योजना में बड़े स्तर पर वित्तीय गड़बड़ी और गबन किया गया
जयपुर /5 अप्रैल /अटल हिन्द ब्यूरो
राजस्थान गवर्नमेंट हेल्थ स्कीम (RGHS) में सामने आए घोटाले के मामले में सीकर से एक डॉक्टर और एक लैब संचालक की गिरफ्तारी के बाद अब एसओजी ने पूरे प्रदेश में इस योजना की व्यापक जांच शुरू करने का निर्णय लिया है। सीकर में बड़े पैमाने पर अनियमितताओं के पुख्ता सबूत मिलने के बाद जांच एजेंसी ने अपनी कार्रवाई का दायरा बढ़ा दिया है।
अब तक की जांच में यह स्पष्ट हुआ है कि सरकारी डॉक्टरों और निजी लैब्स के बीच मिलीभगत से इस योजना में बड़े स्तर पर वित्तीय गड़बड़ी और गबन किया गया। मरीजों की जरूरत के बिना जांच लिखने, फर्जी पर्चियां तैयार करने और बिल बढ़ाने को लेकर डॉक्टरों और लैब संचालकों के बीच कथित तौर पर सौदेबाजी की भी जांच की जा रही है। प्रारंभिक निष्कर्षों में यह भी सामने आया है कि कई लैब और डॉक्टरों के बीच एक संगठित नेटवर्क सक्रिय था।
स्वास्थ्य विभाग की शिकायत पर दर्ज हुआ मामला
एसओजी के डीआईजी परिस देशमुख के अनुसार, स्वास्थ्य विभाग की ओर से दर्ज कराई गई शिकायत में आरोप लगाया गया है कि RGHS योजना के तहत कुछ लैब संचालकों और सरकारी डॉक्टरों ने साजिश के तहत मिलीभगत कर सरकारी धन का दुरुपयोग किया। यह योजना सरकारी कर्मचारियों को कैशलेस उपचार सुविधा देने के लिए बनाई गई थी, जिसमें इलाज का खर्च सरकार द्वारा अस्पतालों को वापस दिया जाता है।
जांच में सामने आए फर्जीवाड़े के तरीके
प्रारंभिक जांच में पाया गया है कि कई मामलों में ऐसे मरीजों के नाम पर जांच बिल उठाए गए, जो संबंधित डॉक्टर के पास गए ही नहीं थे। इसके अलावा, आवश्यकता से अधिक और महंगी जांचें (जैसे MRI) लिखी गईं और उन्हें केवल चयनित निजी लैब्स से ही कराया गया, जिससे बिल कई गुना बढ़ गया। कुछ मामलों में सामान्य MRI को कॉन्ट्रास्ट MRI दिखाकर अधिक भुगतान लिया गया।
यह भी सामने आया कि डॉक्टर की अनुपस्थिति के दिनों में भी फर्जी परामर्श पर्चियां तैयार कर जांच दिखा दी गई। कई मामलों में वास्तविक जांच की तारीखों में हेरफेर कर पोर्टल पर अपलोड किया गया और सरकारी भुगतान प्राप्त किया गया।
गंभीर अनियमितताओं के उदाहरण
जांच में एक मामला सामने आया जिसमें 4 दिसंबर 2023 की MRI रिपोर्ट को 5 दिसंबर 2023 की दिखाकर भुगतान लिया गया, जबकि संबंधित मरीज उस दिन सीकर में मौजूद ही नहीं था। मरीज किसी अन्य अस्पताल में भर्ती था। इसी तरह फर्जी परामर्श पर्चियां बनाकर क्लेम पास कराए गए। जांच के समय यह भी पाया गया कि उस दिन संबंधित सरकारी डॉक्टर अस्पताल में मौजूद नहीं थे।
कुछ मामलों में निजी डॉक्टर के रेफरल को बदलकर सरकारी डॉक्टर के नाम से दिखाया गया ताकि RGHS से भुगतान लिया जा सके। वहीं, कई ऐसे केस भी सामने आए हैं जिनमें मरीजों की जानकारी के बिना उनके नाम पर फर्जी क्लेम दाखिल किए गए।
अब तक की कार्रवाई और आगे की जांच
अब तक की जांच में एक एजेंसी द्वारा करोड़ों रुपये के गबन के संकेत मिले हैं। इसी आधार पर दो लोगों—सीकर के एक लैब संचालक और एक सरकारी डॉक्टर—को गिरफ्तार किया गया है। आगे जांच में जो भी व्यक्ति या संस्था शामिल पाए जाएंगे, उनके खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी।
एसओजी ने स्पष्ट किया है कि मामला केवल दो जिलों तक सीमित नहीं है और अब पूरे प्रदेश में जांच का दायरा बढ़ाया जाएगा, ताकि इस नेटवर्क में शामिल सभी लोगों की पहचान की जा सके।
स्वास्थ्य विभाग की किसी भी भूमिका पर अभी तक प्रत्यक्ष प्रमाण नहीं मिले हैं, लेकिन जांच जारी है और यदि किसी अधिकारी की संलिप्तता सामने आती है तो उसके खिलाफ भी कार्रवाई की जाएगी।


