जुनून, मेहनत और सीखने की लगन से तय होता है सफलता का रास्ताः अजय जेठी
अच्छी कहानी समाज का आईना होती हैः लेखक श्याम सखा श्याम
कुवि में आठवां हरियाणा अंतरराष्ट्रीय फिल्म महोत्सवः दूसरे दिन सिनेमा, संस्कृति और संवाद का अनोखा संगम
कुरुक्षेत्र/26 मार्च/अटल हिन्द ब्यूरो
कुरुक्षेत्र विश्वविद्यालय के कुलगुरु प्रो. सोमनाथ सचदेवा के मार्गदर्शन में युवा एवं सांस्कृतिक कार्यक्रम विभाग द्वारा संस्कृति सोसाइटी फॉर आर्ट एंड कल्चरल डेवलपमेंट, कुरुक्षेत्र के सहयोग कला, संस्कृति और सिनेमा के रंगों से सजा आठवां हरियाणा अंतरराष्ट्रीय फिल्म महोत्सव का दूसरा दिन नई ऊर्जा और रचनात्मकता के साथ आयोजित हुआ। श्रीमद्भागवत गीता सदन और सीनेट हॉल में आयोजित कार्यक्रमों ने दर्शकों को न केवल मनोरंजन प्रदान किया, बल्कि विचारों और अनुभवों के आदान-प्रदान का सशक्त मंच भी दिया।
महोत्सव के दूसरे दिन की शुरुआत प्रसिद्ध अभिनेता अजय जेठी की प्रेरणादायक बातचीत से हुई। पंजाबी फिल्मों के इस चर्चित अभिनेता ने अपने अभिनय सफर, संघर्ष और अंतरराष्ट्रीय अनुभवों को साझा करते हुए युवाओं को प्रेरित किया। उन्होंने बताया कि थिएटर से फिल्मों तक का उनका सफर चुनौतियों से भरा रहा, लेकिन कड़ी मेहनत, जुनून और निरंतर सीखने की भावना ने उन्हें आगे बढ़ने की ताकत दी। अजय जेठी ने स्पेनिश सिनेमा से अपने जुड़ाव का जिक्र करते हुए कहा कि अंतरराष्ट्रीय सिनेमा के साथ काम करने से कलाकारों को नए अनुभव मिलते हैं और उनके दृष्टिकोण का विस्तार होता है। उन्होंने कहा कि आज के दौर में भारतीय कलाकारों के लिए वैश्विक मंच पर अपनी प्रतिभा दिखाने के अनेक अवसर मौजूद हैं।
उन्होंने युवाओं को संदेश दिया कि वे अपने सपनों को पूरा करने के लिए निरंतर प्रयास करते रहें और कला के प्रति समर्पण बनाए रखें। उनके विचारों ने उपस्थित विद्यार्थियों और युवा फिल्मकारों को काफी प्रेरित किया।
साहित्य और सिनेमा के गहरे संबंधों पर चर्चा करते हुए प्रख्यात लेखक श्याम सखा श्याम ने कहानी कहने की कला और उसकी सामाजिक भूमिका पर विस्तार से प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि सिनेमा और साहित्य दोनों ही समाज के विचारों, भावनाओं और वास्तविकताओं को अभिव्यक्त करने के सशक्त माध्यम हैं। उन्होंने कहा, “अच्छी कहानी वही होती है जो समाज का आईना बन सके और लोगों को सोचने के लिए प्रेरित करे।” श्याम सखा श्याम ने युवाओं को संदेश दिया कि कहानी केवल मनोरंजन का साधन नहीं, बल्कि समाज में सकारात्मक बदलाव लाने का माध्यम भी हो सकती है। उनके विचारों ने उपस्थित युवा फिल्मकारों और विद्यार्थियों को गहराई से सोचने और अपनी रचनात्मकता को सामाजिक सरोकारों से जोड़ने के लिए प्रेरित किया।
कार्यक्रम की एक और विशेष आकर्षण राजरानी मल्हान रहीं, जिन्होंने अपनी बहुआयामी प्रतिभा और प्रेरणादायक जीवन यात्रा से सभी को प्रभावित किया। राष्ट्रीय शिक्षक पुरस्कार से सम्मानित राजरानी मल्हान ने कहा कि उम्र केवल एक संख्या है, असली पहचान समर्पण और ऊर्जा से बनती है। उन्होंने संगीत, नृत्य और संस्कृति के माध्यम से युवाओं को अपनी जड़ों से जुड़े रहने का संदेश दिया।
वहीं प्रसिद्ध निर्देशक स्वाति चौहान ने अपनी फिल्म “सायरा खान स्टोरी” से जुड़े अनुभव साझा करते हुए सच्ची घटनाओं पर फिल्म निर्माण की चुनौतियों और जिम्मेदारियों पर विस्तार से चर्चा की। पूरे सत्र का संचालन डॉ. आबिद अली ने किया, जिन्होंने संवाद को रोचक और सारगर्भित बनाए रखा।
फेस्टिवल निदेशक धर्मेन्द्र डांगी ने बताया कि दूसरे दिन की फिल्म स्क्रीनिंग भी बेहद खास रही। ब्रदर्स, दो खेत, तुम कहाँ होते, मीठा दुख, पंछी, विदेशी बहू, रालदू रॉबिनहुड, दो होला जब साथ, ब्रेक रूम, रेट्रो, अपेक्षा, आदत, दुर्गा, प्रतिष्ठा, पानी की फुसफुसाहट, जल कुमुदिनी, शीतला माता गुरुग्रामे आली, सूरजकुंड शिल्प मेला और अफ्रीका ब्लांका जैसी फिल्मों ने सामाजिक मुद्दों, रिश्तों, संस्कृति और आधुनिक जीवन की जटिलताओं को बड़े पर्दे पर प्रभावशाली ढंग से प्रस्तुत किया।
उन्होंने बताया कि कुल मिलाकर, महोत्सव का दूसरा दिन केवल फिल्मों के प्रदर्शन तक सीमित नहीं रहा, बल्कि यह विचारों, भावनाओं और रचनात्मकता का उत्सव बन गया, जहां कलाकारों, विद्यार्थियों और दर्शकों के बीच सार्थक संवाद ने एक नई प्रेरणा को जन्म दिया।
इस अवसर पर प्रो. शुचिस्मिता, डॉ. आबिद अली, सिमरन बिश्नोई, साक्षी, रिया, जश्न सहित शिक्षक व विद्यार्थी मौजूद रहे।


