भारत सरकार ने MSP की मामूली वृद्धि कर किसानों के साथ किया बधा मजाक किसान वर्ग में है भारी निराशा : गुर्जर
करनाल/18 मई /अटल हिन्द ब्यूरो
किसान के उत्थान के लिए स्वामीनाथन कमीशन की सिफारिश लागू करना समय की ज़रूरत !
भारतीय किसान यूनियन चढूनी संगठन के नीलोखेड़ी युवा हल्का प्रधान अरविंद गुर्जर बैरसाल जी ने कहा की भारत सरकार द्वारा 2026-27 की ख़रीफ़ सीज़न की फ़सलों के न्यूनतम समर्थन मूल्य में की गई मामूली वृद्धि की घोषणा पर प्रतिक्रिया देते हुए इस घोषणा को कमतर व अव्यावहारिक बताया महंगाई के इस दौर में धान के मूल्य में मात्र 72 रुपये की वृद्धि किसानों के साथ अन्याय है, गुर्जर ने कहा इसी प्रकार अन्य सभी फसलों के मूल्य में केवल औपचारिकता ही नज़र आ रही है, गुर्जर ने कहा यह मोदी सरकार की किसानों के प्रति कठोर व संवेदनहीन सोच का प्रकटीकरण है।
उन्होंने कहा कि बीजेपी जब सत्ता में नहीं होती तब तो किसानों की दयनीय स्थिति में सुधार के लिए स्वामीनाथन कमीशन के मुताबिक़ रेट देने की माँग करती है व वायदा भी किया था कि सत्ता में आते ही किसानों की आर्थिक स्थिति सुधारने के लिए स्वामीनाथन कमीशन का फ़ार्मूला लागू किया जाएगा। परंतु जब से बीजेपी सत्तासीन हुई है किसान हित में कोई कार्य नहीं किया।
गुर्जर ने कहा प्रधानमंत्री मोदी कई वर्षों तक किसान की आमदन 2022 तक दोगुनी करनें की लोकलुभावन बातें करते रहे समयसीमा पूरी होने पर वास्तव में यह सारे वादे व घोषणाएँ मात्र दिखावे ही निकली।
अरविंद गुर्जर ने कहा कि महँगाई के इस युग में किसान के खर्चे बड़े हैं व आय कम हुई है ख़ासतौर पर पिछले दो सीज़न में ख़राब मौसम बिमारियों की वजह से भारी आर्थिक व मानसिक संकट के दौर में है, इन परिस्थितियों में सरकार को चाहिए की वह फसल के भाव को लागत मूल्य पर पचास प्रतिशत मुनाफ़े के हिसाब से तय करे तथा एम एस पी पर खरीद के पुख़्ता प्रबंध कर किसानों की स्थिति में सुधार लाने का कार्य करे।


