विज्ञान और प्रौद्योगिकी किसी भी राष्ट्र की प्रगति के प्रमुख स्तंभः प्रो. अजय कुमार सूद
गोयल पुरस्कार वैज्ञानिकों की उत्कृष्ट उपलब्धियों की पहचानः प्रो. सोमनाथ सचदेवा
कुवि में आयोजित हुआ 18वां गोयल पुरस्कार समारोह
कुवि ने किया देश के 8 महान वैज्ञानिकों को गोयल अवार्ड से सम्मानित
कुरुक्षेत्र/ 3 अप्रैल/अटल हिन्द ब्यूरो
कुरुक्षेत्र विश्वविद्यालय के सीनेट हॉल में शुक्रवार को 18वां गोयल पुरस्कार समारोह आयोजित किया गया। इस समारोह में देश के प्रमुख वैज्ञानिकों को उनके उत्कृष्ट शोध, नवाचार और विज्ञान के क्षेत्र में उल्लेखनीय योगदान के लिए सम्मानित किया गया। गोयल अवार्ड कमेटी की और से आयोजित इस भव्य सम्मान समारोह में चार वैज्ञानिकों को गोयल पुरस्कार व 4 वैज्ञानिकों को राजीब गोयल यंग साइंटिस्ट अवार्ड के रूप में सम्मानित किया गया। गोयल पुरस्कार के रूप में वैज्ञानिकों को दो-दो लाख रुपए व राजीब गोयल अवार्ड के रूप में एक लाख रुपए की धनराशि के साथ साथ मेडल व प्रशस्ति पत्र देकर सम्मानित किया गया।
कार्यक्रम में भारत सरकार के प्रधान वैज्ञानिक सलाहकार प्रो. अजय के. सूद मुख्य अतिथि के रूप में उपस्थित रहे, जबकि समारोह की अध्यक्षता कुरुक्षेत्र विश्वविद्यालय के कुलगुरु प्रो. सोमनाथ सचदेवा ने की। समारोह का शुभारंभ दीप प्रज्ज्वलन के साथ हुआ तथा सभी अतिथियों ने गोयल पुरस्कार स्मारिका का विमोचन किया।
मुख्य अतिथि प्रो. अजय के. सूद ने अपने संबोधन में कहा कि विज्ञान और प्रौद्योगिकी किसी भी राष्ट्र की प्रगति के प्रमुख स्तंभ हैं। उन्होंने कहा कि पिछले लगभग पाँच दशकों में भारत ने विज्ञान और प्रौद्योगिकी के क्षेत्र में उल्लेखनीय प्रगति की है। एक समय ऐसा था जब देश में बुनियादी वैज्ञानिक उपकरण भी आसानी से उपलब्ध नहीं होते थे और वैज्ञानिकों को स्वयं उपकरण तैयार करने पड़ते थे, लेकिन आज भारत वैज्ञानिक ज्ञान और तकनीकी विकास के एक महत्वपूर्ण मोड़ पर खड़ा है और “विकसित भारत” बनने की दिशा में तेजी से आगे बढ़ रहा है।
उन्होंने कहा कि आज भारत केवल तकनीक का उपयोग करने वाला देश नहीं, बल्कि तकनीक का निर्माण करने वाला देश बन रहा है। डिजिटल इंडिया, अंतरिक्ष तकनीक, वैक्सीन निर्माण और डीप टेक जैसे क्षेत्रों में भारत ने वैश्विक स्तर पर अपनी क्षमता साबित की है। भविष्य में अनुसंधान, नवाचार और सहयोग के माध्यम से भारत को वैश्विक तकनीकी नेतृत्व की दिशा में आगे बढ़ाना ही हमारा लक्ष्य होना चाहिए।

प्रो. सूद ने बताया कि सरकार विज्ञान, प्रौद्योगिकी और नवाचार को बढ़ावा देने के लिए विभिन्न नीतियों और मिशनों पर कार्य कर रही है। प्रधानमंत्री के विज्ञान, प्रौद्योगिकी एवं नवाचार सलाहकार परिषद सहित कई संस्थागत तंत्र भविष्य की महत्वपूर्ण तकनीकों की पहचान करने और उनके विकास के लिए काम कर रहे हैं। विशेष रूप से क्वांटम तकनीक, डीप टेक और उभरती वैज्ञानिक तकनीकों पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है। प्रो. सूद ने कहा कि अनुसंधान राष्ट्रीय अनुसंधान फाउंडेशन आने वाले समय में देश में अनुसंधान को नई दिशा देगा। इसका उद्देश्य केवल फंडिंग उपलब्ध कराना ही नहीं, बल्कि अकादमिक संस्थानों, उद्योगों और स्टार्टअप्स के बीच सहयोग को मजबूत करना भी है, ताकि शोध को व्यावहारिक उपयोग और नवाचार में बदला जा सके।
उन्होंने बताया कि भारत में शोध और नवाचार के प्रति उत्साह तेजी से बढ़ रहा है, लेकिन फंडिंग और उद्योगों की सीमित भागीदारी अभी भी एक बड़ी चुनौती है। उदाहरण के तौर पर, हाल ही में एडवांस्ड रिसर्च ग्रांट के लिए लगभग 9,000 प्रस्ताव प्राप्त हुए, लेकिन संसाधनों की सीमित उपलब्धता के कारण केवल लगभग 740 परियोजनाओं को ही समर्थन दिया जा सका।
प्रो. सूद ने यह भी बताया कि वैश्विक स्तर पर शोध प्रकाशनों में भारत तीसरे स्थान पर पहुँच चुका है, जो विश्व के कुल शोध उत्पादन का लगभग 6 प्रतिशत है। इसके अलावा, देश में स्टार्टअप्स की संख्या लगभग 2.2 लाख तक पहुँच गई है, जिनमें करीब 12,000 डीप टेक स्टार्टअप्स शामिल हैं। डीप टेक स्टार्टअप्स को बढ़ावा देने के लिए सरकार ने नीतियाँ तैयार की हैं और लगभग 10,000 करोड़ रुपये का फंड ऑफ फंड्स भी बनाया गया है।
उन्होंने वैज्ञानिकों और शिक्षाविदों से आह्वान किया कि वे अपने शोध को केवल अकादमिक दायरे तक सीमित न रखें, बल्कि उसे समाज और उद्योग से जोड़ते हुए वास्तविक समस्याओं के समाधान की दिशा में काम करें। साथ ही युवाओं को विज्ञान के प्रति प्रेरित करने और विज्ञान संप्रेषण को प्रभावी बनाने की आवश्यकता पर भी जोर दिया।
कुलगुरु प्रो. सोमनाथ सचदेवा ने सभी वैज्ञानिकों को हार्दिक बधाई देते हुए कहा कि गोयल पुरस्कार उनकी उत्कृष्ट उपलब्धियों की पहचान है और उन्हें विज्ञान के क्षेत्र में नई ऊँचाइयों तक पहुँचने के लिए प्रेरित करेगा। उन्होंने बताया कि कुछ वर्षों पहले जहाँ भारत का नवाचार सूचकांक लगभग 81वें स्थान के आसपास था, वहीं अब यह 38वें स्थान तक पहुँच गया है। आज देश में 120 से अधिक यूनिकॉर्न और लगभग दो लाख स्टार्टअप सक्रिय हैं, जो भारत की वैज्ञानिक और तकनीकी क्षमता का प्रमाण हैं। उन्होंने कहा कि गोयल पुरस्कार ने वर्षों के दौरान देश में एक विशिष्ट पहचान बनाई है और असाधारण वैज्ञानिक उपलब्धियों को सम्मानित करने की गौरवशाली परंपरा स्थापित की है।
प्रो. सोमनाथ सचदेवा ने कुरुक्षेत्र विश्वविद्यालय की उपलब्धियों का उल्लेख करते हुए बताया कि कुरुक्षेत्र विश्वविद्यालय हरियाणा का सबसे पुराना और सबसे बड़ा राज्य विश्वविद्यालय है, जिसकी आधारशिला भारत के प्रथम राष्ट्रपति डॉ. राजेंद्र प्रसाद ने रखी थी। प्रारंभ में यह एक एकल-विषय विश्वविद्यालय था, लेकिन आज यह एक बहु-विषयक विश्वविद्यालय के रूप में विकसित हो चुका है। वर्तमान में यहाँ 200 से अधिक शैक्षणिक कार्यक्रम संचालित किए जा रहे हैं और परिसर में हजारों विद्यार्थी अध्ययनरत हैं। कुरुक्षेत्र विश्वविद्यालय ने राष्ट्रीय शिक्षा नीति-2020 के सभी प्रावधानों को देश में सबसे पहले प्रभावी रूप से लागू किया है।
उन्होंने बताया कि वर्ष 2023 में आयोजित मान्यता प्रक्रिया में विश्वविद्यालय को नैक द्वारा ए++ ग्रेड प्राप्त हुआ, जो हरियाणा के किसी भी सार्वजनिक विश्वविद्यालय को प्राप्त सर्वोच्च ग्रेड है। पिछले कुछ वर्षों में विश्वविद्यालय ने कई नए शैक्षणिक कार्यक्रम शुरू किए हैं, जिनमें साइबर सिक्योरिटी, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, मशीन लर्निंग और क्लाउड कंप्यूटिंग जैसे उभरते क्षेत्रों से जुड़े पाठ्यक्रम शामिल हैं।
शोध के क्षेत्र में भी विश्वविद्यालय ने उल्लेखनीय प्रगति की है। पिछले चार वर्षों में विश्वविद्यालय को लगभग 64 पेटेंट प्राप्त हुए हैं, जिनमें से कई का व्यावहारिक उपयोग भी शुरू हो चुका है। विश्वविद्यालय के इनक्यूबेशन सेंटर के माध्यम से 18 स्टार्टअप भी स्थापित किए गए हैं। उन्होंने कहा कि विश्वविद्यालय शिक्षा के साथ-साथ शोध और नवाचार को भी विशेष महत्व देता है। गोयल पुरस्कार जैसे प्रतिष्ठित सम्मान वैज्ञानिकों को उनके उत्कृष्ट कार्यों के लिए पहचान दिलाने के साथ-साथ विद्यार्थियों को भी वैज्ञानिक सोच विकसित करने के लिए प्रेरित करते हैं।
समारोह के दौरान वर्ष 2023-24 के लिए चार गोयल पुरस्कार और चार राजीब गोयल पुरस्कार प्रदान किए गए। गोयल पुरस्कार के अंतर्गत एप्लाइड साइंसेज में डॉ. अनिरुद्ध भालचंद्र पंडित, केमिकल साइंसेज में डॉ. थालप्पिल प्रदीप, लाइफ साइंसेज में डॉ. परमजीत खुराना तथा फिजिकल साइंसेज में डॉ. श्रीराम रामास्वामी को सम्मानित किया गया। इन सभी वैज्ञानिकों ने अपने-अपने क्षेत्रों में अंतरराष्ट्रीय स्तर पर महत्वपूर्ण शोध कार्य करके विज्ञान के क्षेत्र में नए आयाम स्थापित किए हैं। प्रत्येक पुरस्कार विजेता को 2 लाख रुपये की नकद राशि, स्वर्ण पदक तथा प्रशस्ति पत्र प्रदान किया गया।
इसके साथ ही युवा वैज्ञानिकों को प्रोत्साहित करने के उद्देश्य से 45 वर्ष से कम आयु के प्रतिभाशाली वैज्ञानिकों को राजीब गोयल पुरस्कार से सम्मानित किया गया। इस श्रेणी में एप्लाइड साइंसेज के लिए डॉ. गोपीनाथ पैकिरिसामी, केमिकल साइंसेज के लिए डॉ. देबब्रत मैती, लाइफ साइंसेज के लिए डॉ. दुर्गा पाल तथा फिजिकल साइंसेज के लिए डॉ. स्मराजीत कर्माकर को सम्मानित किया गया। प्रत्येक विजेता को पदक, प्रशस्ति-पत्र तथा एक लाख रुपये की नकद राशि प्रदान की गई।
आयोजन समिति की संयोजक प्रो. अनीता भटनागर ने समारोह में उपस्थित सभी अतिथियों और प्रतिभागियों का स्वागत किया तथा गोयल पुरस्कार की परंपरा और उसके महत्व पर प्रकाश डाला। उन्होंने बताया कि यह पुरस्कार देश के वैज्ञानिकों को उत्कृष्ट शोध कार्य के लिए प्रेरित करता है और वैज्ञानिक अनुसंधान को बढ़ावा देने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है।
समारोह के दौरान सम्मानित वैज्ञानिकों ने गोयल पुरस्कार देने के लिए कुलगुरु प्रो. सोमनाथ सचदेवा व गोयल पुरस्कार समिति का आभार प्रकट किया तथा सभी ने अपने शोध कार्यों और अनुभवों को भी साझा किया। उन्होंने विद्यार्थियों और शोधार्थियों को शोध में निरंतरता, जिज्ञासा और नवीन सोच बनाए रखने की सलाह दी।
सह-संयोजक प्रो. एस.पी. सिंह ने कहा कि कुरुक्षेत्र विश्वविद्यालय वर्ष 1992 से देश के उत्कृष्ट वैज्ञानिकों को गोयल पुरस्कार प्रदान करता आ रहा है, जो आज वैज्ञानिक उपलब्धियों के लिए एक प्रतिष्ठित सम्मान के रूप में स्थापित हो चुका है। मंच का संचालन डॉ. संगीता सैनी ने किया। अंत में कुलसचिव प्रो. वीरेन्द्र पाल ने सभी अतिथियों का धन्यवाद ज्ञापित किया।
इस अवसर पर श्रीमती अनिता सूद, प्रो. राघुवेन्द्र तंवर,, प्रो. एनके माटा, कुलसचिव प्रो. वीरेंद्र पाल, डीन एकेडमिक अफेयर्स प्रो. राकेश कुमार, डीन ऑफ कॉलेजिज प्रो. ब्रजेश साहनी, छात्र कल्याण अधिष्ठाता प्रो. ए.आर. चौधरी, प्रो. सुनील ढींगरा, प्रो. दिनेश कुमार, प्रो. जसबीर ढांडा, प्रो. संजीव अग्रवाल, प्रो. अनिल मित्तल, डीन प्रो. प्रीति जैन, प्रो. अनुरेखा शर्मा, प्रो. संजीव अरोड़ा, प्रो. जी.पी.दुबे, प्रो. रजनीश शर्मा, युवा एवं सांस्कृतिक कार्यक्रम विभाग के निदेशक प्रो. विवेक चावला, प्रो. परमेश कुमार, प्रो. दीपक राय बब्बर, प्रो. जितेन्द्र भारद्वाज, डॉ. सुमन ढांडा, प्रो. अश्वनी कुमार, डॉ. सुमन मेंहदिया, लोक सम्पर्क विभाग के निदेशक प्रो. महासिंह पूनिया, डॉ. राज कमल, सहित डीन, निदेशक, विभागाध्यक्ष, शिक्षक, शोधार्थी व विद्यार्थी मौजूद रहे।


