 8. 30 बजे, एक विशेषज्ञ डाक्टर एसडीसीएच पटौदी में ड्यूटी पर आए , क्योंकि उनकी बेटी की तबीयत 2 दिनों से ठीक नहीं थी। जबकि एसएमओ पटौदी ने बिना किसी पूर्व सूचना के जानबूझकर दुर्भावनापूर्ण इरादे से डॉ. नरबीर यादव को चेतावनी देते हुए, दैनिक उपस्थिति रजिस्टर में दोहराया अपराधी के रूप में प्रतिकूल, गलत, अवैध और अपमानजनक टिप्पणी लिख दी। जबकि उक्त डाक्टर ने कभी भी अपने कार्य समय में एक बार में भी चूक नहीं की है। एसएमओ पटौदी ने दिनांक 8/07/2022 को उपस्थिति पंजिका में फर्जीवाड़ा कर विशेषज्ञ डॉक्टर की प्रतिष्ठा को ठेस पहुँचाने के उद्देश्य से अन्य चिकित्सकों एवं चिकित्सा कर्मियों की उपस्थिति में बार-बार अपराधी लिखा।

प्रेषित पत्र में बताया गया है कि सीनियर डाक्टर ने महिला विशेषज्ञ डाक्टर, और दो अन्य विशेषज्ञ डाक्टर को अस्पताल से बाहर निकालने और एक अन्य डाक्टर की प्रतिनियुक्ति रद्द करने की कथित धमकी भी दी। महिला विशेषज्ञ डाक्टर ने बार-बार संबंधित अधिकारियों को अपने धमकी भरे कॉल / नोटिस के बारे में सूचित किया, अवैध एमटीपी मामले के बाद उन्होंने जिला के वरिष्ठ चिकित्सा अधिकारी को  रिपोर्ट की, लेकिन वह अभी भी ठंडे बस्तेमें ही बंद की हुई  हैं और उनकी मानसिक रूप प्रताड़ित़  किया जा रहा हैं। क्योंकि उनके खिलाफ अवैध एमटीपी करने के लिए कोई प्रासंगिक कार्रवाई नहीं की गई है (जो कि पहले अन्य सरकारी केंद्रों से भी सूचित किया जाता है)।

यहां तक पत्र में लिखकर अवगत कराया गया है कि अन्य झोलाछाप डॉक्टरों और डॉक्टरों को अवैध एमटीपी करने के लिए प्रोत्साहित किया जाता है। कई डाक्टर उनके कारण अवसाद से ग्रसित अपने इलाज की मांग कर रहे है क्योंकि अनावश्यक पत्र लिखकर सभी विशेषज्ञ डाक्टरों पर दबाव डालाने और एसीआर और अन्य सेवा रिकॉर्ड में प्रतिकूल टिप्पणी करके खराब करने की धमकी दी जा रही है। ऐसे हालात को लंबे समय से झेलते काम कर रहे विभिन्न डाक्टरों ने संबंधित मामले में उच्चतम प्राधिकारी द्वारा जांच की मांग की है ।

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