धर्म जोड़ो यात्रा पावन वाल्मीकि तीर्थ अमृतसर से अयोध्या तक
वाल्मीकि रामायण के संदेश के साथ समौरा से पावन वाल्मीकि तीर्थ अमृतसर तक
लेखक-तेजिन्द्र सिंह तेजी
भारत की सनातन परंपरा में यात्राओं का विशेष महत्व रहा है। यात्राएँ केवल स्थान परिवर्तन नहीं होतीं, बल्कि वे विचार, संस्कृति और आस्था को एक स्थान से दूसरे स्थान तक पहुँचाने का माध्यम बनती हैं। ऐसी ही एक ऐतिहासिक और प्रेरणादायी यात्रा का आयोजन 5 मार्च से 8 मार्च 2026 तक किया गया, जिसे “धर्म जोड़ो यात्रा” के नाम से जाना गया। यह यात्रा अमृतसर स्थित पावन वाल्मीकि तीर्थ से प्रारंभ होकर अयोध्या धाम तक पहुँची। जिसका समापन पावन वाल्मीकि तीर्थ अमृतसर में हुआ। यात्रा को भगवान वाल्मीकि वाणी प्रचार महासभा, अंतरराष्ट्रीय वाल्मीकि मजहबी सिख धर्म समाज व पावन वाल्मीकि तीर्थ एक्शन कमेटी अमृतसर द्वारा संचालित किया गया।
इस यात्रा की विशेषता यह थी कि इसमें संत समाज के साथ-साथ बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं ने भाग लिया और साथ ही “हर घर वाल्मीकि रामायण अभियान” के अंतर्गत संतों को वाल्मीकि रामायण की भेंट दी गई। यह केवल एक धार्मिक यात्रा नहीं थी, बल्कि समाज को जोड़ने, संस्कृति को मजबूत करने और महर्षि वाल्मीकि की अमर कृति के संदेश को जन-जन तक पहुँचाने का एक महान प्रयास था।

यात्रा का आरंभ: वाल्मीकि तीर्थ अमृतसर से
5 मार्च 2026 की पावन सुबह अमृतसर के ऐतिहासिक वाल्मीकि तीर्थ में आध्यात्मिक वातावरण के बीच इस यात्रा का शुभारंभ हुआ। मंदिर परिसर में संतों, श्रद्धालुओं और समाज के विभिन्न वर्गों के लोगों की उपस्थिति ने इस कार्यक्रम को अत्यंत भव्य बना दिया।
पूजा-अर्चना और आशीर्वचन के साथ यात्रा का प्रारंभ हुआ। इस अवसर पर संतों ने महर्षि वाल्मीकि की शिक्षाओं और रामायण के आदर्शों को जीवन में अपनाने का संदेश दिया। जैसे ही यात्रा आगे बढ़ी, “जय श्री राम” और “जय महर्षि वाल्मीकि” के जयघोष से वातावरण गुंजायमान हो उठा।इस यात्रा का उद्देश्य केवल धार्मिक स्थलों की यात्रा करना नहीं था, बल्कि समाज को एक सूत्र में बाँधना और सनातन संस्कृति के मूल्यों को जन-जन तक पहुँचाना था।
संत समाज का नेतृत्व और श्रद्धालुओं की सहभागिता
इस ऐतिहासिक यात्रा का नेतृत्व पूज्य संत रविन्द्र गिरि जी महाराज व परगट नाथ जी महाराज ने किया। उनके मार्गदर्शन और आशीर्वाद से यह यात्रा अत्यंत अनुशासित और प्रेरणादायी रही।यात्रा में पंजाब के विभिन्न प्रमुख डेरों, आश्रमों और मंदिरों के संतों ने भाग लिया। संत समाज की उपस्थिति ने इस यात्रा को आध्यात्मिक शक्ति प्रदान की। उनके साथ कुल 1440 श्रद्धालु भी इस यात्रा में सम्मिलित हुए।
यात्रा के दौरान संतों ने अनेक स्थानों पर प्रवचन दिए और लोगों को धर्म, संस्कृति और सामाजिक एकता का संदेश दिया। उन्होंने यह भी बताया कि रामायण केवल एक धार्मिक ग्रंथ नहीं, बल्कि जीवन को सही दिशा देने वाली प्रेरणा है।संतों का यह संदेश स्पष्ट था कि यदि समाज को मजबूत बनाना है तो धर्म, संस्कृति और नैतिक मूल्यों को जीवन में अपनाना होगा।

हर घर वाल्मीकि रामायण अभियान की भूमिका
इस यात्रा का एक विशेष और महत्वपूर्ण पक्ष “हर घर वाल्मीकि रामायण अभियान” भी रहा। इस अभियान का उद्देश्य महर्षि वाल्मीकि की महान कृति रामायण को हर घर तक पहुँचाना और लोगों को उसके आदर्शों से जोड़ना है।इस अभियान को प्रारंभ हुए एक वर्ष पूरा हो चुका है। गत वर्ष 6 मार्च 2025 को इस अभियान का शुभारंभ दिल्ली से माननीय केंद्रीय ऊर्जा एवं शहरी आवासन मंत्री मनोहर लाल जी द्वारा किया गया था।तब से यह अभियान निरंतर देश और विदेश में वाल्मीकि रामायण के प्रचार-प्रसार का कार्य कर रहा है।
इस यात्रा के दौरान भी संत समाज को सम्मानपूर्वक वाल्मीकि रामायण भेंट की गई। यह केवल एक ग्रंथ की भेंट नहीं थी, बल्कि ज्ञान, संस्कृति और आदर्शों का प्रसार था।
25 सदस्यीय टीम का नेतृत्व
इस यात्रा में “हर घर वाल्मीकि रामायण अभियान” की 25 सदस्यीय टीम ने सक्रिय भूमिका निभाई जो करनाल जिला के गांव समौरा से पावन वाल्मीकि तीर्थ अमृतसर तक गई। इस टीम का नेतृत्व अभियान के अंतरराष्ट्रीय संयोजक तेजिन्द्र सिंह तेजी व सह संयोजक रंजना सिंह ने किया।तेजिन्द्र सिंह तेजी और उनकी टीम ने संतों और श्रद्धालुओं के साथ मिलकर इस यात्रा को सफल बनाने में महत्वपूर्ण योगदान दिया। यात्रा के दौरान विभिन्न स्थानों पर संतों का सम्मान किया गया और उन्हें वाल्मीकि रामायण भेंट की गई।टीम के सदस्यों ने श्रद्धालुओं को रामायण के संदेशों के बारे में जानकारी दी और लोगों को इस अभियान से जुड़ने के लिए प्रेरित किया।
तेजिन्द्र सिंह तेजी ने अपने संबोधन में कहा कि महर्षि वाल्मीकि द्वारा रचित रामायण केवल भारत ही नहीं, बल्कि पूरी मानवता के लिए प्रेरणा का स्रोत है। यदि समाज रामायण के आदर्शों को अपनाए, तो सामाजिक समरसता और नैतिकता स्वतः स्थापित हो सकती है।
अयोध्या धाम में यात्रा का समापन
चार दिनों की यह पवित्र यात्रा अंततः अयोध्या धाम पहुँच कर श्री राम लल्ला के दर्शनों उपरांत वापिस 8 मार्च को अमृतसर पावन वाल्मीकि तीर्थ पर पूर्ण हुई। भगवान श्री राम की जन्मभूमि में पहुँचकर सभी श्रद्धालुओं और संतों ने प्रभु श्रीराम के दर्शन किए और समाज की सुख-समृद्धि के लिए प्रार्थना की।वाल्मीकि तीर्थ पर यात्रा के समापन के अवसर पर एक विशेष कार्यक्रम आयोजित किया गया जिसमें संतों ने इस यात्रा को ऐतिहासिक और प्रेरणादायी बताया। उन्होंने कहा कि इस प्रकार की यात्राएँ समाज में धार्मिक जागरूकता और एकता को मजबूत करती हैं।“संत समाज धर्म जोड़ो यात्रा” वास्तव में एक आध्यात्मिक अभियान बनकर उभरी, जिसने हजारों लोगों को रामायण के संदेश से जोड़ने का कार्य किया।अमृतसर से अयोध्या तक की यह यात्रा केवल दूरी तय करने की यात्रा नहीं थी, बल्कि यह आस्था, संस्कृति और समाज को जोड़ने की यात्रा थी। संतों का मार्गदर्शन, श्रद्धालुओं की आस्था और “हर घर वाल्मीकि रामायण अभियान” का उद्देश्य – इन सभी ने मिलकर इसे एक ऐतिहासिक और प्रेरणादायी अध्याय बना दिया।महर्षि वाल्मीकि द्वारा रचित रामायण युगों-युगों तक मानवता को सत्य, धर्म और आदर्श जीवन का मार्ग दिखाती रहेगी।और इसी संदेश के साथ यह यात्रा समाप्त होकर भी एक नई शुरुआत का संकेत देती है -एक ऐसे समाज की शुरुआत, जहाँ हर घर में रामायण हो, हर मन में राम का आदर्श हो, और हर व्यक्ति में मानवता का प्रकाश हो।
लेखक-तेजिन्द्र सिंह तेजी
हर घर वाल्मीकि रामायण अभियान के संयोजक है।


