यूपी के सीएम अजय सिंह बिष्ट उर्फ़ योगी आदित्यनाथ ,और हरियाणा के पूर्व सीएम मनोहर खट्टर और नायब सैनी का नाम गायब !नई दिल्ली
एडीआर के अनुसार इन मुख्यमंत्रियों पर ऐसे आरोप हैं जिनमें पांच साल या उससे अधिक की सजा हो सकती है. ये गैर-जमानती और कोग्निजेबल या चुनावी अपराध हैं. इसके अलावा कुछ पर राजकोष की हानि से संबंधित अपराध हैं. वहीं कुछ पर हमला, हत्या, अपहरण, बलात्कार, जनप्रतिनिधित्व अधिनियम की धारा 8 के अंतर्गत उल्लिखित अपराध है, जबकि कुछ मामले भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम और महिलाओं एवं बच्चों के विरुद्ध अपराध से जुड़े हैं.
1-मुख्यमंत्री सिद्धारमैया: कर्नाटक के मुख्यमंत्री सिद्धारमैया के खिलाफ दर्ज कुल 13 मामलों में छह केस विभिन्न आईपीसी धाराओं के तहत कथित गंभीर अपराध वाले हैं. उनके खिलाफ आईपीसी धारा-435, 171 ई, 171 सी, 171 एफ, 143 और सामान्य उद्देश्य के अभियोजन में किए गए अपराध के दोषी गैरकानूनी सभा के प्रत्येक सदस्य से संबंधित आईपीसी धारा-149 सहित अन्य मामले दर्ज हैं.
2-हेमंत सोरेन: झारखंड के सीएम हेमंत सोरेन पर इस लिस्ट में शामिल हैं. उन पर कुल 12 केस दर्ज हैं. इनमें सात केस गंभीर मामलों से जुड़े हैं. उनके खिलाफ चुनाव में अनुचित प्रभाव से संबंधित आईपीसी धारा-171 एफ, वसीयत आदि की जालसाजी से संबंधित आईपीसी धारा-467 के अलावा धारा-468, 466, 420 और धारा-379 सहित कई मामले दर्ज हैं.
3-देवेंद्र फडणवीस के खिलाफ केस: इसके अलावा महाराष्ट्र सीएम देवेंद्र फडणवीस पर के कुल चार मामले दर्ज हैं. इनमें दो अपराध गंभीर धाराओं के तहत दर्ज किए गए हैं. उनके खिलाफ धोखाधड़ी और बेईमानी से संपत्ति की डिलीवरी के लिए प्रेरित करने से संबंधित आईपीसी की धारा-420. आपराधिक विश्वासघात के लिए दंड से संबंधित धारा 406). धोखाधड़ी के लिए दंड से संबंधित धारा-417 के साथ अन्य कई मामले में केस दर्ज हैं.
4-सुखविंदर सिंह: हिमाचल प्रदेश के मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह पर गंभीर अपराध समेत कुल चार केस दर्ज हैं. वहीं, केरल के सीएम पिनराई विजयन के खिलाफ कुल दो केस दर्ज हैं और दोनों ही मामले गंभीर धाराओं के तहत दर्ज किए गए हैं. उनके खिलाफ आईपीसी की धारा 181, 143, 188, 341, 336, गलत सूचना देने से संबंधित आईपीसी की धारा 177 समेत कई मामलों में केस दर्ज हैं.
5-पिनाराई विजयन: केरल के मुख्यमंत्री पिनाराई विजयन पर कुल दो केस दर्ज हैं. उन के खिलाफ आपराधिक विश्वासघात की सजा से संबंधित आईपीसी की धारा-406, धोखाधड़ी और बेईमानी से संपत्ति की डिलीवरी के लिए प्रेरित करने से जुड़ी आईपीसी की धारा-420 के अलावा धारा-120बी और 425 के तहत केस दर्ज हैं
6-सीएम तमांग पर दर्ज आपराधिक केस: सिक्किम के सीएम पीएस तमांग पर भी गंभीर धाराओं के तहत केस दर्ज है. तमांग पर आपराधिक विश्वासघात के लिए आईपीसी धारा-406, संपत्ति के बेईमानी से गबन से संबंधित धारा-403 और आपराधिक षड्यंत्र के लिए दंड से संबंधित धारा-120 बी जैसे मामलों में केस दर्ज हैं.
7-मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान: वहीं, पंजाब के मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान भी गंभीर धाराओं के तहत एक मामले का सामना कर रहे हैं. मान लोक सेवक को उसके कर्तव्य से रोकने के लिए चोट पहुंचाने से संबंधित आईपीसी धारा-332, दंगा करने से संबंधित आईपीसी धारा-147 के अलावा धारा-149, धारा-353 और धारा-188 के तहत आपराधिक मामलों का सामना कर रहे हैं.
8-मुख्यमंत्री मोहन चरण माझी: ओडिशा के मुख्यमंत्री मोहन चरण माझी के खिलाफ गैरकानूनी भीड़ का सदस्य होने से संबंधित आईपीसी धारा-143, गलत तरीके से रोकने के लिए दंड से संबंधित 1 आरोप धारा-341 और अश्लील कृत्यों के लिए धारा-294 जैसे मामले में केस दर्ज हैं.
9-भजन लाल शर्मा: राजस्थान के मुख्यमंत्री भजन लाल शर्मा भी लोक सेवक को उसके कर्तव्य निर्वहन से रोकने और हमला करने के लिए आईपीसी धारा-353 के साथ-साथ धारा 149 संबंधित केस का सामना कर रहे हैं.
10-मुख्यमंत्री रेवंत रेड्डी: ADR के मुताबिक तेलंगाना के मुख्यमंत्री रेवंत रेड्डी के खिलाफ कुल 89 केस दर्ज हैं. इनमें से 72 केस गंभीर धाराओं के तहत दर्ज किए गए हैं. उनके खिलाफ आईपीसी की धारा-506, धारा 505 (2) धारा-420) और धारा-477 ए सहित अन्य कई धाराओं में केस दर्ज हैं.
11-एमके स्टालिन: तमिलनाडु के मुख्यमंत्री एमके स्टालिन पर कुल 47 केस दर्ज हैं, इनमें से 11 आईपीसी की गंभीर धाराओं के तहत आते हैं. उनके खिलाफ आईपीसी की धारा-171 G, धारा-153A, धारा-171 F, 171 सी और 171 आई समेत कई अन्य धाराओं के तहत केस दर्ज हैं.
इसी के चलते केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने बुधवार को संविधान में 130 वां संशोधन पेश किया, जिसके तहत गंभीर आरोपों में गिरफ्तार और 30 दिनों की जेल की सजा काट रहे प्रधानमंत्री, मुख्यमंत्रियों और केंद्र, राज्यों के साथ-साथ केंद्र शासित प्रदेशों के मंत्रियों को पद से हटाने का प्रावधान है.
विपक्ष का कहना है कि यह संशोधन खतरनाक है क्योंकि इससे आपराधिक मामलों में दोषी ठहराए बिना भी निर्वाचित प्रतिनिधियों को पद से हटाया जा सकता है. ऐसे में सवाल उठाता है कि भारत में कितने मुख्यमंत्री गंभीर आरोपों का सामना कर रहे हैं.