भ्रष्टाचार का मुद्दा
… बड़ा सवाल महा विकास रैली के मंच पर सीएम के सामने कौन कहेगा भ्रष्टाचार
क्या 22 को महा विकास रैली के मंच पर भी “भ्रष्टाचार का मुद्दा ” गूंजेगा
एक महीना पहले पटौदी जाटोली मंडी परिषद हाउस में भ्रष्टाचार ही था मुद्दा
परिषद के सभी पार्षद सत्ता समर्थक फिर भी भ्रष्टाचार पर कोई एक्शन नहीं
पटौदी जाटोली मंडी परिषद हाउस में वाइस चेयरमैन भ्रष्टाचार के मुद्दे पर गरजे
फतह सिंह उजाला
पटौदी। नवगठित पटौदी जाटोली मंडी परिषद के चुनाव और जनता के चुने हुए जनप्रतिनिधियों के कार्यकाल का 1 वर्ष पूरा हो चुका है। यह 1 वर्ष पूरा होने से लगभग एक महीना पहले पटौदी जाटोली मंडी परिषद की बजट सहित सामान्य बैठक चेयरमैन प्रवीण ठाकरिया की अध्यक्षता में संपन्न हुई । इसी बैठक के बाद खुलासा किया गया कि आने वाली 22 मार्च को हरियाणा के ईमानदार और पारदर्शी कार्य प्रणाली के आदर्श कहे जाने वाले लोकप्रिय मुख्यमंत्री नायक सिंह सैनी की रैली नई अनाज मंडी जाटोली में प्रस्तावित है । यह समय भी आ गया , रैली में एक सप्ताह का समय बाकी रह गया है। पटौदी जाटोली मंडी परिषद के विभिन्न 22 वार्ड में क्या कुछ विकास कार्य हुए ? यह स्थानीय निवासी और चुने हुए जन प्रतिनिधि ही बेहतर जानते हैं।
20 फरवरी शुक्रवार को पटौदी जाटोली मंडी परिषद के सदन में 1 वर्ष बाद सबसे अधिक चर्चा और मुद्दा पटौदी जाटोली मंडी परिषद में भ्रष्टाचार का छाया रहा। अब ऐसे में लाख टके का सवाल यह है कि परिषद के हाउस अथवा सदन में भ्रष्टाचार को लेकर एक के बाद एक गंभीर आरोप लगाने वाले परिषद के ही दूसरे नंबर के सबसे अधिक प्रभावशाली जनप्रतिनिधि और नेता क्या 22 मार्च को महा विकास रैली के मंच पर सीएम रैली के सामने भी भ्रष्टाचार के मुद्दे को इस अंदाज में उठा सकेंगे ? जिस अंदाज में परिषद की बैठक में उठाया गया । इससे भी बड़ा सवाल यह है कि जब जनप्रतिनिधियों को मालूम है कि पटौदी जाटोली मंडी परिषद में भ्रष्टाचार अपने चरम पर है , तो फिर भ्रष्टाचार के विरुद्ध एक्शन लेने या करवाई किया जाने के लिए लिखने के वास्ते किसने हाथ पकड़े हुए हैं या फिर किसने मना किया हुआ है ?
करीब एक महीना पहले पटौदी जाटोली मंडी परिषद हाउस में परिषद सीमा क्षेत्र में विभिन्न कार्यों के टेंडर में कथित भ्रष्टाचार के चिल्ला चिल्ला कर आरोप लगे । भुगतान प्रक्रिया में और पारदर्शिता में भी हाउस में सवाल उठाए गए । इतना ही नहीं परिषद सीमा क्षेत्र में बने हुए विभिन्न सार्वजनिक भवन- सामुदायिक भवन, इनडोर स्टेडियम , सार्वजनिक पार्क व परिषद अधिकार के अन्य भवन की देखभाल और मेंटेनेंस के खर्च के मामले में भी भ्रष्टाचार का आरोप दिल खोल कर लगाया गया। यह बात अलग है कि इस प्रकार का दुस्साहस बहुत कम जनता के चुने हुए जन प्रतिनिधि ही दिखाने का साहस रखते हैं । लेकिन इससे बड़ा भी साहस वह है जो अपने समर्थकों को या स्वयं भ्रष्टाचार के खिलाफ एक्शन लेने या कार्रवाई के लिए संबंधित एजेंसी या विभाग को लिखे। भ्रष्टाचार के खिलाफ एंटी करप्शन ब्यूरो, मुख्यमंत्री उड़ान दस्ता सहित और भी अन्य सरकारी एजेंसियां हर समय एक्टिव रहती हैं। अब सवाल यह है कि जब जनप्रतिनिधियों को यह मालूम है कि परिषद में भ्रष्टाचार हो रहा है और वह भी गंभीर तरीके से तो फिर अभी तक इस भ्रष्टाचार को रोकने के लिए या भ्रष्टाचार फैलाने वालों के खिलाफ एक्शन लेने के लिए अधिकृत तरीके से किसी भी एजेंसी को शिकायत क्यों नहीं भेजी जा सकी?
अब जिज्ञासा इसी बात और मुद्दे को लेकर है कि 22 मार्च संडे को नई अनाज मंडी जाटोली परिसर में प्रस्तावित महा विकास रैली के मंच पर परिषद सीमा क्षेत्र में विकास के लिए कितनी रकम की डिमांड की जाएगी ? या फिर सत्ताधारी भाजपा और मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी की तरह ईमानदारी और पारदर्शिता के प्रतिबिंब के सामने भ्रष्टाचार का मुद्दा एक बार फिर से उसी प्रकार से उठाया जाएगा, जिस प्रकार से एक महीना पहले परिषद हाउस की बैठक में उठाया गया !
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