केयू में आयोजित सेमिनार से महिला सशक्तिकरण व आरक्षण को मिली मजबूती
कुरुक्षेत्र/6 मई/अटल हिन्द ब्यूरो
कुरुक्षेत्र विश्वविद्यालय में “सशक्त नारी, सशक्त समाज, सशक्त राष्ट्र” विषय पर कुरुक्षेत्र विश्वविद्यालय और सूचना, जनसंपर्क एवं भाषा विभाग के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित सेमिनार एवं प्रदर्शनी महिला सशक्तिकरण व आरक्षण की दिशा में प्रभावशाली और दूरदर्शी पहल के रूप में उभरा। इस आयोजन ने यह स्पष्ट संदेश दिया कि भारत के विकास का मार्ग महिलाओं के सशक्तिकरण से होकर ही गुजरता है। इस कार्यक्रम में करीब 3000 महिलाओं ने उत्साहपूर्वक भाग लेकर इसकी व्यापकता और प्रभाव को और भी सशक्त बनाया।
मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी द्वारा नारी, किसान, युवा और गरीब को विकास के चार स्तंभ बताना उनकी समावेशी सोच को दर्शाता है। विशेष रूप से महिलाओं के लिए सुरक्षित शिक्षा वातावरण, नजदीकी कॉलेजों की स्थापना और स्वयं सहायता समूहों के माध्यम से आर्थिक आत्मनिर्भरता को बढ़ावा देने की बात, जमीनी स्तर पर परिवर्तन की दिशा में सकारात्मक संकेत देती है।
महिला आरक्षण के संदर्भ में भी यह आयोजन विशेष महत्व रखता है। ‘नारी शक्ति वंदन अधिनियम’ जैसे ऐतिहासिक कदमों से महिलाओं की राजनीतिक भागीदारी को नई दिशा मिली है, जिससे निर्णय लेने की प्रक्रिया में उनकी भूमिका और सशक्त होगी। यह पहल न केवल समान प्रतिनिधित्व सुनिश्चित करने की दिशा में महत्वपूर्ण है, बल्कि समाज में लैंगिक संतुलन और न्याय को भी मजबूत आधार प्रदान करती है।
इस कार्यक्रम की सबसे बड़ी विशेषता यह रही कि इसमें केवल विचारों का आदान-प्रदान नहीं हुआ, बल्कि ठोस नीतिगत निर्णयों और योजनाओं की भी घोषणा की गई।
महिला शोधार्थियों और अंतर्राष्ट्रीय छात्राओं के लिए 300 क्षमता वाले आधुनिक छात्रावास का निर्माण, एआई सेंटर ऑफ एक्सीलेंस को सशक्त बनाने की पहल, तथा प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी कर रही छात्राओं को 50 प्रतिशत फीस छूट जैसे कदम महिला शिक्षा और तकनीकी सशक्तिकरण की दिशा में महत्वपूर्ण साबित हो सकते हैं।
कुलगुरु प्रो. सोमनाथ सचदेवा ने समानता, न्यायसंगत समानता और समावेशिता जैसे महत्वपूर्ण सिद्धांतों पर प्रकाश डालते हुए यह रेखांकित किया कि केवल अधिकार प्रदान करना पर्याप्त नहीं है, बल्कि महिलाओं को वास्तविक अवसर और भागीदारी देना भी उतना ही आवश्यक है। यह दृष्टिकोण आधुनिक समाज और नीति निर्माण की मूल आवश्यकता को उजागर करता है।
प्रदर्शनी ने इस आयोजन को और अधिक प्रभावशाली बनाया, जहां विभिन्न क्षेत्रों विज्ञान, खेल, प्रशासन और कला में महिलाओं की उपलब्धियों को सशक्त तरीके से प्रस्तुत किया गया। यह न केवल प्रेरणादायक रहा, बल्कि समाज में सकारात्मक सोच को भी बढ़ावा देने वाला कदम साबित हुआ।
फिर भी, किसी भी योजना की वास्तविक सफलता उसके प्रभावी क्रियान्वयन पर निर्भर करती है। आवश्यक है कि इन घोषणाओं को केवल मंच तक सीमित न रखकर जमीनी स्तर पर लागू किया जाए, ताकि ग्रामीण और वंचित वर्ग की महिलाओं तक भी इनका लाभ पहुंच सके।
कुल मिलाकर, यह सेमिनार महिला सशक्तिकरण की दिशा में एक ठोस और सकारात्मक पहल के रूप में सामने आया है। यदि घोषित योजनाओं को प्रभावी ढंग से लागू किया गया, तो यह निश्चित रूप से “विकसित भारत-2047” के लक्ष्य को प्राप्त करने में मील का पत्थर साबित हो सकता है।


