पंजाब में मजदूरों के लिए अच्छी खबर, लेकिन सदन में फिर बवाल
चंडीगढ़ /01 मई /अटल हिन्द ब्यूरो
1 मई दिवस पर पंजाब विधानसभा ने 13 साल बाद एक अहम फैसला लिया। न्यूनतम मजदूरी में 15% बढ़ोतरी का प्रस्ताव सर्वसम्मति से पास हो गया। सरकारी और प्राइवेट दोनों क्षेत्रों के रजिस्टर्ड मजदूरों को इसका फायदा मिलेगा।मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान ने इसे मजदूर वर्ग के प्रति सच्चा सम्मान बताया। उन्होंने कहा कि 2012 के बाद महंगाई तो बढ़ती रही, लेकिन बेस मजदूरी नहीं बढ़ी थी। आज के इस खास दिन पर मजदूरों की मेहनत को थोड़ा सा सम्मान दिया गया है।
CM मान ने आगे कहा कि शिक्षा ही गरीब और मजदूर परिवारों की किस्मत बदल सकती है। उनकी सरकार स्कूलों में सुधार कर रही है। हाल ही में JEE Main में 359 बच्चों ने सफलता पाई, जिनमें कई मजदूरों के बच्चे थे। उन्होंने कहा कि जब ये बच्चे अच्छी नौकरी पाएंगे, तो पूरे परिवार की जिंदगी बदल जाएगी।

विवाद और वॉकआउट
सत्र के दौरान माहौल अचानक बिगड़ गया। कांग्रेस और अकाली दल के विधायकों ने आरोप लगाया कि मुख्यमंत्री भगवंत मान शराब पीकर सदन में आए हैं। इस पर हंगामा हुआ, नारेबाजी हुई और कांग्रेस विधायकों ने सदन से वॉकआउट कर दिया। बाहर “शराबी मुख्यमंत्री मुर्दाबाद” के नारे लगे।नेता प्रतिपक्ष प्रताप बाजवा ने कहा कि यह गंभीर आरोप है, इसलिए एल्कोमीटर या ब्रेथ एनालाइजर टेस्ट करवाया जाना चाहिए। स्पीकर ने कहा कि बिना नाम लिए किसी पर आरोप नहीं लगाया जा सकता।
CM का जवाब और शुक्राना यात्रा
भगवंत मान ने विपक्ष पर पलटवार करते हुए कहा कि सत्र सुहावना शुरू हुआ था, लेकिन कांग्रेस इसे बर्दाश्त नहीं कर पाई। उन्होंने पिछली सरकारों पर भी निशाना साधा कि 13 साल तक मजदूरों की मजदूरी बढ़ाने की कोई परवाह नहीं की।
उन्होंने मई दिवस को याद करते हुए शिकागो के उन मजदूरों को श्रद्धांजलि दी, जिन्होंने 1886 में बेहतर काम की स्थितियों के लिए अपनी जानें दी थीं।इसके अलावा, सदन में जागत जोत श्री गुरु ग्रंथ साहिब सत्कार (संशोधन) एक्ट-2026 पास होने पर CM मान ने ऐलान किया कि वे 6 मई से शुक्राना यात्रा निकालेंगे। यह यात्रा 9 मई तक चलेगी और आनंदपुर साहिब से शुरू होकर कई महत्वपूर्ण गुरुद्वारों में माथा टेकेंगी। इसका मकसद गुरु ग्रंथ साहिब की बेअदबी रोकने वाले सख्त कानून के लिए वाहेगुरु का शुक्रिया अदा करना है।
बीजेपी का पलटवार
दूसरी तरफ, भाजपा ने चंडीगढ़ के सेक्टर-37 में अपना अलग “जनता दी विधानसभा” सत्र चलाया। प्रदेश अध्यक्ष सुनील जाखड़ ने आरोप लगाया कि कैबिनेट बैठक में दो मंत्रियों के साथ बदतमीजी हुई। उन्होंने भी मुख्यमंत्री पर नशे में आने का इशारा करते हुए ब्रेथ एनालाइजर टेस्ट की मांग की।
मजदूरों के लिए लंबे समय बाद एक सकारात्मक कदम उठा है, लेकिन पंजाब की राजनीति में विवाद और आरोप-प्रत्यारोप का सिलसिला जारी है। एक तरफ मजदूरी बढ़ाने और शिक्षा सुधार की बात, दूसरी तरफ शराब, बेअदबी और राजनीतिक आरोप। आम आदमी देख रहा है कि इन सबके बीच उसकी रोजी-रोटी और भविष्य कितना बेहतर होता है।


